अब PDA प्लस फॉर्मूला लाए अखिलेश यादव, ब्राह्मण-कायस्थ से लेकर कुशवाहा समाज को साधकर क्या संदेश दे रही सपा?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबसे पहले यूपी विधानसभा में अपनी कुर्सी (नेता विपक्ष) को लेकर जो नियुक्ति की, उसने हर किसी को हैरत में डाल दिया. उन्होंने नेता विपक्ष के तौर पर माता प्रसाद पांडे का चयन किया. माता प्रसाद ब्राह्मण समाज से आते हैं और पुराने समाजवादी हैं. वे दिवंगत मुलायम सिंह यादव के नजदीकी और संस्थापक सदस्यों में रहे.

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दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव, अवधेश प्रसाद. दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव, अवधेश प्रसाद.

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 02 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक यानी PDA का फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में खूब हिट रहा. PDA के दम पर अखिलेश ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी की ईंट से ईंट बजा दी और अब जब वो दिल्ली (सांसद बनकर) पहुंच गए हैं तो PDA का विस्तार करने में जुट गए हैं. हाल में उन्होंने जो नियुक्तियां की हैं, उसके कई संदेश निकलकर सामने आ रहे हैं.

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PDA के सफल प्रयोग के बाद अब अखिलेश यादव इसमें ब्राह्मण समाज को भी जोड़ने लगे हैं. यानी PDA का एक्सटेंशन दिखाई देने लगा है. अखिलेश यादव ने यह प्रयोग दोनों सदनों में किया है.

लखनऊ के विधान मंडल दल में समाजवादी पार्टी की नियुक्तियों और संसद में संसदीय दल की अलग-अलग नियुक्तियों से यह साफ है कि अखिलेश अब 2027 की तैयारी में PDA + यानी पीडीए से आगे बढ़कर ABDP यानी अल्पसंख्यक, ब्राह्मण, दलित और पिछड़े का कंबीनेशन बनाने में जुट गए हैं.

माता प्रसाद को नेता विपक्ष बनाकर ब्राह्मण समाज को संदेश

अखिलेश यादव ने सबसे पहले विधानसभा में अपनी कुर्सी (नेता विपक्ष) को लेकर जो नियुक्ति की, उसने हर किसी को हैरत में डाल दिया. उन्होंने नेता विपक्ष के तौर पर माता प्रसाद पांडे का चयन किया. माता प्रसाद ब्राह्मण समाज से आते हैं और पुराने समाजवादी हैं. वे दिवंगत मुलायम सिंह यादव के नजदीकी और संस्थापक सदस्यों में रहे. कई बार के विधायक और मंत्री रहे हैं. सपा सरकार में विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं. अखिलेश यादव ने माता प्रसाद को सदन में अपनी पार्टी का नेता और नेता विपक्ष चुना है. अखिलेश ने 2022 में करहल सीट से विधानसभा चुनाव जीता था और नेता विपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. हाल में उन्होंने कन्नौज सीट से आम चुनाव लड़ा और जीत के बाद विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी.

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अखिलेश ने विधानसभा में ही दूसरी नियुक्तियों में मुस्लिम समाज से आने वाले महबूब अली को मुख्य सचेतक और कमाल अख्तर को उपमुख्य सचेतक बनाया और अपने मुस्लिम वोट बैंक को मैसेज दिया. कुर्मी बिरादरी से आने वाले आरके वर्मा को उपसचेतक और मोहम्मद जसमेर अंसारी को विधायक दल का उपनेता बनाया.

नियुक्तियों में PDA प्लस की तस्वीर

अखिलेश ने अपने यादव वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए लाल बिहारी यादव को विधान परिषद में सदन का नेता बनाया तो विधान परिषद में किरण पाल कश्यप को मुख्य सचेतक और कायस्थ जाति से आने वाले आशुतोष सिंह को सचेतक का पद दिया. यानी विधानसभा और विधान परिषद में अखिलेश ने जातियों का एक गुलदस्ता बनाया, जिसमें उनके पीडीए प्लस की तस्वीर दिखाई दी.

पीडीए से आगे बढ़कर अखिलेश ने इसमें ब्राह्मण और कायस्थ को जोड़ने की कोशिश की है. ये वो दोनों जातियां हैं जो बीजेपी का वोट बैंक मानी जाती हैं और अब अखिलेश भी इन दोनों समाज को अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगे हैं.

पासी बिरादरी को अपने पाले में ला रहे अखिलेश

अब बात संसद की. अखिलेश यादव जब संसद पहुंचे तो अपने साथ हाथों में हाथ डालकर अवधेश प्रसाद (फैजाबाद से सांसद) को संसद भवन ले गए. अवधेश अब हमेशा अखिलेश के बगल में आगे की पंक्ति में बैठते हैं. अखिलेश ने यहां से पासी बिरादरी को संदेश दिया. यह वो दलित समुदाय है, जो पिछले एक दशक से ज्यादातर समय बीजेपी के साथ रहा है. लेकिन अब अखिलेश दलितों में पासी बिरादरी को सीधा संदेश भेज रहे हैं.

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कुशवाहा या मौर्य बिरादरी पर पहले बसपा की मजबूत पकड़ रही. बाद में ये समाज मायावती से छिटका तो बीजेपी में शिफ्ट हो गया, लेकिन अब कुशवाहा बिरादरी के बड़े चेहरे बाबू सिंह कुशवाहा के जौनपुर से सांसद बनने के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें लोकसभा में सदन का उपनेता बनाया है. यानी संसद में अखिलेश के बाद उनका नंबर दूसरा होगा. आजमगढ़ से सांसद और अपने भाई धर्मेंद्र यादव को लोकसभा में मुख्य सचेतक बनाया है. जबकि अवधेश प्रसाद को अधिष्ठाता मंडल का सदस्य बनाया है.

कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के भीतर विधान मंडल और संसद में जो नियुक्तियां की हैं, यह उनके पीडीए के फॉर्मूले को आगे बढ़ाने की कवायद दिखाई दे रही है.

क्या है अखिलेश का नया फॉर्मूला?

अखिलेश पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यकों के बाद अब अगड़ी जातियों को भी साधते दिखाई दे रहे हैं और उनके प्लान में ब्राह्मण वोट बैंक भी है. चूंकि ब्राह्मण समाज के बारे में माना जा रहा है कि वो धीरे-धीरे यूपी में बीजेपी से नाराज हो रहा है. ऐसे में कांग्रेस को साथ लेने के बाद अब अखिलेश ब्राह्मण बिरादरी को साधने में जुट गए हैं.अखिलेश को लगता है कि 2027 में अगर पीडीए से आगे बढ़कर उन्होंने इन बिरादरियों को साध लिया तो उनके लिए जीत का फॉर्मूला आसान हो जाएगा.

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