लखीमपुर: NEET परीक्षा रद्द होने के बाद छात्र ने दी जान, परिवार का दावा- सदमे में था; राहुल गांधी बोले- 'यह सिस्टम द्वारा हत्या है'

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में नीट (NEET) की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा ने पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से निराश होकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। तीन बार से लगातार मेहनत कर रहे छात्र की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।

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21 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा ने की आत्महत्या (Photo- ITG) 21 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा ने की आत्महत्या (Photo- ITG)

aajtak.in

  • लखीमपुर खीरी,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

यूपी के लखीमपुर खीरी में 14 मई को नीट परीक्षा (NEET Exam) की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा ने अपने घर के एक बंद कमरे में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. मूल रूप से ईसानगर थाना क्षेत्र के हसनपुर कटौली गांव का रहने वाला ऋतिक इस बार अपनी परीक्षा को लेकर बेहद आश्वस्त था. हालांकि, 3 मई को हुई नीट (UG) 2026 परीक्षा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने पेपर लीक के आरोपों के बाद मंगलवार को रद्द कर दिया. इस फैसले से मानसिक तनाव और पीड़ा के कारण छात्र ने गंगोत्रीनगर स्थित अपने दूसरे घर के कमरे में खुद को फंदे से लटका लिया.

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इसको लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी रिएक्ट किया है. उधर, छात्र ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या के विरोध में शुक्रवार को सपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया. केंद्र सरकार और परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सपा नेताओं ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. इस दौरान प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया.

तीसरा प्रयास और परीक्षा पास करने का पूरा भरोसा

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ऋतिक के पिता अनूप मिश्रा ने रुंधे गले से बताया कि यह उनके बेटे का नीट परीक्षा पास करने का तीसरा प्रयास था. वह पिछले दो प्रयासों की कमियों को सुधारकर दिन-रात पढ़ाई में जुटा हुआ था और उसे इस बार डॉक्टर बनने का पूरा भरोसा था. बुधवार को जब वह गांव से शहर वाले घर लौटा, तो उसने परीक्षा रद्द होने के कारण हो रहे अपने मानसिक तनाव और गहरी पीड़ा को परिवार के सामने छिपाया नहीं था. वह इस अप्रत्याशित फैसले से अंदर से पूरी तरह टूट चुका था.

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कमरे से नहीं मिला सुसाइड नोट, जांच में जुटी पुलिस

घटना की सूचना मिलते ही लखीमपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची. कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि जिस कमरे में ऋतिक का शव फंदे से लटका मिला, वहां से तलाशी के दौरान कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस ने मौत के सही कारणों का सटीक पता लगाने के लिए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि खुदकुशी के असली कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए गहनता से जांच की जाएगी.

लाखों उम्मीदवारों का भविष्य अधर में, सीबीआई जांच जारी

अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा के अचानक रद्द होने से देश के 22 लाख से ज्यादा मेडिकल उम्मीदवारों का भविष्य पूरी तरह से अनिश्चितता के भंवर में पड़ गया है. पेपर लीक के इस गंभीर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है, जिसने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है. 

राहुल गांधी का पोस्ट 

मामले में कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर लिखा- 'अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा... लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे. तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया. गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी. ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है. यह आत्महत्या नहीं- यह सिस्टम द्वारा हत्या है.'

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उन्होंने आगे आंकड़े लिखे- 

2015 से 2026 तक- 148 परीक्षा घोटाले.

87 परीक्षाएं रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित.

148 घोटालों में सज़ा हुई- सिर्फ़ 1 को.

CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11- किसी को सज़ा नहीं.

NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले.

बकौल राहुल- इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं हुआ. हटाए जाते हैं - फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं. चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गंवाते हैं.

प्रियंका गांधी वाड्रा का बयान 

वहीं, प्रियंका ने लिखा- यूपी के लखीमपुर खीरी में छात्र ऋतिक मिश्रा के खुदकुशी का समाचार अत्यंत दुखद है. ऋतिक के शोक संतप्त माता-पिता एवं परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं.

पीड़ित परिवार के मुताबिक, NEET परीक्षा रद्द होने की वजह से ऋतिक मानसिक तनाव में थे. परीक्षाओं में चल रहा भयानक भ्रष्टाचार युवाओं की जान ले रहा है. हर साल लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. यह सिलसिला कब रुकेगा? जवाबदेही कब तय होगी?

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