लखनऊ में गैस संकट के बीच अब एक चौंकाने वाली कहानी सामने आ रही है. कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्होंने ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुक कराया, भुगतान भी किया और मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज भी आ गया, लेकिन सिलेंडर उनके घर तक पहुंचा ही नहीं. लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सिस्टम में डिलीवरी दिख रही है तो सिलेंडर आखिर गया कहां?
लाइन में लगे उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनकी बुकिंग वाले सिलेंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं. शिकायत लेकर जब लोग गैस एजेंसियों पर पहुंचे तो उन्हें यही जवाब मिला कि रिकॉर्ड में सिलेंडर पहले ही डिलीवर दिखाया जा चुका है.
लखनऊ की कई गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें हैं. हालात ऐसे हैं कि लोग रात 1-2 बजे से ही खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े हो जाते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी पता नहीं होता कि सिलेंडर मिलेगा या नहीं. महिलाओं, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों की यह जद्दोजहद राजधानी में गैस सप्लाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
लखनऊ में गैस एजेंसियों के बाहर जो दृश्य देखने को मिल रहे हैं, वे किसी राहत शिविर या राशन वितरण केंद्र की कतारों जैसे लगते हैं. लोग अपने-अपने खाली सिलेंडर लेकर देर रात से ही लाइन में लग जाते हैं. कई लोग बताते हैं कि वे रात 1 बजे या 2 बजे से लाइन में खड़े हैं, ताकि सुबह तक उनका नंबर आ सके.
लेकिन सुबह होने तक कतार इतनी लंबी हो जाती है कि कई लोगों को यह अंदाजा ही नहीं होता कि उन्हें सिलेंडर मिल पाएगा या नहीं.
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वह रात 2 बजे से लाइन में खड़ा है, लेकिन सुबह तक एजेंसी की ओर से यह कह दिया गया कि सिस्टम से सिलेंडर की डेट 24 तारीख की आ रही है. यानी अभी भी उन्हें इंतजार करना पड़ेगा.
बुकिंग हो नहीं रही, सिस्टम दे रहा नई तारीख
लोगों की बड़ी परेशानी यह है कि गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग भी ठीक से नहीं हो पा रही है. कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे कई दिनों से बुकिंग करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सर्वर डाउन होने की वजह से बुकिंग नहीं हो पा रही.
कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने पांच दिन पहले ऑनलाइन बुकिंग की थी और पेमेंट भी कर दिया था, लेकिन अब तक सिलेंडर मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही.
एक उपभोक्ता ने बताया कि उसने एक महीने से ज्यादा समय से सिलेंडर बुक करने की कोशिश की, लेकिन सिस्टम में बुकिंग ही नहीं हो रही. इसके बावजूद एजेंसी वाले बार-बार कहते हैं कि पहले बुकिंग कराइए.
बुजुर्ग महिलाएं भी घंटों लाइन में
इस मामले में ज्यादा परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है. कई बुजुर्ग महिलाएं सुबह 5 बजे से लाइन में खड़ी हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा.
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एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि उन्होंने 2 तारीख को सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन अब तक डिलीवरी नहीं हुई. मजबूर होकर उन्हें एजेंसी के बाहर लाइन में लगना पड़ा.
महिलाओं का कहना है कि घर की रसोई पूरी तरह गैस पर निर्भर है. अगर सिलेंडर नहीं मिला तो खाना बनाना भी मुश्किल हो जाएगा.
300 से ज्यादा लोग कतार में
गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई जगहों पर 200 से 300 लोग लाइन में खड़े नजर आते हैं. कुछ लोगों का दावा है कि कई बार यह संख्या 600 तक भी पहुंच जाती है.
लोग अपने-अपने खाली सिलेंडर लाइन में लगाकर खड़े रहते हैं और इंतजार करते हैं कि कब उनका नंबर आएगा. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि सिलेंडर खत्म हो जाते हैं और कई लोग खाली हाथ वापस लौट जाते हैं.
'डिलीवर' दिखा रहा मैसेज, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला
कई उपभोक्ताओं ने एक और गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मोबाइल पर मैसेज आता है कि सिलेंडर डिलीवर हो चुका है, जबकि असल में उन्हें सिलेंडर मिला ही नहीं.
लोग अपनी गैस बुकिंग की किताबें और मैसेज दिखाकर एजेंसी से सवाल कर रहे हैं कि जब सिलेंडर मिला ही नहीं तो सिस्टम में डिलीवरी कैसे दिख रही है. इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई है.
लाइन में भी गड़बड़ी के आरोप
कतार में लगे लोगों का आरोप है कि एजेंसी के बाहर लाइन तो लगती है, लेकिन कई बार बीच-बीच में कुछ लोग सीधे अंदर जाकर सिलेंडर ले जाते हैं.
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लोगों का कहना है कि अगर टोकन सिस्टम लागू कर दिया जाए तो इस तरह की गड़बड़ी रोकी जा सकती है. लेकिन अभी ऐसा कोई सिस्टम नजर नहीं आता.
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि टोकन नहीं दिए जाते और कई बार देर से आने वाले लोगों को भी पहले सिलेंडर मिल जाता है.
तीन दिन से भटक रहे लोग
कई उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जो पिछले दो-तीन दिनों से लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं.
एक युवक ने बताया कि वह तीन दिन से लाइन में लग रहा है, लेकिन हर बार सिलेंडर खत्म हो जाता है. कभी कहा जाता है कि ऑनलाइन बुकिंग वालों को मिलेगा, तो कभी कहा जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया. इस वजह से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है.
'परिवार छोड़कर रात में आना पड़ता है'
कई लोग बताते हैं कि अगर सुबह आएंगे तो नंबर ही नहीं आएगा. इसलिए वे देर रात घर से निकलकर गैस एजेंसी के बाहर पहुंच जाते हैं. कुछ लोग तो अपने साथ चादर या कपड़ा लेकर आते हैं, ताकि ठंड या हवा से बच सकें.
सुबह होते-होते लाइन इतनी लंबी हो जाती है कि पीछे खड़े लोगों को पता होता है कि शायद आज भी सिलेंडर नहीं मिलेगा.
लोगों की बढ़ती नाराजगी
लगातार हो रही परेशानी के कारण लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है. उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर गैस की सप्लाई कम है तो प्रशासन को साफ-साफ जानकारी देनी चाहिए. साथ ही बुकिंग और डिलीवरी सिस्टम को भी पारदर्शी बनाना जरूरी है, ताकि लोगों को बेवजह घंटों लाइन में खड़ा न रहना पड़े.
सिस्टम पर उठ रहे सवाल
लखनऊ जैसे बड़े शहर में अगर लोगों को गैस सिलेंडर के लिए रात से लाइन लगानी पड़ रही है तो यह गैस सप्लाई सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
लोगों का कहना है कि अगर बुकिंग सही तरीके से हो और टोकन सिस्टम लागू कर दिया जाए तो भीड़ और अव्यवस्था काफी हद तक कम हो सकती है.
उम्मीद में खड़े लोग
इन सब परेशानियों के बावजूद लोग लाइन छोड़कर नहीं जाते. उन्हें उम्मीद रहती है कि शायद उनका नंबर आ जाए और उन्हें गैस सिलेंडर मिल जाए. लेकिन कई बार घंटों इंतजार के बाद भी लोग खाली हाथ लौटने को मजबूर हो जाते हैं.
लखनऊ में गैस एजेंसियों के बाहर लगी यह लंबी कतारें साफ बता रही हैं कि शहर में गैस की किल्लत लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है. महिलाओं, बुजुर्गों और आम परिवारों की यह जद्दोजहद राजधानी की सप्लाई व्यवस्था की हकीकत भी उजागर कर रही है.
आशीष श्रीवास्तव