आंखों देखी: लखनऊ में जहां 15 लोगों की थम गईं सांसें, उस बिल्डिंग के अंदर का सच आया सामने

लखनऊ के अलीगंज में आग की घटना के बाद जिस इमारत में 15 लोगों की मौत हुई, उसका ढांचा अब जांच के केंद्र में है. मौके पर देखने से पता चलता है कि पूरी बिल्डिंग में आने-जाने का मुख्य रास्ता एक ही था. जांच एजेंसियां हादसे की वजह और सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल कर रही हैं.

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हादसे के बाद लखनऊ की उस बिल्डिंग का बाहरी नजारा. (Photo: ITG) हादसे के बाद लखनऊ की उस बिल्डिंग का बाहरी नजारा. (Photo: ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:08 PM IST

लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-डी में जिस इमारत में लगी आग ने 15 लोगों की जान ले ली, वहां का मंजर अब भी हादसे की भयावहता बयां कर रहा है. आग बुझ चुकी है, लेकिन बिल्डिंग के भीतर मौजूद हालात कई ऐसे सवाल खड़े कर रहे हैं जिनकी जांच अभी जारी है. मौके पर पहुंचकर देखने पर सबसे पहले जो बात सामने आती है, वह यह कि पूरी इमारत में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य रास्ता है. हादसे के बाद अब यही संरचना चर्चा का विषय बनी हुई है.

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अलीगंज के महाकवि जयशंकर प्रसाद वार्ड में बनी यह इमारत सामने से देखने पर तीन मंजिला लगती है, लेकिन इसमें एक अतिरिक्त ऊपरी मंजिल और एक बेसमेंट भी है. यानी कुल मिलाकर यह पांच स्तरों वाली इमारत है.

इस पूरी कमर्शियल बिल्डिंग के भीतर जाने और बाहर निकलने के लिए सिर्फ पांच फीट चौड़ा एक ही गेट बनाया गया था. मुख्य गेट से अंदर कदम रखते ही सिर के ठीक ऊपर AC के सात बड़े पैनल लगे दिखाई देते हैं, पास में दो एग्जॉस्ट फैन भी नजर आते हैं. यहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर दो तरफ सीढ़ियां मुड़ती हैं. एक रास्ता नीचे सीधे बेसमेंट की तरफ जाता है, जहां कपड़ों का एक बड़ा गोदाम बना हुआ है. ऊपरी मंजिलों पर जाने के लिए जो रास्ता बनाया गया था, वह भी बहुत छोटा (तंग) है. पूरी इमारत में ऊपर जाने से लेकर नीचे आने तक सिर्फ यही एक रास्ता था. सबसे डरावना सच यह है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में बाहर भागने के लिए यहां कोई दूसरा सेफ्टी गेट मौजूद ही नहीं था.

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आग के बाद अंदर अब भी राहत कार्य जारी

सोमवार को लगी आग पर काबू पाने के लिए 19 दमकल गाड़ियों और दो हाइड्रोलिक मशीनों की मदद ली गई. घंटों की मशक्कत के बाद आग बुझाई जा सकी. फिलहाल बिल्डिंग के अंदर जमा पानी और कीचड़ निकालने का काम चल रहा है.

दमकल कर्मियों ने बड़े पाइप लगाकर पानी बाहर निकालना शुरू किया है. अंदर कई जगह फिसलन है, जिससे चलना भी आसान नहीं है. हादसे के बाद से बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है. दीवारों, छत और कमरों में धुएं के निशान साफ दिखाई देते हैं. कई जगह जले हुए तार पड़े हैं, जबकि कुछ हिस्सों में पिघली हुई पीवीसी अब भी लटकी हुई नजर आती है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक इस इमारत में रोज सुबह से युवाओं और कर्मचारियों की आवाजाही शुरू हो जाती थी. अलग-अलग इलाकों से लोग यहां आते थे. लेकिन हादसे के बाद पूरा परिसर शांत है. आसपास मौजूद लोग अब भी उस दिन के मंजर को याद कर रहे हैं, जब उन्होंने इस इमारत को आग की लपटों में घिरा देखा था.

फिलहाल जांच एजेंसियां हादसे के कारणों की पड़ताल कर रही हैं. वहीं, बिल्डिंग का ढांचा और सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में है. आने वाली रिपोर्ट से ही साफ हो सकेगा कि इस दर्दनाक हादसे के पीछे कौन-कौन सी वजहें जिम्मेदार थीं.
 

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