9 साल पहले लव मैरिज, फिर जम्मू के युवक से अफेयर... कानपुर में बिजनेसमैन के कत्ल की पूरी कहानी

कानपुर में हुई बिजनेसमैन के कत्ल की कहानी में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. लव मैरिज, फिर पत्नी का अफेयर, एक फोन कॉल और फिर मौत... 45 साल के मनीष गुप्ता की कहानी इन चार किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है. परिवार का आरोप है कि पत्नी के अफेयर को लेकर चल रहा विवाद इतना बढ़ गया कि उसने चाकू से हमला कर दिया.

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किचन से चाकू निकालकर पत्नी ने कर दी थी पति की हत्या. (Photo: Screengrab) किचन से चाकू निकालकर पत्नी ने कर दी थी पति की हत्या. (Photo: Screengrab)

सिमर चावला

  • कानपुर,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

यूपी के कानपुर में एक बिजनेसमैन की मौत हो गई. आरोप है कि पत्नी ने चाकू से हमला कर दिया था, जिसके बाद अस्पताल ले जाया गया और 11 दिन तक चले इलाज के बाद दम तोड़ दिया. अब इस कहानी में कई चौंकाने वाले फैक्ट सामने आ रहे हैं. परिजनों ने मृतक की पत्नी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. पुलिस ने आरोपी महिला को हत्या के आरोप में अरेस्ट कर लिया है.

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पूरा मामला कानपुर के फीलखाना थाना क्षेत्र का है. ये कहानी बालाजी धाम के रहने वाले बिजनेसमैन रामकिशोर गुप्ता के बेटे मनीष गुप्ता की है. 45 वर्षीय मनीष गुप्ता किराना बाजार में ब्रोकर का काम करते थे. करीब नौ साल पहले मनीष की मुलाकात निहारिका कश्यप नाम की लड़की से हुई थी.

निहारिका कानपुर के बिरहाना रोड पर स्थित एक स्कूल में टीचर थी. दोनों की मुलाकात दोस्ती में बदली, दोस्ती प्यार में और फिर 30 जून 2017 को दोनों ने शादी कर ली. परिवार भी इस रिश्ते के साथ था. कुछ समय बाद उनका एक बेटा हुआ. परिवार वालों का कहना है कि शादी के बाद मनीष ने ब्रोकर का काम छोड़ दिया था. परिवार ने उन्हें रामगंज में ऑफिस दिला दिया था, जहां से वे कपूर सप्लाई का कारोबार करने लगे थे.

बाहर से देखने पर सब कुछ एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार जैसा दिखाई देता था. लेकिन अक्सर कहानियां वहीं से बदलती हैं, जहां सब कुछ सामान्य दिख रहा होता है. मृतक के पिता रामकिशोर गुप्ता का आरोप है कि करीब तीन साल पहले निहारिका की सोशल मीडिया के जरिए जम्मू के एक युवक से पहचान हुई. शुरुआत में यह एक सामान्य बातचीत थी. फिर बातचीत लंबी होने लगी. फोन पर घंटों बात होने लगी. धीरे-धीरे यह बात घर तक पहुंच गई.

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आरोप है कि जब मनीष को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया. यहीं से पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ने लगा. घर के अंदर बहसें होने लगीं. रिश्ते में दरार गहरी होती गई. फिर आया 5 जून... परिवार के मुताबिक, उस दिन निहारिका मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रही थी. उसी दौरान मनीष ने उसे देख लिया. फोन किसका था? बातचीत किस बारे में हो रही थी? पुलिस अभी इन सवालों की जांच कर रही है. लेकिन आरोप है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ.

शुरुआत में यह सामान्य बहस रही होगी. शायद वही सवाल, जो ऐसे मामलों में अक्सर पूछे जाते हैं. लेकिन कुछ ही मिनटों में माहौल बदल गया. परिजनों का आरोप है कि विवाद इतना बढ़ गया कि निहारिका ने रसोई में रखा चाकू निकाल लिया और मनीष के पेट पर कई वार कर दिए. इस वारदात ने पूरे परिवार को झकझोर दिया.

गंभीर रूप से घायल मनीष को अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया. ऑपरेशन हुए. दवाएं चलीं. परिवार अस्पताल के गलियारों में उम्मीद और डर के बीच झूलता रहा. मनीष ने अगले 11 दिन अस्पताल में बिताए. परिवार का दावा है कि इस दौरान जब उन्हें होश आया तो उन्होंने घटना से जुड़ी कुछ बातें बताईं. उन्हीं बातों के आधार पर परिवार अब यह आरोप लगा रहा है कि घटना के वक्त फोन के दूसरी तरफ मौजूद शख्स की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.

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क्या यह सिर्फ गुस्से में उठाया गया कदम था? क्या रिश्तों में लंबे समय से चल रहा तनाव इस अंजाम तक पहुंचा? या फिर कहानी में कुछ और किरदार भी हैं, जिनकी भूमिका अभी सामने आनी बाकी है? इन सवालों के जवाब फिलहाल पुलिस तलाश रही है.

मनीष के पिता रामकिशोर गुप्ता का आरोप है कि अस्पताल में मनीष जब होश में आए, तब मनीष ने बताया था कि घटना के दौरान निहारिका का प्रेमी फोन पर मौजूद था. हमले के बाद उसने फोन पर पूरी घटना की जानकारी दी, जिस पर दूसरी तरफ से पति को खत्म करने के लिए उकसाया गया. हालांकि, इस दावे की जांच की जा रही है.

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परिवार ने यह भी कहा कि करीब डेढ़ साल पहले निहारिका महिला थाने पहुंची थी और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. उस समय पुलिस की मध्यस्थता के बाद समझौता हो गया था. पुलिस का कहना है कि मनीष के पिता की शिकायत पर 14 जून को जानलेवा हमले का केस दर्ज हुआ था. पीड़ित की मौत के बाद हत्या की धाराएं बढ़ा दी गई हैं. आरोपी महिला को अरेस्ट कर लिया गया है.

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जांच एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं. मोबाइल फोन की जांच की जा रही है. डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले और बाद में किससे बातचीत हुई और पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन क्या थी.

इधर, परिवार के लोग एक अलग दर्द से गुजर रहे हैं. जिस घर में कभी शादी की तस्वीरें सजाई गई थीं, आज वहीं तस्वीरें एक ऐसे रिश्ते की याद दिला रही हैं, जिसका अंत पुलिस केस, गिरफ्तारी और मौत में हुआ. सबसे ज्यादा असर उस छह साल के बच्चे पर पड़ा है, जो शायद अभी यह भी नहीं समझ पा रहा होगा कि उसके परिवार में आखिर हुआ क्या है.

एक तरफ पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. दूसरी तरफ मां जेल में है. और बीच में छूट गया है एक ऐसा बचपन, जिसका इस पूरी कहानी में कोई दोष नहीं था. फिलहाल पुलिस जांच जारी है. लेकिन इस कहानी के कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं.

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