पानी टंकी बनाने के लिए खोद डाला कब्रिस्तान, बाहर आने लगे शव तो मचा बवाल

हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के पुसैनी गांव में जल जीवन मिशन के तहत ओवरहेड टैंक निर्माण के दौरान कथित तौर पर कब्रों को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है. खुदाई के दौरान शवों के बाहर आने की खबर से स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया. विरोध के बाद प्रशासन ने काम रुकवाया और शवों को दोबारा दफन कराया. जमीन की प्रकृति को लेकर अब जांच के आदेश दिए गए हैं.

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पानी टंकी बनाने के लिए खोद डाला कब्रिस्तान (Photo: representational image) पानी टंकी बनाने के लिए खोद डाला कब्रिस्तान (Photo: representational image)

aajtak.in

  • हाथरस,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:12 AM IST

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सादाबाद थाना क्षेत्र स्थित पुसैनी गांव में जल जीवन मिशन (ग्रामीण) के तहत बन रहे ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण कार्य के दौरान विवाद खड़ा हो गया. आरोप है कि खुदाई के दौरान कई कब्रों को नुकसान पहुंचा, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई.

घटना रविवार की बताई जा रही है, जब निर्माण कार्य के लिए जमीन की खुदाई की जा रही थी. इसी दौरान वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि यह जमीन लंबे समय से कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल होती रही है. खुदाई के दौरान कुछ शवों के अवशेष बाहर आने की खबर फैलते ही विशेष समुदाय के लोग मौके पर जुट गए और उन्होंने नाराजगी जताई.

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स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया और निर्माण कार्य को रुकवा दिया. अधिकारियों की मौजूदगी में बाहर आए शवों को सम्मानपूर्वक दोबारा दफन कराया गया. गांव के प्रधान उमेश कुमार भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों की आपत्तियों को देखते हुए काम बंद कराया.

मुख्य विकास अधिकारी पी.एन. दीक्षित ने बताया कि यह जमीन परियोजना के लिए लेखपाल द्वारा चिन्हित की गई थी. हालांकि, जब ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने इसे कब्रिस्तान बताते हुए आपत्ति जताई, तो काम तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया.

प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि संबंधित भूमि सरकारी है, सार्वजनिक उपयोग की है या फिर वास्तव में कब्रिस्तान के रूप में प्रयुक्त होती रही है. सादाबाद के उपजिलाधिकारी को इस पूरे मामले की जांच सौंपी गई है.

अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने निर्माण कार्यों से पहले जमीन के सत्यापन और स्थानीय संवेदनशीलताओं के ध्यान रखने की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है.

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