लखनऊ की सियासत के लिए बुधवार की सुबह एक मनहूस खबर लेकर आई. सुबह करीब 6:30 बजे तक यह खबर तेजी से फैल चुकी थी कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन हो गया है. तड़के करीब 5:55 बजे उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में ही बताया कि उनकी नब्ज और धड़कन नहीं चल रही है. इसके बावजूद डॉक्टरों ने ईसीजी और अन्य मेडिकल जांच कर यह पुष्टि की कि प्रतीक यादव की मौत हो चुकी है.
एक तरफ मौत की खबर फैल रही थी, दूसरी तरफ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तमाम तरह की अटकलें शुरू हो गईं. सवाल उठने लगे कि अस्पताल लाते समय अपर्णा यादव साथ क्यों नहीं थीं? प्रतीक को उनका स्टाफ अस्पताल लेकर क्यों आया? क्या यह आत्महत्या थी या फिर कोई साजिश? इन चर्चाओं की वजह कुछ महीने पहले सामने आई प्रतीक और अपर्णा यादव के बीच अनबन की खबरें थीं. खुद प्रतीक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बात को सार्वजनिक किया था. हालांकि बाद में दोनों ने इसे गलतफहमी बताते हुए मामला खत्म होने की बात कही थी.
सिविल अस्पताल ने प्रतीक यादव को ‘ब्रॉट डेड’ घोषित किया. इसके बाद संदेह और चर्चाओं का दौर और तेज हो गया. अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी और फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए केजीएमयू भेज दिया गया. इस बीच प्रतीक और अपर्णा यादव के आवास पर लोगों का जुटना शुरू हो गया. राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं. अपर्णा यादव उस समय लखनऊ में नहीं थीं. उनके करीबी माने जाने वाले मुकेश बहादुर सिंह ने बताया कि वह बंगाल, असम और सोमनाथ की यात्रा पर थीं और सूचना मिलते ही लखनऊ लौट आईं.
अपर्णा यादव ने सुबह करीब 10 बजे फोन पर कहा कि वह इस समय कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं और लखनऊ लौटने के बाद ही बात करेंगी. भाई की मौत की खबर मिलते ही अखिलेश यादव सीधे केजीएमयू की मॉर्चरी पहुंचे. वहां डॉक्टरों से बातचीत के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि कानूनी रूप से जो उचित होगा, परिवार वही करेगा. साथ ही उन्होंने इशारा किया कि प्रतीक यादव हाल के दिनों में कारोबारी नुकसान और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे. 38 वर्षीय प्रतीक यादव की अचानक मौत पर लोगों को यकीन करना मुश्किल हो रहा था. फिटनेस को लेकर बेहद सजग रहने वाले प्रतीक को लोग ‘फिटनेस फ्रीक’ के तौर पर जानते थे.
पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की विशेष टीम बनाई गई और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई. दोपहर तक प्रतीक और अपर्णा के आवास पर नेताओं, समर्थकों और रिश्तेदारों का पहुंचना शुरू हो गया. पोस्टमार्टम के बाद धीरे-धीरे यह साफ होने लगा कि न तो जहर देने और न ही आत्महत्या जैसी किसी बात के संकेत मिले हैं. पुलिस अधिकारियों ने भी कहा कि पोस्टमार्टम में यदि किसी तरह का ‘फाउल प्ले’ सामने आता है, तभी जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ‘पल्मोनरी थ्रॉम्बोएम्बॉलिज्म’ बताई गई. डॉक्टरों के मुताबिक यह बेहद दुर्लभ स्थिति होती है, जिसमें रक्त धमनियों में थक्का जमने लगता है और इससे हृदय गति रुक सकती है. परिवार की ओर से बताया गया कि सुबह करीब 5:30 बजे प्रतीक यादव घर के किचन में गिरे मिले थे. इसके बाद परिवार के अन्य लोगों को सूचना दी गई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
अपर्णा यादव के घर पहुंचने के बाद शिवपाल यादव, डिंपल यादव और यादव परिवार के अन्य सदस्य वहां पहुंचे. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह समेत कई नेता भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रतीक यादव के आवास पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर शोक व्यक्त किया. मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले साक्षी महाराज भी वहां पहुंचे थे. इस दौरान अखिलेश यादव ने बाहर आकर साक्षी महाराज को गले लगाया, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में होती रही.
प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बुधवार शाम तक पूरी सामने आ गई, जिसमें पुष्टि हुई कि उनकी मौत पल्मोनरी थ्रॉम्बोएम्बॉलिज्म के कारण हुई. रिपोर्ट में कुछ चोटों के निशान का भी जिक्र था, हालांकि डॉक्टरों ने अनौपचारिक तौर पर बताया कि ये चोटें पुरानी थीं. प्रतीक यादव के आवास पर लोगों के आने-जाने का सिलसिला लगातार जारी है. परिवार और समर्थकों के बीच गम का माहौल बना हुआ है. उनका अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11:30 बजे लखनऊ के भैंसाकुंड श्मशान घाट पर किया जाएगा.
कुमार अभिषेक