पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत का श्रेय जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी जैसे दिग्गज नेताओं को दिया जा रहा है, वहीं एक नाम ऐसा भी है जिसने अपने अलग ब्रांड और आक्रामक चुनाव प्रचार शैली से इस जीत में खास योगदान दिया, वो हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ.
योगी आदित्यनाथ बीजेपी के उन स्टार प्रचारकों में शामिल रहे, जिनकी मांग हर चुनावी राज्य में सबसे ज्यादा रहती है. बंगाल चुनाव उनके लिए खास मायने रखता था, और उन्होंने इसे अपने विशिष्ट प्रचार अंदाज से और भी महत्वपूर्ण बना दिया. 'ब्रांड योगी' का असर न सिर्फ उनकी सभाओं में उमड़ी भीड़ में दिखा, बल्कि चुनावी विमर्श और नतीजों में भी साफ नजर आया.
सभाओं का दम और 90% स्ट्राइक रेट
सीएम योगी ने बंगाल में 35 से अधिक चुनावी रैलियां कीं. इन रैलियों वाले क्षेत्रों में बीजेपी ने 31 सीटों पर जीत दर्ज की, यानी लगभग 90 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट. खास बात यह रही कि उनकी ज्यादातर सभाएं उन इलाकों में हुईं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक थी और जिन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. ऐसे क्षेत्रों में इस तरह का स्ट्राइक रेट बीजेपी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
चुनावी विमर्श में योगी मॉडल की एंट्री
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में जिस तरह कानून-व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख को चुनावी मुद्दा बनाया, वही नैरेटिव उन्होंने बंगाल में भी स्थापित करने की कोशिश की. उनकी सभाओं में बुलडोजर और एनकाउंटर जैसे शब्द राजनीतिक बहस का हिस्सा बने और इससे चुनावी माहौल पर असर पड़ा.
संवेदनशील इलाकों में आक्रामक प्रचार
पहले चरण में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों की कई सीटों पर योगी आदित्यनाथ ने रैलियां कीं, जबकि दूसरे चरण में दमदम, कोलकाता और आसनसोल जैसे शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में उनके कार्यक्रमों ने सियासी तापमान बढ़ाया. उन्होंने गोपालपुर, राजारहाट, धानेखाली, जॉयपुर, उदयनारायणपुर, सोनामुखी, कांथी, रामपुरहाट, माथाभंगा, बोलपुर, नवद्वीप, कटवा, बागदा, नंदकुमार और धूपगुड़ी जैसे इलाकों में सभाएं कीं. इसके अलावा बांकुरा, दमदम और कल्याणी में उनके रोड शो में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली.
योगी की डिमांड और राजनीतिक संदेश
योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी नेतृत्व से उनकी अधिक से अधिक सभाएं कराने की मांग की थी. एक सभा के दौरान शुभेंदु अधिकारी द्वारा योगी के चरण स्पर्श करने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. आलोचना के बाद शुभेंदु अधिकारी ने इसे नाथ संप्रदाय के पीठाधीश्वर के प्रति सम्मान बताया, जिससे यह संदेश गया कि योगी सिर्फ एक राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि धार्मिक प्रभाव वाले व्यक्तित्व भी हैं.
यूपी से बंगालियों को साधने की रणनीति
बंगाल जाने से पहले सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश में रह रहे बंगाली हिंदू शरणार्थियों को साधने की रणनीति अपनाई. लखीमपुर खीरी में बसे ऐसे परिवारों को उन्होंने जमीन का मालिकाना हक दिलाया और मियांपुर गांव का नाम बदलकर रविंद्र नगर कर दिया. करीब 1600 परिवारों को जमीन के दस्तावेज सौंपने के बाद उन्होंने बंगाल में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत की. इसे बंगाली मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव की रणनीति के तौर पर देखा गया.
बीजेपी की इस जीत में जहां प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता चरम पर रही, वहीं उत्तर प्रदेश से निकले दो चेहरों- योगी आदित्यनाथ और संगठनकर्ता सुनील बंसल की भूमिका भी चर्चा में रही. योगी ने जहां आक्रामक प्रचार और मजबूत नैरेटिव दिया, वहीं बंसल ने संगठनात्मक रणनीति को धार दी. बंगाल चुनाव में 'ब्रांड योगी' ने सिर्फ भीड़ जुटाने तक ही सीमित भूमिका नहीं निभाई, बल्कि चुनावी विमर्श को प्रभावित करते हुए बीजेपी के प्रदर्शन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया.
कुमार अभिषेक