बहराइच: 13 हजार से ज्यादा सरकारी किताबें कबाड़ में बेच दीं! 4 गिरफ्तार, BSA पर फर्जीवाड़े का आरोप

यूपी के बहराइच में बच्चों को मुफ्त बंटने वाली हजारों सरकारी किताबें कबाड़ी को बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. डीएम की सख्त कार्रवाई में कई कर्मचारी सस्पेंड और बर्खास्त किए गए हैं. हालांकि, अब आरोपी अधिकारियों ने ही बीएसए पर बैक डेट में फर्जी कमेटी बनाकर उन्हें फंसाने का बड़ा आरोप लगा दिया है.

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बहराइच में सरकारी किताबों को कबाड़ी को बेचने वाले चार आरोपी गिरफ्तार (Photo- ITG) बहराइच में सरकारी किताबों को कबाड़ी को बेचने वाले चार आरोपी गिरफ्तार (Photo- ITG)

राम बरन चौधरी

  • बहराइच,
  • 23 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST

Uttar Pradesh News: बहराइच जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में बच्चों की मुफ्त किताबों को रद्दी के भाव बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद आठ विभागीय सदस्यों को दोषी पाया. सोमवार को डीएम ने दो अनुचरों को निलंबित और तीन कर्मचारियों को बर्खास्त करने के साथ तीन अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की. जांच में सामने आया कि स्टॉक से हजारों किताबें कम थीं, जिन्हें कबाड़ी के जरिए उत्तराखंड भेजा जा रहा था. वहीं, पुलिस ने अब इस मामले में एक्शन लेते हुए अब चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आइये जानते हैं पूरा मामला... 

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13 हजार सरकारी किताबें बेचने वाले 4 गिरफ्तार

आपको बता दें कि बहराइच में बच्चों की मुफ्त किताबों के गबन मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. इस घोटाले का मास्टरमाइंड बीएसए कार्यालय का ही एक कर्मचारी निकला, जिसने चंद पैसों के लालच में 13 हजार से ज्यादा किताबें कबाड़ में बिकवा दीं.

BSA दफ्तर के कर्मचारी ने ही रची थी साजिश?

दरअसल, बहराइच की रामगांव थाना पुलिस ने सोमवार को सरकारी किताबों के गबन और अवैध बिक्री मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने 13,082 सरकारी पुस्तकें बरामद की हैं. गिरफ्तार आरोपियों में बीएसए कार्यालय का अनुचर आलोक मिश्रा शामिल है, जिसने अपने साथियों दिलशाद अली, शुभांकर और अर्जुन के साथ मिलकर स्टॉक से किताबें चोरी की थीं. 17 फरवरी को किताबों के कबाड़ में लदे होने की सूचना पर दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम और बीएनएस (BNS) की धाराओं में यह बड़ी कामयाबी हासिल की है.

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लालच ने बनाया अपराधी

पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी आलोक मिश्रा बीएसए दफ्तर में किताबों के रख-रखाव का काम देखता था. उसने अधिक धन कमाने के चक्कर में अपने साथियों के साथ मिलकर किताबों का गबन किया. पुलिस ने कबाड़ डीलर दिलशाद अली के पास से भारी मात्रा में किताबें बरामद की हैं. जांच में यह भी पता चला है कि कुछ लोगों ने किताबों की बिक्री का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आरोपियों से अवैध वसूली भी की थी, जिसकी जांच जारी है. फिलहाल, मुख्य आरोपी समीर अहमद अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है.

स्टॉक से गायब मिलीं हजारों किताबें

बीते दिनों सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में बंटने वाली किताबों के कबाड़ में बिकने का वीडियो वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था. डीएम द्वारा गठित कमेटी ने जब स्टॉक का मिलान किया, तो पाया कि 10 हजार से अधिक किताबें कम हैं. कबाड़ी की दुकान से जब्त ट्रक में लोड किताबें बहराइच की ही पाई गईं. चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआत में बीएसए ने स्टॉक पूरा होने का दावा कर पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन जांच रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी.

बर्खास्तगी और निलंबन की गाज

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आरोप तय होने पर डीएम ने कड़ी कार्रवाई की. अनुचर आलोक कुमार और शफीक अहमद को निलंबित कर दिया गया. वहीं, जिला समन्वयक आशुतोष सिंह और स्पेशल एजुकेटर दीपक कुमार को बर्खास्त कर दिया गया. सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश कुमार वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी रंजीत कुमार और नगर शिक्षा अधिकारी डॉली मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इनके विरुद्ध शासन को कठोर विभागीय कार्यवाही के लिए पत्र लिखा गया है, जिससे पूरे शिक्षा महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है.

BSA पर 'बैक डेट' की कमेटी का आरोप

कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों ने अब बीएसए पर ही गंभीर आरोप लगा दिए हैं. उनका कहना है कि जिस 'उत्तरदायी कमेटी' का हवाला देकर उन्हें फंसाया गया, वह कभी बनी ही नहीं थी. सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश कुमार और खंड शिक्षा अधिकारी डॉली मिश्रा व रंजीत कुमार ने डीएम से मिलकर कहा कि बीएसए ने खुद को बचाने के लिए बैक डेट में फर्जी कमेटी गठित कर दी. अधिकारियों का दावा है कि उन्हें मेंबर होने की जानकारी तक नहीं थी. इस आरोप के बाद अब खुद बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका सवालों के घेरे में है.

मीडिया के सवालों से बच रहे अफसर

इस पूरे घोटाले और फर्जी कमेटी के आरोपों के बीच जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं. किताबों के गायब होने और भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल पर उन्होंने फिलहाल चुप्पी साध ली है और फोन पर भी बात करने को तैयार नहीं हैं. एक तरफ जहां बच्चों के हक की किताबें 4 रुपये किलो के भाव बेची गईं, वहीं दूसरी तरफ विभाग के अंदर की इस नूराकुश्ती ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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