उत्तर प्रदेश के बागपत में हुए चर्चित व्यापारी बाप-बेटे की हत्या के बाद सामने आई एक जानकारी ने हर किसी को हैरान कर दिया है. जिस हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी ने दिनदहाड़े दो लोगों की हत्या कर पूरे इलाके में सनसनी फैला दी, वही अपराध की दुनिया से निकलकर राजनीति में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा था. उसकी मौत के बाद सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो उसके बदलते इरादों की कहानी बयां करते हैं.
जानकारी के मुताबिक, वरुण लुहारी का नाम लंबे समय से अपराध की दुनिया में जाना जाता था. हत्या, जानलेवा हमला, गैंगस्टर एक्ट और पुलिस पर फायरिंग जैसे गंभीर मामलों में उसका नाम सामने आ चुका था. लेकिन हाल के दिनों में उसकी सोशल मीडिया गतिविधियां कुछ अलग संकेत दे रही थीं. वह खुद को गांव की राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रहा था और ग्राम प्रधान चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटा हुआ था.
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हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति का नाम वर्षों से आपराधिक गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहा, उसने वारदात से महज एक दिन पहले गांव की सेवा और विकास की बात करते हुए लोगों से समर्थन मांगा था. लेकिन अगले ही दिन घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि उसका राजनीतिक भविष्य शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया.
फेसबुक पोस्ट से हुआ बड़ा खुलासा
हत्याकांड के बाद जब पुलिस और स्थानीय लोग वरुण लुहारी के अतीत और हालिया गतिविधियों की पड़ताल कर रहे थे, तब उसके फेसबुक अकाउंट से कई अहम जानकारियां सामने आईं. जांच में पता चला कि उसने वारदात से ठीक एक दिन पहले ग्राम प्रधान चुनाव लड़ने का सार्वजनिक ऐलान किया था.
वरुण ने फेसबुक पर अपने समर्थकों और गांव के लोगों से राय मांगते हुए लिखा था, "मेरा परिवार और मित्र कौन-कौन मेरे साथ है. अबकी बार आपके सेवाओं के लिए प्रधान पद का चुनाव लड़ रहा हूं. अपनी-अपनी राय देना. हमेशा पूरे गांव की सेवा में रहूंगा."
इसके अलावा उसने एक और पोस्ट साझा की थी, जिसमें लिखा था, "आपका छोटा भाई ग्राम प्रधान लुहारी के चुनाव में अबकी बार आपकी सेवा के लिए तैयार है. अपने सभी भाइयों के आशीर्वाद का अभिलाषी है." इन पोस्टों के जरिए वह गांव के लोगों के बीच अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा था.
'चौधरी वरुण प्रधान लुहारी' नाम से बनाया था पेज
सोशल मीडिया पर वरुण का फेसबुक पेज भी चर्चा का विषय बना हुआ है. उसने अपना पेज "चौधरी वरुण प्रधान लुहारी" नाम से बनाया था. पेज के नाम से ही साफ संकेत मिल रहे थे कि वह खुद को आने वाले ग्राम प्रधान चुनाव का संभावित उम्मीदवार मानकर चल रहा था.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से वह गांव के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रहा था. हालांकि उसके आपराधिक रिकॉर्ड की वजह से उसकी छवि विवादों से घिरी हुई थी, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट यह बताती हैं कि वह अपने अतीत से अलग एक नई पहचान बनाना चाहता था.
हालांकि, इससे पहले कि वह चुनावी मैदान में उतर पाता, वर्षों पुरानी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया. व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या के बाद हुए घटनाक्रम में उसकी भी मौत हो गई और उसके साथ ही ग्राम प्रधान बनने का सपना भी खत्म हो गया. दरअसल, जिस वरुण लुहारी ने दिनदहाड़े व्यापारी पिता-पुत्र पर गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी, वही वारदात के बाद भागने के दौरान भीड़ के हत्थे चढ़ गया. घटना से जुड़े एक वायरल वीडियो में दिखाई दिया था कि भीड़ में मौजूद एक शख्स ने उस पर गोली चला दी, जिसके बाद उसकी भी मौत हो गई.
16 साल पहले शुरू हुआ था अपराध का सफर
अगर वरुण लुहारी के आपराधिक इतिहास पर नजर डालें तो उसका अपराध की दुनिया में प्रवेश करीब 16 साल पहले हुआ था. शुरुआती दौर में गांव के ही एक व्यक्ति के साथ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में उसके खिलाफ पहला मुकदमा दर्ज हुआ था.
दिलचस्प बात यह है कि उस समय वह एलएलबी का छात्र था. लेकिन इसके बाद उसका नाम लगातार आपराधिक मामलों में सामने आने लगा. धीरे-धीरे उसका रिकॉर्ड लंबा होता गया और उसके खिलाफ कुल 19 मुकदमे दर्ज हो गए.
इन मामलों में हत्या, जानलेवा हमला, गैंगस्टर एक्ट और अन्य गंभीर अपराध शामिल थे. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2010 में उसके खिलाफ जानलेवा हमले के दो मामले दर्ज हुए. इसके बाद 2011 में उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई.
पुलिस पर फायरिंग से लेकर हत्या तक दर्ज हुए मामले
वर्ष 2015 को उसके आपराधिक जीवन का सबसे सक्रिय दौर माना जाता है. इस दौरान उसका नाम कई गंभीर घटनाओं में सामने आया. वह हरियाणा के सोनीपत में चोरी की एक वारदात में भी आरोपी रहा.
जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद भी उसका आपराधिक सिलसिला नहीं रुका. उस पर एक और हत्या की वारदात को अंजाम देने का आरोप लगा. इसके बाद वर्ष 2019 में बड़ौत क्षेत्र में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसने कथित तौर पर पुलिस टीम पर फायरिंग भी की थी.
समय के साथ वरुण लुहारी बागपत और आसपास के इलाकों में एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर के रूप में पहचाना जाने लगा. पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम लगातार गंभीर मामलों से जुड़ता रहा और वह कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बना रहा.
सपना राजनीति का था, अंत अपराध की दुनिया में हुआ
हालिया सोशल मीडिया पोस्ट यह जरूर संकेत देती हैं कि वरुण लुहारी अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहा था. वह अपराध से अलग होकर गांव की राजनीति में अपनी जगह बनाना चाहता था और ग्राम प्रधान चुनाव के जरिए नई शुरुआत का सपना देख रहा था.
लेकिन किस्मत ने उसे यह मौका नहीं दिया. व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसमें खुद वरुण की भी मौत हो गई. वायरल वीडियो में यह भी देखा गया कि भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उस पर गोली चलाई थी.
अब उसके फेसबुक पोस्ट, चुनावी दावे और गांव की सेवा के वादे केवल सोशल मीडिया रिकॉर्ड बनकर रह गए हैं. ग्राम प्रधान बनने की तैयारी कर रहा वरुण चुनावी मैदान तक नहीं पहुंच सका और उसके साथ ही राजनीति में आने की उसकी तमाम महत्वाकांक्षाएं भी खत्म हो गईं.
मनुदेव उपाध्याय