'खुद का मुकदमा हटवाने वाले भी अविमुक्तेश्वरानंद पर...', CM योगी के बयान पर अखिलेश का पलटवार

अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच हो गया. शुक्रवार योगी ने विधानसभा में अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर एक बयान दिया था. वहीं अब इस पर अखिलेश ने पलटवार किया है.

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव. (File Photo: ITG) यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 14 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

प्रयागराज माघ मेले का कल यानि कि 15 फरवरी को महाशिवरात्रि स्नान के बाद समापन हो जाएगा. लेकिन मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच शुरू हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इस विवाद के बाद ही इस पर राजनीति गर्म है. शुक्रवार को अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा में एक बयान दिया था. वहीं अब इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार किया है.

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अपना मुकदमा हटवाने वाले किसी के पद पर कैसे सवाल कर सकते हैं: अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने अविमुक्तेश्वरानंद पर दिए गए योगी के बयान को अपमानजनक बताया है. उन्होंने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी. ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं. जब बीजेपी के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी.

यह भी पढ़ें: 'हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, सपा को पूजना है तो पूजे', अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले CM योगी

अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवज़ा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं. जिन तक मुआवज़ा नहीं पहुंचा, उनका पैसा कहां गया, ये नहीं बताते हैं. अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाते हैं. वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं.

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अपने बयान में उन्होंने ‘क़ानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे.

जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है. अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है. वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि ’जब मुंह खोला, तब बुरा बोला!’ ‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है. यही सच्ची सच्चाई है. जिस समाज के ख़िलाफ़ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफ़रत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है.

शंकराचार्य पर दिया गया बयान अभद्र: अखिलेश यादव

इनका बस चले तो जो विवादित फ़िल्म आई है उसका नाम बदले बिना ही रिलीज़ भी कर दें और टैक्स फ़्री भी कर दें. अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके ख़िलाफ़ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा. उनकी सरकार हटाकर नयी सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिल-जुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा.

शंकराचार्य पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है. उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा. 

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