यूपी के सहारनपुर में सपा सांसद इकरा हसन और पुलिसवालों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. सांसद का कहना है कि जबरन उन्हें थाने में बिठाया गया. घटना के कई वीडियो सामने आये हैं, जिसमें इकरा हसन पुलिसवालों को नसीहत देती दिखाई दे रही हैं. अब इस मामले में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी रिएक्ट किया है. उन्होंने कहा कि आखिर हमारी पार्टी की सांसद का क्या गुनाह था... केवल इतना कि वो उस मां की मदद कर रही थीं, जिसने अपना बेटा खोया है. उसकी फरियाद लेकर थाने गई थीं.
पुलिस Vs इकरा हसन
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने मंगलवार को यहां सदर बाजार पुलिस स्टेशन पर धरना शुरू कर दिया. वह शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए पार्टी नेताओं की रिहाई की मांग कर रही थीं. सांसद के समर्थन में कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता पुलिस स्टेशन पर जमा हो गए, जिसके चलते इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा.
हसन ने आरोप लगाया कि जो लोग अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास जा रहे थे, उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी, बल्कि उन्हें बिना किसी जरूरत के गिरफ्तार करके जेल भेजा जा रहा था.
स्थानीय पुलिस के अनुसार, पूर्व राज्य मंत्री और SP नेता मंगेराम कश्यप को चार अन्य लोगों के साथ, दिन में पहले शांति भंग करने से जुड़े आरोपों के तहत गिरफ़्तार किया गया था.
गिरफ्तारियों की जानकारी मिलते ही, इकरा हसन तुरंत सदर बाजार पुलिस स्टेशन पहुंचीं और गिरफ्तार नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए धरने पर बैठ गईं.
विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसद ने कहा, 'या तो मुझे भी गिरफ्तार कर लो, या हमारे लोगों को रिहा कर दो.' इस दौरान हसन और SP (शहर) व्योम बिंदल तथा ASP मनोज यादव सहित वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई.
जानिए मामला
इससे पहले दिन में, इकरा हसन जसाला गांव की एक बुज़ुर्ग महिला के साथ DIG अभिषेक सिंह से मिलने गई थीं. यह मुलाकात महिला के बेटे की कथित हत्या के मामले में की गई थी.
बुज़ुर्ग महिला ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि हसन ने आरोप लगाया कि DIG ने उनकी बात तो सुनी, लेकिन पीड़ित की मांगों को मानने से इनकार कर दिया.
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सांसद ने दावा किया कि मुलाकात के दौरान DIG अपने दफ्तर से बाहर चले गए, जिसके बाद बुज़ुर्ग महिला भावुक हो गईं और दफ्तर परिसर से बाहर निकल गईं.
हसन ने बताया कि बाद में वह DIG दफ्तर के बाहर पार्किंग एरिया में जाकर एक और अर्जी तैयार करने लगीं, तभी वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया और उन पर ट्रैफिक में रुकावट डालने का आरोप लगाया.
हसन के अनुसार, उन्हें और उनके साथियों को उनकी अपनी ही गाड़ी में बिठाकर पुलिस लाइंस स्थित महिला पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें लगभग 10 मिनट तक हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया.
सांसद ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं हुई थी और दावा किया कि उनकी गाड़ी निर्धारित 'सफेद लाइन' वाले एरिया के अंदर ही खड़ी थी. उन्होंने कहा कि उनके पास इस घटना का वीडियो फ़ुटेज भी मौजूद है.
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हालांकि, पुलिस ने कश्यप और चार अन्य लोगों को शांति भंग करने से जुड़ी निवारक धाराओं के तहत हिरासत में रखा है. हसन ने बताया कि वह सरसावा की ओर जा रही थीं, तभी उन्हें गिरफ्तारियों के बारे में जानकारी मिली; इसके बाद वह तुरंत सदर बाजार पुलिस स्टेशन लौट आईं और अपने समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
सपा मुखिया का बयान
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट किया और कहा, 'जब किसी को सिर्फ न्याय के लिए आवाज उठाने की वजह से हिरासत में ले लिया जाता है, तो वही पल कलियुग होता है.'
बकौल अखिलेश- "समाजवादी पार्टी की माननीय सांसद का अपराध क्या है... बस इतना कि वह उस मां की मदद कर रही थीं जिसने अपना बेटा खो दिया है, और जो इस संवेदनहीन और क्रूर BJP शासन में न्याय की तलाश में हर दरवाजे पर दुत्कार का सामना करने को मजबूर है? यहां तक कि BJP समर्थक भी इस पर शर्मिंदा होंगे और इस तानाशाही और ज़ुल्म की निंदा करेंगे. अखिलेश ने यह भी जोड़ा कि PDA अब इसे बर्दाश्त नहीं करेगा, वह इसके खिलाफ आवाज उठाएगा.
उधर, देर शाम तक पुलिस स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बीच धरना जारी रहा. इस घटना को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है.
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