यूपी के सहारनपुर में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब कैराना से सांसद इकरा हसन को डीआईजी कार्यालय परिसर से पुलिस द्वारा महिला थाने ले जाया गया. बताया जा रहा है कि सांसद एक पीड़ित बुजुर्ग महिला के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं, जहां बेटे की हत्या के मामले में न्याय और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर अधिकारियों से मुलाकात की गई. इस दौरान कार्यालय परिसर में विवाद की स्थिति बन गई और मामला पार्किंग व विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया. महिला पुलिसकर्मियों ने सांसद को हिरासत में लेकर महिला थाने पहुंचाया, जहां उन्हें करीब 10 मिनट तक बैठाए जाने की बात सामने आई है.
डीआईजी ऑफिस में कहासुनी
पुलिस अधिकारी (एसपी सिटी व्योम बिंदल) से इकरा हसन ने कहा कि आप मार दो गोली हमें, चढ़ा दो फांसी पर हमको, हम डरने वाले नहीं हैं. प्रोटोकॉल तो छोड़ो आप में इंसानियत तक नहीं हैं. हमारी वजह से न कहीं जाम लगा, न ही कोई विवाद हुआ, फिर भी थाने पर रोका गया, बैठाया गया.
सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि पीड़ित महिला को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया. उनके अनुसार शामली जिले के दशाले गांव निवासी महिला अपने बेटे की हत्या के मामले में कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थी और इसी कारण डीआईजी कार्यालय पहुंची थी. सांसद का कहना है कि बातचीत के दौरान महिला भावुक हो गई और रोते हुए कार्यालय से बाहर निकली. इसके बाद उन्होंने महिला के समर्थन में विरोध दर्ज कराया. इसी बीच पुलिस और सांसद के बीच कहासुनी हुई तथा पार्किंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
इकरा हसन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुलिस ने ट्रैफिक प्रभावित होने का हवाला देकर उन्हें महिला थाने पहुंचाया, जबकि मौके पर किसी तरह का जाम नहीं था. उन्होंने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है। सांसद ने आरोप लगाया कि प्रशासन पीड़ितों की समस्याएं सुनने के बजाय दबाव बनाने का काम कर रहा है. महिला थाने में पानी पूछे जाने पर सांसद ने कथित तौर पर कहा, 'हमें आपका पानी नहीं पीना.' सांसद का कहना है कि अगर अधिकारियों ने पीड़ित महिला की बात गंभीरता से सुन ली होती तो विवाद की नौबत नहीं आती.
वहीं, इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. डीआईजी कार्यालय के बाहर हुए घटनाक्रम और सांसद को महिला थाने ले जाने की कार्रवाई को लेकर जिले में चर्चाओं का माहौल बना हुआ है. सांसद इकरा हसन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय उन्हें परेशान किया जा रहा है. फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.
पुलिस-प्रशासन से खफा हुईं इकरा हसन
कैराना सांसद इकरा हसन ने पुलिस प्रशासन पर तानाशाही और दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि डीआईजी ऑफिस के बाहर एक भावुक पीड़ित महिला से बात करने और अपना विरोध जताने पर पुलिस ने उन्हें पार्किंग से जबरन गिरफ्तार कर महिला थाने पहुंचाया.
सांसद के मुताबिक, शामली की रहने वाली यह पीड़ित मां अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय की गुहार लगाने आई थी, क्योंकि वह पुलिसिया कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थी. जब डीआईजी ने महिला की बात सुनने से मना कर दिया, तो वह रोते हुए बाहर निकली. इकरा हसन ने इसी संवेदनहीनता पर अपना विरोध दर्ज कराया था.
उन्होंने पुलिस के ट्रैफिक रोकने और रोड ब्लॉक करने के दावों को झूठी 'ड्रामेबाजी' बताते हुए कहा कि उनके पास इसका वीडियो मौजूद है. सांसद ने आरोप लगाया कि इस प्रशासन में पीड़ितों के लिए कोई हमदर्दी नहीं बची है और केवल आवाज दबाने का काम किया जा रहा है.
राहुल कुमार