आगरा: युवक ने प्राइवेट पार्ट में डाली बोतल, दर्द से तड़पा तो भागा अस्पताल, डॉक्टरों ने बताई इस 'हरकत' की वजह

डॉक्टरों के अनुसार मरीज मनो-यौन विकार से पीड़ित है, जिसमें असामान्य यौन उत्तेजना के लिए लोग निजी अंगों के साथ जोखिम उठाते हैं. डॉ. सुनील शर्मा की टीम ने सफल ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई, जिसे अब संक्रमण से बचाव के लिए काउंसलिंग की सलाह दी गई है.

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एक्सरे रिपोर्ट में दिखी प्लास्टिक की बोतल (Photo- ITG) एक्सरे रिपोर्ट में दिखी प्लास्टिक की बोतल (Photo- ITG)

अरविंद शर्मा

  • आगरा,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

उत्तर प्रदेश के आगरा से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां एक 38 वर्षीय युवक के मलाशय में एक लीटर पानी की प्लास्टिक बोतल फंस गई. इसके चलते उसे असहनीय दर्द होने लगा. हालत बिगड़ने पर परिजन युवक को शहर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने करीब एक घंटे से ज्यादा चली सर्जरी के बाद बोतल को बाहर निकाला. 

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जानकारी के मुताबिक, साकेत कॉलोनी निवासी युवक करीब 36 घंटे तक दर्द सहता रहा. जब तकलीफ ज्यादा बढ़ी तो वह अस्पताल पहुंचा. जांच के दौरान डॉक्टरों ने एक्स-रे कराया, जिसमें साफ हुआ कि उसके मलाशय के भीतर एक लीटर की प्लास्टिक बोतल फंसी हुई है. इसके बाद उसे तुरंत इमरजेंसी में भर्ती कर लिया गया.

अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुनील शर्मा के अनुसार, मामला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि बोतल निकालते समय यह ध्यान रखना जरूरी था कि आंत या मलाशय को गंभीर नुकसान न पहुंचे. डॉक्टरों की टीम ने सावधानी से ऑपरेशन किया और करीब एक घंटे 10 मिनट की मशक्कत के बाद बोतल को बाहर निकाल लिया.

सर्जरी के बाद युवक को निगरानी में रखा गया. डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए सिग्मॉयडोस्कोपी भी की, ताकि अंदरूनी चोट या संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा सके. युवक का इलाज लगभग चार दिन तक चला. जब डॉक्टरों ने यह सुनिश्चित कर लिया कि उसे शौच करने में कोई दिक्कत नहीं है और हालत सामान्य है, तब उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.

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डॉक्टरों ने बताई पूरी कहानी 

डॉक्टरों ने बताया कि युवक एक मनो-यौन विकार ‘एनल इरोटिसिज्म’ (Anal Eroticism) से पीड़ित है. चिकित्सकों के मुताबिक, इस स्थिति में कुछ लोग असामान्य यौन उत्तेजना या आनंद के कारण शरीर के निजी अंगों के साथ जोखिम भरा व्यवहार कर बैठते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीज अक्सर शर्म या झिझक की वजह से देर से अस्पताल पहुंचते हैं जिससे खतरा और बढ़ जाता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर अंदरूनी चोट, संक्रमण और गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं. डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में मरीजों की काउंसलिंग जरूरी होती है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने. साथ ही, ऐसे व्यवहार से संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं.

सर्जन डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. दीपक, डॉ. भुवेश, राजेंद्र, गजेंद्र, शादाब और रोहताश शामिल रहे. फिलहाल, मरीज की हालत खतरे से बाहर है. 

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