हर मां-बाप की जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने. परिवार और समाज का नाम रोशन करे. प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र के उमरौली में रहने वाले एक रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर ने भी यही सपना देखा था. बेटे को अच्छे कॉलेज में पढ़ाया, इंजीनियर बनाया, लेकिन उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि जिस बेटे के हाथ में उन्होंने किताबें और लैपटॉप दिया, वही इंटरनेट की अंधेरी दुनिया का 'पोर्न मास्टरमाइंड' बन जाएगा. आइये जानते है पूरी कहानी...
आपको बता दें कि यह कहानी है प्रयागराज के धूमनगंज के रहने वाले विकास सिंह की. जब उसको हरदोई की साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया तो कम उम्र के एक ऐसे बीटेक इंजीनियर का राज खुला जिसने करियर और नौकरी का रास्ता छोड़कर टेलीग्राम एप पर अश्लीलता का अश्लील नेटवर्क खड़ा कर दिया था. उसकी गिरफ्त में हजारों लोग और बड़ी संख्या में नाबालिग छात्र थे.
हरदोई पुलिस ने जब इस नेटवर्क का और गहराई पर्दाफाश किया तो साइबर अपराध की दुनिया का ऐसा चेहरा सामने आया जिसने हर किसी को हिलाकर रख दिया. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब बताया गया हरदोई के एक नाबालिग छात्र का अश्लील वीडियो टेलीग्राम चैनल पर अपलोड कर दिया गया है. जिसके बाद इस मामले में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गयी थी. पीड़ित की शिकायत के बाद 17 मई 2026 को हरदोई साइबर थाने में शहर कोतवाली में तैनात सब इंस्पेक्टर रोशन सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की जांच शुरू की गई. इसके बाद पुलिस ने बेहद शातिर तरीके से आरोपी को पकड़ने का जाल बिछाया.
बीटेक की पढ़ाई के बाद शुरू किया 'गंदा धंधा'
पुलिस जांच के मुताबिक, विकास सिंह ने वर्ष 2019 में प्रयागराज के यूनाइटेड कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी. पढ़ाई खत्म होने के बाद जहां बाकी युवा नौकरी और भविष्य बनाने में जुट जाते हैं, वहीं विकास ने अपने कमरे को ही डिजिटल अड्डा बना लिया. वह घंटों कमरे में बंद रहकर लैपटॉप और मोबाइल पर इंटरनेट खंगालता रहता था. धीरे-धीरे अश्लील वीडियो और फोटो तलाशना उसकी आदत नहीं, उसकी पूरी जिंदगी बन गई.
वर्ष 2020 से उसने टेलीग्राम और इंस्टा पर गुप्त तरीके से नेटवर्क बनाना शुरू किया. देखते ही देखते उसने करीब 21 सीक्रेट चैनल और ग्रुप तैयार कर लिए. इन चैनलों पर अश्लील वीडियो, आपत्तिजनक फोटो और प्राइवेट क्लिप अपलोड किए जाते थे. जांच में करीब 10 हजार अश्लील वीडियो और 40 हजार आपत्तिजनक फोटो बरामद होने की बात सामने आई है. सबसे डराने वाली बात यह रही कि उसके नेटवर्क से करीब 7 हजार यूजर्स जुड़े थे, जिनमें आठवीं से इंटर तक के नाबालिग छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं.
सीओ सिटी अंकित मिश्रा के अनुसार, विकास सिंह ने इस गंदे धंधे को बाकायदा ऑनलाइन बिजनेस बना दिया था. उसने सब्सक्रिप्शन प्लान तैयार कर रखे थे. 350 रुपए में मंथली प्लान, 450 रुपए में क्वार्टरली प्लान और 600 रुपए में हाफ इयरली प्लान देकर वह लोगों को अपने प्राइवेट चैनलों का एक्सेस देता था. Ddose007.netofficial और Ddose007.netALL समेत कई गुप्त चैनलों के जरिए वह यह नेटवर्क चला रहा था.
पुलिस का कहना है कि आरोपी विकास तकनीकी रूप से बेहद शातिर था. अगर उसे किसी वीडियो का सिर्फ छोटा क्लिप या स्क्रीनशॉट भी मिल जाता था, तो वह गूगल लेंस और दूसरी तकनीकी मदद से उस वीडियो की असली लोकेशन और ओरिजिनल फाइल तक पहुंच जाता था. इसके बाद वह वीडियो डाउनलोड कर अपने टेलीग्राम चैनलों पर अपलोड कर देता था. इंजीनियरिंग की पढ़ाई और तकनीकी समझ का इस्तेमाल उसने समाज में गंदगी फैलाने के लिए किया. जांच में यह भी सामने आया कि विकास का कोई खास सामाजिक दायरा नहीं था. वह ज्यादातर समय अकेले कमरे में बंद रहकर इंटरनेट पर बिताता था. परिवार को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि उनका बेटा ऑनलाइन दुनिया में क्या खेल खेल रहा है.
ऐसे हुआ खुलासा
इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ जब 17 मई 2026 को हरदोई साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ. शहर कोतवाली में तैनात सब इंस्पेक्टर रोशन सिंह की तहरीर पर जांच शुरू हुई. पुलिस ने बेहद शातिर तरीके से जाल बिछाया. मुखबिर के जरिए आरोपी के चैनल का सब्सक्रिप्शन लेने की कोशिश की गई. विकास सिंह ने 350 रुपए मांगे और बैंक अकाउंट नंबर भेज दिया. बस यही एक छोटी सी गलती उसके पूरे डिजिटल साम्राज्य के खत्म होने की वजह बन गई.
साइबर टीम ने जैसे ही बैंक खातों की जांच शुरू की, अधिकारियों के भी होश उड़ गए. पुलिस के मुताबिक, उसके खातों में करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए के लेनदेन की जानकारी सामने आई. पुलिस ने खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन-किन राज्यों तक फैले थे और क्या इसमें और लोग भी शामिल थे.
गिरफ्तारी के बाद सोमवार को आरोपी को एसडीएम सदर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. उसके खिलाफ आईटी एक्ट की धारा-67 और आईपीसी की धारा-294 समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इंटरनेट से डाउनलोड किए गए कंटेंट के अलावा उसके पास और कौन-कौन से स्रोत थे.
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस खतरनाक डिजिटल अंधेरे का सच है जहां मोबाइल और इंटरनेट के जरिए बच्चों की मासूमियत को निशाना बनाया जा रहा है. जिस तकनीक से लोग अपना भविष्य बनाते हैं, उसी तकनीक का इस्तेमाल विकास सिंह ने समाज में गंदगी फैलाने और नाबालिग बच्चों तक अश्लीलता पहुंचाने के लिए किया. हरदोई पुलिस की कार्रवाई ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश जरूर कर दिया, लेकिन यह घटना हर अभिभावक के लिए बड़ा अलार्म है. क्योंकि अब खतरा सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि बच्चों के मोबाइल की स्क्रीन के भीतर भी छिपा बैठा है.
पुलिस का बयान
हरदोई के सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि 17 मई, 2026 को हरदोई साइबर थाने को सूचना मिली कि प्रयागराज के न्यू मार्केट शिवाला का रहने वाला विकास सिंह (पुत्र किशोर) नाबालिग बच्चों के बीच आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट प्रसारित कर रहा है. पुलिस ने तत्काल सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
आरोपी विकास सिंह ने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर कई ग्रुप बना रखे थे. वह यूजर्स को मंथली और क्वाटरली सब्सक्रिप्शन प्लान बेचकर लोगों के प्राइवेट स्पेस के अश्लील वीडियो और फोटो उपलब्ध कराता था. उसके ग्रुप्स पर करीब 10,000 आपत्तिजनक वीडियो और 40,000 फोटो मिले हैं.
पुलिस जांच में सामने आया कि विकास ने 2019 में प्रयागराज के यूनाइटेड कॉलेज से बीटेक किया था और वह 2020 से इस अवैध धंधे में संलिप्त था. पुलिस ने उसके बैंक खातों की जांच की, जिसमें करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये पाए गए हैं. इन खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई की जा रही है. आरोपी को अदालत के समक्ष पेश कर दिया गया है और पुलिस इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है.
प्रशांत पाठक