छुट्टियों में बच्चों को घुमाने ले जाना हर माता-पिता का सपना होता है, लेकिन अगर यही फैसला आपको हजारों रुपये का जुर्माना भरवा दे तो? ब्रिटेन में एक मां के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. उसने स्कूल बंद होने का इंतजार नहीं किया और अपने चार बच्चों को स्कूल से पांच दिन की छुट्टी दिलाकर परिवार के साथ स्पेन घूमने चली गई. वापस लौटी तो प्रशासन ने उस पर 480 पाउंड (करीब 60 हजार रुपये) का जुर्माना ठोक दिया. हैरानी की बात यह है कि मां को आज भी अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है.
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के डेवोन की रहने वाली 36 साल की शार्लोट क्राउच अपने पति और चार बच्चों के साथ 1 जून को स्पेन के ग्रैन कैनारिया गई थीं. यह ट्रिप उनके पिता और सौतेली मां की शादी की 25वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित की गई थी, जहां दोनों ने दोबारा शादी की कसमें भी लीं.
स्कूल खुला था, फिर भी बच्चों को छुट्टी दिला दी
शार्लोट ने अपने चारों बच्चों को स्कूल से लगातार पांच दिन की छुट्टी दिलाई. उन्होंने स्कूल से यह बात छिपाई भी नहीं और पहले ही बता दिया कि बच्चे परिवार के साथ छुट्टियां मनाने जा रहे हैं. लेकिन लौटने के करीब एक महीने बाद, 30 जून को डेवोन काउंटी काउंसिल ने उन्हें तीन बच्चों की गैर-हाजिरी के लिए कुल 480 पाउंड का जुर्माना भेज दिया.
ब्रिटेन में नियम है कि अगर कोई बच्चा बिना अनुमति स्कूल से छुट्टी लेकर घूमने जाता है, तो उसके माता-पिता पर प्रति बच्चे 80 पाउंड का जुर्माना लगाया जा सकता है. तय समय में भुगतान नहीं करने पर यह रकम दोगुनी हो जाती है और मामला कोर्ट तक भी पहुंच सकता है.
जुर्माना भरा, फिर भी 2.5 लाख रुपये बचा लिए
शार्लोट का कहना है कि उन्होंने यह फैसला पूरी सोच-समझकर लिया था. उनके मुताबिक, अगर वही छुट्टियां स्कूल की आधिकारिक वेकेशन में मनाते, तो पूरे परिवार का खर्च करीब 2,500 पाउंड (करीब 2.9 लाख रुपये) ज्यादा आता. ऐसे में जुर्माना भरने के बाद भी उनकी अच्छी-खासी बचत हो गई.
उन्होंने कहा कि हमें पहले से पता था कि जुर्माना लगेगा. हमने इसे खर्च में शामिल कर लिया था. फिर भी स्कूल की छुट्टियों की तुलना में यह ट्रिप काफी सस्ती पड़ी. हमारे लिए यह फैसला बिल्कुल आसान था.
शार्लोट मानती हैं कि बच्चों की पढ़ाई जरूरी है, लेकिन उनका कहना है कि सीखना सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं होता.उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उनके बच्चों ने तैरना सीखा, समुद्र में डॉल्फिन को उनके प्राकृतिक माहौल में देखा, हवाई यात्रा का अनुभव लिया और अलग संस्कृति के लोगों से मिलना-जुलना सीखा.
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उनके शब्दों में, लोग सोचते हैं कि सीखना सिर्फ स्कूल में होता है. अगर ऐसा है तो फिर 16 साल की उम्र के बाद इंसान कभी कुछ नहीं सीखता? परिवार के साथ बिताया गया समय भी बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है.
अगर बोर्ड की परीक्षा होती तो कभी नहीं ले जाती
शार्लोट ने साफ कहा कि अगर उनके बच्चे जीसीएसई (GCSE) जैसी अहम परीक्षा की तैयारी कर रहे होते, तो वह कभी ऐसा फैसला नहीं लेतीं. उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं हुआ और उन्होंने किसी महत्वपूर्ण परीक्षा या पढ़ाई को मिस नहीं किया.
सच बोलने की सजा मिली...
शार्लोट को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उन्होंने स्कूल से झूठ नहीं बोला. उन्होंने कहा कि हम चाहते तो कह सकते थे कि बच्चे बीमार हैं, लेकिन हमने ईमानदारी दिखाई और पहले ही बता दिया कि हम छुट्टियों पर जा रहे हैं. अब ऐसा लगता है कि हमें सच बोलने की सजा मिली है.
सोशल मीडिया पर भी उठी बहस
जुर्माना मिलने के बाद शार्लोट ने फेसबुक पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि बच्चों को छुट्टियों पर ले जाने के लिए जुर्माना लगना बेहद अजीब बात है. फिर भी स्कूल की छुट्टियों में जाने से यह सस्ता ही पड़ा.
उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कुछ लोगों ने कहा कि बच्चों की नियमित पढ़ाई सबसे जरूरी है, जबकि कई लोगों ने शार्लोट का समर्थन करते हुए कहा कि परिवार के साथ बिताया गया समय भी बच्चों की परवरिश का अहम हिस्सा है.
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हालांकि, शार्लोट आज भी अपने फैसले पर कायम हैं. उनका कहना है कि जिंदगी बहुत छोटी है. आज हैं, कल नहीं भी हो सकते. मेरे बच्चे रोज स्कूल जाते हैं. पढ़ाई जरूरी है, लेकिन बच्चे की जिंदगी में सबसे जरूरी चीज सिर्फ स्कूल नहीं है.
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