ग्रीनलैंड वो जन्नत जहां समुद्र में तैरते हैं बर्फ के पहाड़ और आधी रात को चमकता है सूरज!

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दिलचस्पी ने ग्रीनलैंड को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है, जो न सिर्फ अपने बर्फीले द्वीप के लिए बल्कि अपनी रहस्यमयी और मनमोहक खूबसूरती के लिए जाना जाता है.

Advertisement
बर्फ की चादर के बीच रंगों का संसार (Photo: AFP) बर्फ की चादर के बीच रंगों का संसार (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:21 PM IST

वेनेजुएला की राजनीतिक हलचलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े घटनाक्रमों के बाद, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर टिक गई हैं. व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि की है कि ट्रंप प्रशासन इस आर्कटिक द्वीप को हासिल करने के विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से चर्चा कर रहा है. दरअसल, ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क के अधीन आता है.

Advertisement

भले ही भौगोलिक नक्शे पर ग्रीनलैंड अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा नजर आता हो, लेकिन इसकी रूह आज भी एक रहस्यमयी और बेहद ठंडे द्वीप जैसी है. साल के बारह महीनों में से ज्यादातर वक्त यह स्थान बर्फ की एक मोटी और सफेद चादर ओढ़े रहता है, जो वैज्ञानिकों से लेकर रोमांच के शौकीनों के लिए किसी जादुई दुनिया के सपने जैसा जान पड़ता है. तो चलिए जानते हैं कि आज जब पूरी दुनिया में राजनीति की गर्मी बढ़ी हुई है, तब ग्रीनलैंड की यही अछूती और शांत सुंदरता अचानक सुर्खियों के केंद्र में क्यों आ गई है और यहां क्या कुछ खास है.

यह भी पढ़ें: भारी-भरकम सूटकेस को कहें बाय-बाय! सिर्फ एक बैग के साथ ऐसे करें दुनिया की सैर!

हिमखंडों का महासागर और जलीय जीवन का अनूठा संसार

ग्रीनलैंड की असली भव्यता और उसका राजसी स्वरूप इसके अंतहीन ग्लेशियरों और इलुलिस्सात आइसफजॉर्ड में बसता है. साल 2004 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची का हिस्सा बना यह इलाका करीब 40 किलोमीटर तक बर्फ की एक ऐसी विशाल चादर से ढका है, जिसे देखकर कुदरत की ताकत का अंदाजा होता है.

Advertisement

यहां मौजूद जैकबशवन ग्लेशियर उत्तरी गोलार्ध का सबसे सक्रिय हिस्सा माना जाता है, जहां से हर साल लगभग 20 अरब टन से भी ज्यादा बर्फ टूटकर सीधे समुद्र की लहरों में समा जाती है. जब ये भीमकाय हिमखंड कांच के टुकड़ों की तरह पानी की सतह पर तैरते हैं, तो वह मंजर किसी जादुई फिल्मी सेट जैसा जान पड़ता है. इन तैरते हुए बर्फ के पहाड़ों की भव्यता को करीब से महसूस करने के लिए सैलानी नावों के जरिए उनके साये तक जाते हैं, जबकि कुछ लोग हेलीकॉप्टर से इस बर्फीले साम्राज्य के विहंगम नजारे को अपनी यादों में कैद करते हैं.

इतना ही नहीं, ग्रीनलैंड की डिस्को बे (Disko Bay) का ऐतिहासिक और प्राकृतिक वजूद भी अपने आप में बेमिसाल है. यह वही स्थान है जहां 985 ईस्वी के आसपास पहली बार इंसानी बस्तियों के निशान मिले थे, लेकिन आज यह जगह हंपबैक और किलर व्हेल जैसे दुर्लभ समुद्री जीवों का सबसे सुरक्षित गढ़ बन चुकी है. वसंत की शुरुआत होते ही जब समंदर की लहरों पर इन विशालकाय व्हेल मछलियों की अठखेलियां (मौज-मस्ती) शुरू होती हैं, तो उसे देखना किसी रोमांचक एडवेंचर से कम नहीं होता. बर्फ की इस सफेद दुनिया के बीच तटों पर बसे मछुआरों के छोटे-छोटे रंग-बिरंगे घर दूर से ही रंगों का ऐसा तड़का लगाते हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों को एक अनूठा और गहरा सांस्कृतिक एहसास करा जाते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: अब बिना वीजा फीस दिए घूमें दक्षिण कोरिया, भारत समेत 6 देशों के लिए बड़ा ऐलान

जहां आधी रात को भी सूरज निकलता है

ग्रीनलैंड का सबसे बड़ा रहस्य इसकी मिडनाइट सन की घटना है. चूंकि यह द्वीप आर्कटिक सर्कल के भीतर स्थित है और पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, इसलिए गर्मियों के महीनों में यहां सूरज कभी डूबता ही नहीं है. इलुलिस्सात और कानाक़ जैसे इलाकों में तो साढ़े तीन महीने तक सूरज दिन-रात आसमान में चमकता रहता है. इस दौरान समय का सामान्य चक्र पूरी तरह बदल जाता है और एक दिन 100 दिनों जितनी लंबा और ऊर्जा से भरपूर महसूस होता है. उजाले वाली इन रातों में सैलानी एक ऐसी शांति महसूस करते हैं जो दुनिया में कहीं और मुमकिन नहीं है.

इन उजाले भरी रातों में हस्की स्लेज सफारी का मजा लेना और इक्वी ग्लेशियर से बर्फ गिरने की भयानक गड़गड़ाहट सुनना एक ऐसा अनुभव है, जो रोंगटे खड़े कर देता है. यहां आकर इंसान को अपनी कलाई पर बंधी घड़ी की फिक्र नहीं रहती, क्योंकि यहां की फिजाओं में सिर्फ कुदरत का अंतहीन उजाला और खामोश ग्लेशियरों का संगीत है. यही वह 'जन्नत' है, जिसे अब दुनिया एक नई सियासी और पर्यटन की दृष्टि से देख रही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement