बुजुर्गों के साथ सफर को बनाना है यादगार, तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

भारत में बुजुर्गों के साथ घूमना एक सुखद अनुभव है, लेकिन बुजुर्गों के साथ यात्रा में की गई छोटी सी चूक उनकी सेहत और आपके सुकून पर भारी पड़ सकती है. आखिर वो कौन सी गलतियां हैं जो लोग अक्सर कर बैठते हैं.

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बुजुर्गों के साथ भागदौड़ के बजाय रिलैक्सिंग ट्रिप प्लान करें (Photo: Pexels) बुजुर्गों के साथ भागदौड़ के बजाय रिलैक्सिंग ट्रिप प्लान करें (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:02 AM IST

अपने घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ सफर पर निकलना एक बहुत ही प्यारा एहसास होता है. उनके साथ बिताया गया हर पल हमें जिंदगी भर की यादें दे जाता है, लेकिन अक्सर हम जोश-जोश में यह भूल जाते हैं कि उनकी जरूरतें और शरीर की क्षमता हमसे काफी अलग है. हम अपनी पसंद से ट्रिप तो प्लान कर लेते हैं, पर छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बुजुर्गों के लिए सफर खुशियों के बजाय थकान और मुश्किल भरा बन जाता है.

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अगर आप भी अपने माता-पिता या दादा-दादी के साथ किसी यादगार ट्रिप का प्लान बना रहे हैं, तो सावधान रहना बहुत जरूरी है. भागदौड़ वाली प्लानिंग और छोटी सी लापरवाही पूरी छुट्टी का मजा किरकिरा कर सकती है. तो चलिए जानते हैं उन गलतियों के बारे में जिनसे बचकर आप बुजुर्गों के सफर को एकदम शानदार और आरामदायक बना सकते हैं.

भागदौड़ वाली प्लानिंग से बचें

सफर में हमारी सबसे बड़ी गलती यह होती है कि हम कम समय में ज्यादा से ज्यादा जगहें देख लेना चाहते हैं. युवाओं के लिए तो यह ठीक है, लेकिन बुजुर्गों के लिए यह बहुत थका देने वाला होता है. इसलिए, एक टाइट शेड्यूल बनाने के बजाय आराम से चलने वाला प्रोग्राम बनाएं. दिन भर में सिर्फ 1 या 2 खास जगहें ही घूमने का प्लान रखें और बीच-बीच में उनके आराम के लिए पूरा वक्त दें, ताकि वे बिना थके सफर का आनंद ले सकें.

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दवाओं और कागजों को लेकर लापरवाही

अक्सर हम जोश में दवाओं को बड़े बैग में डाल देते हैं, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत नहीं मिल पातीं. याद रखें, बुजुर्गों की दवाएं, डॉक्टर का पर्चा और बीपी/शुगर चेक करने वाली मशीन हमेशा आपके हैंडबैग में होनी चाहिए. साथ ही, डॉक्टर का नंबर और उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी साथ रखें, ताकि किसी भी इमरजेंसी में आपको परेशान न होना पड़े.

भारी सामान का बोझ न बढ़ाएं

सफर में ट्रैवल लाइट यानी कम सामान ले जाने का नियम सबसे बेस्ट होता है. बहुत ज्यादा सामान होने से उसे संभालने और उठाने की टेंशन बुजुर्गों को जल्दी थका देती है. कोशिश करें कि हल्का और पहियों वाला सूटकेस ही साथ रखें, जिसे ले जाना आसान हो. जितना कम सामान होगा, सफर उतना ही हल्का-फुल्का और खुशनुमा रहेगा.

खाने-पीने में ढील देना पड़ेगा भारी

छुट्टियों के उत्साह में हम अक्सर बाहर का चटपटा या तीखा खाना खा लेते हैं, लेकिन बुजुर्गों का पाचन तंत्र इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता. सफर के दौरान उन्हें हमेशा हल्का और सुपाच्य भोजन ही दें. साथ ही, उन्हें पर्याप्त पानी पिलाते रहें और घर का बना सूखा नाश्ता हमेशा पास रखें, ताकि भूख लगने पर वे कुछ हेल्दी खा सकें.

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गलत लोकेशन और इंश्योरेंस की अनदेखी

मंजिल चुनने से पहले वहां के मौसम और ऊंचाई का खास ख्याल रखें. बहुत ज्यादा ठंडी या ऊंचे पहाड़ वाली जगहें बुजुर्गों की सेहत बिगाड़ सकती हैं. इसके अलावा, एक और बड़ी गलती यह है कि हम ट्रैवल इंश्योरेंस नहीं लेते. बुजुर्गों के साथ सफर में मेडिकल सपोर्ट की कभी भी जरूरत पड़ सकती है, इसलिए एक अच्छा इंश्योरेंस जरूर लें ताकि किसी भी मेडिकल खर्च की चिंता न रहे.

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