पेंटागन के साथ OpenAI की डील से मचा बवाल, अमेरिका में लोग कर रहे ChatGPT अनइंस्टॉल, Sam Altman को देनी पड़ी सफाई

अमेरिका में ChatGPT ऐप के अनइंस्टॉल में एक ही दिन में करीब 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई. OpenAI के CEO Sam Altman ने बयान जारी कर यह साफ करने की कोशिश की कि उनकी कंपनी ने अमेरिकी रक्षा विभाग यानी Department of Defense के साथ जो समझौता किया है, उसका असली इरादा क्या है.

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Sam Altman ने युद्ध में OpenAI की भूमिका पर दी सफाई. (File Photo: AFP ) Sam Altman ने युद्ध में OpenAI की भूमिका पर दी सफाई. (File Photo: AFP )

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:21 AM IST

अमेरिका में AI को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. OpenAI के CEO Sam Altman ने खुद सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी कर यह साफ करने की कोशिश की कि उनकी कंपनी ने अमेरिकी रक्षा विभाग यानी Department of Defense के साथ जो समझौता किया है, उसका मकसद क्या है और उसकी सीमाएं क्या हैं.

 TechCrunch की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में ChatGPT ऐप के अनइंस्टॉल में एक ही दिन में करीब 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई.

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मामला सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट का नहीं है. यह सवाल अब सीधा AI, युद्ध और नागरिक अधिकारों से जुड़ गया है.

क्या है पूरा मामला?

Sam Altman ने अपनी पोस्ट में बताया कि OpenAI ने Department of Defense के साथ अपने एग्रीमेंट में कुछ अहम बदलाव किए हैं.

 उन्होंने बताया की ऐसा इसलिए क्योंकि यह साफ हो सके कि कंपनी के AI सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा. 

उन्होंने साफ लिखा कि कानून के दायरे में रहते हुए AI का इस्तेमाल किया जाएगा और इसे जानबूझकर डोमेस्टिक सर्विलांस के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा.

Altman ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ़ से अगर कोई असंवैधानिक आदेश आता है तो वे उसका पालन नहीं करेंगे. 

उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सबसे ऊपर है और सरकार को फैसले लेने चाहिए, न कि कोई निजी कंपनी दुनिया का भविष्य तय करे. लेकिन विवाद यहीं से शुरू हुआ.

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गुस्सा क्यों बढ़ा?

TechCrunch की रिपोर्ट बताती है कि जैसे ही यह खबर फैली कि OpenAI अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ काम कर रही है, बड़ी संख्या में लोगों ने ChatGPT ऐप हटाना शुरू कर दिया. 

सिर्फ एक दिन में अनइंस्टॉल में 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज किया गया . सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या AI अब युद्ध मशीन का हिस्सा बनने जा रहा है.

कुछ यूजर्स का कहना है कि AI कंपनियों को सेना से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर AI इतना शक्तिशाली है तो उसे सरकार के साथ जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, ताकि गलत हाथों में न जाए.

Anthropic का नाम क्यों आया बीच में?

इस पूरे विवाद में एक और AI कंपनी Anthropic का जिक्र हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Anthropic ने रक्षा विभाग के साथ कुछ शर्तों पर असहमति जताई थी और साफ रुख अपनाया था कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मास सर्विलांस या ऑटोनोमस हथियारों में नहीं होना चाहिए.

इसके बाद OpenAI ने अपनी डील आगे बढ़ाई. इससे यह बहस और तेज हो गई कि आखिर AI कंपनियां किस दिशा में जा रही हैं. क्या वे सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत कर रही हैं या एक खतरनाक रास्ते की ओर बढ़ रही हैं?

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Altman ने क्या माना?

Sam Altman ने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि डील को लेकर कम्युनिकेशन बेहतर हो सकता था. उन्होंने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है और इसे जल्दी में सार्वजनिक करना शायद सही तरीका नहीं था. 

उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी अभी कई मामलों में पूरी तरह तैयार नहीं है और सुरक्षा को लेकर बहुत सावधानी जरूरी है.

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में OpenAI सरकार के साथ मिलकर तकनीकी सुरक्षा उपायों और सेफगार्ड पर काम करेगा ताकि AI का गलत इस्तेमाल न हो.

यह सब अभी क्यों अहम है?

दुनिया इस वक्त युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है. साइबर हमले, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और इंटेलिजेंस में AI का रोल तेजी से बढ़ रहा है. 

ऐसे समय में अगर कोई बड़ी AI कंपनी सीधे रक्षा विभाग के साथ काम करती है तो यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की खबर नहीं रहती, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता का मुद्दा बन जाती है.

एक तरफ सरकारें कहती हैं कि AI से देश की सुरक्षा मजबूत होगी. दूसरी तरफ नागरिक अधिकार समूह चेतावनी दे रहे हैं कि निगरानी और डेटा कंट्रोल का दायरा खतरनाक रूप ले सकता है.

असली सवाल क्या है?

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इस पूरे विवाद का केंद्र एक ही है. AI पर कंट्रोल किसका होगा? सरकार का, निजी कंपनी का या जनता की लोकतांत्रिक निगरानी का?

Sam Altman का कहना है कि लोकतंत्र को नियंत्रण में रहना चाहिए और AI को लोगों को ताकत देनी चाहिए, उनसे छीननी नहीं चाहिए. लेकिन जनता का एक हिस्सा आश्वस्त नहीं है. अनइनस्टॉल के आंकड़े यही दिखा रहे हैं.

यह भी पढ़ें: ईरान में खामेनेई की आखिर कैसे मिली लोकेशन? US-Israel की टेक्नोलॉजी ने ऐसे किया ट्रैक

आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है, क्योंकि AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं रहा. यह सुरक्षा, युद्ध, साइबर ऑपरेशन और रणनीतिक फैसलों का हिस्सा बन रहा है. ऐसे में हर डील, हर बयान और हर फैसला वैश्विक बहस का विषय बनेगा.

और यही वजह है कि Pentagon और OpenAI की यह डील सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि AI के भविष्य की दिशा तय करने वाली कहानी बन चुकी है.

Sam Altman ने अपने ट्वीट में क्या-क्या साफ किया?

Sam Altman ने अपने लंबे पोस्ट में सबसे पहले यह कहा कि OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच जो एग्रीमेंट हुआ है, उसमें खास भाषा जोड़ी गई है ताकि कंपनी के सिद्धांत बिल्कुल साफ रहें. 

उन्होंने लिखा कि AI सिस्टम का इस्तेमाल जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने अमेरिकी संविधान, फोर्थ अमेंडमेंट और FISA जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सब कुछ कानूनी दायरे में ही होगा.

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प्राइवेसी एडवोकेट्स इसे दिखावा मान रहे हैं 

Altman ने यह भी साफ किया कि Department of Defense ने यह समझा है कि यह लिमिटेशन सिर्फ कागज पर नहीं है, बल्कि इसका मतलब है कि किसी भी तरह की ट्रैकिंग , सर्विलांस या मॉनिटरिंग के लिए OpenAI की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

यानी कंपनी यह दिखाना चाहती है कि नागरिकों की प्राइवेसी को लेकर वह पीछे नहीं हटेगी. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है की ये सिर्फ एक दिखावा है ताकि कंपनी से लागों का ट्रस्ट ना टूटे. 

उन्होंने एक और अहम बात कही. अगर किसी इंटेलिजेंस एजेंसी जैसे NSA को OpenAI की सर्विस चाहिए होगी, तो उसके लिए अलग से कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन करना पड़ेगा. यानी मौजूदा डील ऑटोमैटिकली सभी एजेंसियों को एक्सेस नहीं देती. 

Altman ने यह भी माना कि यह फैसला बहुत संवेदनशील है, टेक्नोलॉजी अभी हर चीज के लिए तैयार नहीं है, और कई ट्रेड ऑफ़्स को लेकर अभी पूरी समझ बनना बाकी है. उनके मुताबिक, यह एक सीखने की प्रक्रिया है और आगे भी safeguards को मजबूत किया जाएगा.

अपने पोस्ट के आखिर में Altman ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और AI को लेकर सरकार और टेक कंपनियों के बीच रिश्ता बेहद अहम होने वाला है. 

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उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया कंट्रोल में रहनी चाहिए और किसी भी निजी कंपनी को दुनिया की दिशा तय नहीं करनी चाहिए. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी इशारा किया कि AI के गलत इस्तेमाल के खतरे असली हैं, और इसी वजह से सरकारों के साथ बातचीत जरूरी है.

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