AI बनाएगा दवाएं! ChatGPT मेकर का नया मॉडल, बीमारियों का इलाज होगा सुपरफास्ट

चैटजीपीटी मेकर ओपनएआई ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए नया AI मॉडल लॉन्च कर दिया है. न्यू AI मॉडल का नाम GPT-Rosalind है. इसका यूज ड्रग डिस्कवरी यानी दवाओं की खोज में किया जाएगा. यह रिसर्च को नए आयाम देगा, जिसकी मदद से दवाओं संबंधित रिचर्स जल्द कंप्लीट होंगी.

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सैम ऑल्टमैन की कंपनी लेकर नए मॉडल. (File Photo: AFP ) सैम ऑल्टमैन की कंपनी लेकर नए मॉडल. (File Photo: AFP )

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:30 AM IST

चैटजीपीटी मेकर ओपनएआई ने एक खास आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) मॉडल लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम GPT-Rosalind है. इसका यूज ड्रग डिस्कवरी यानी दवाओं की खोज और रिसर्च को तेज करना है. 

टेक कंपनियों के बीच इस सेक्टर में दिलचस्पी बढ़ रही है. नया AI मॉडल  वैज्ञानिक खोज को नई दिशा दे सकता है. आने वाले दिनों में यह उन बीमारियों के लिए भी दवाएं खोजने में मदद करेगा, जिनको लेकर लंबे समय से रिसर्च जारी है. 

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ChatGPT मेकर ने न्यू मॉडल को गुरुवार को लॉन्च किया है. GPT-Rosalind को खासतौर पर लाइफ साइंसेज रिसर्च के लिए डेवलप किया है. 

GPT-Rosalind कैसे काम आएगा? 

GPT-Rosalind मॉडल बड़े डेटा से अहम जानकारी निकालने और वैज्ञानिक स्टडीज को मरीजों के लिए हेल्थकेयर एप्लीकेशन में बदलने में मदद करेगा. अभी इसका शुरुआती मॉडल पेश किया गया है, जिसमें रिसर्च प्रीव्यू के तौर पर कुछ बिजनेस ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाएगा. 

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शुरुआती वर्जन पर ये कंपनियां कर रही हैं काम 

GPT-Rosalind के शुरुआती यूजर्स में दवा कंपनी Amgen Inc., वैक्सीन निर्माता Moderna Inc. और बायोसाइंस रिसर्च संस्था Allen Institute जैसे नाम शामिल हैं. 

कोडिंग, साइंस और साइबर सिक्योरिटी पर काम 

ओपनएआई और उसकी राइवल्स कंपनियां एन्थ्रोपिक ऐसे एडवांस्ड मॉडल बनाने की दौड़ में शामिल हैं, जो कोडिंग, साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे कई काम निपटा कर सकते हैं. इन मॉडल्स का मकसद ज्यादा से ज्यादा कंपनियं को ये भरोसा दिलाना है कि AI टाइम और लागत कम करने में मदद कर सकता है. 

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ओपनएआई में लाइफ साइंसेज प्रोडक्ट की कमान संभालने वाले लीड युनयुन वांग ने कहा कि कंपनी चाहती है कि नए संगठन इस नए मॉडल का सुरक्षित तरीके से उपयोग कर सकें. 

गूगल समेत कई कंपनियां कर रही हैं काम

ओपनएआई, एन्थ्रोपिक और गूगल ने हाल के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैज्ञानिक और हेल्थकेयर इस्तेमाल पर फोकस बढ़ाया है. नई दवाओं की रिसर्च को दिशा देने से लेकर व्यक्तिगत मेडिकल डेटा की समीक्षा करने तक के काम शामिल किए गए हैं. 

साल 2024 में Google DeepMind के दो वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जो AlphaFold नाम के AI सिस्टम के लिए था. ये सिस्टम प्रोटीन की संरचना का अनुमान लगाने की काबिलियत रखता था. 

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