मार्क जकरबर्ग के मेटा में हड़कंप, 14 हजार लोगों का भविष्य संकट में, AI बना वजह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लोगों के लिए जितना मददगार है उतना ही लोग परेशान भी हैं. खास तौर पर इन दिनों कंपनियां AI के नाम पर लगातार जॉब कट कर रही हैं. मेटा इसका ताजा उदाहरण है.

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Meta has told employees that it is firing 8,000 workers. (Representational image made with AI) Meta has told employees that it is firing 8,000 workers. (Representational image made with AI)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

दुनिया की बड़ी टेक कंपनी मेटा, जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसी सर्विसेज चलाती है, एक बार फिर बड़े स्तर पर छंटनी कर रही है. लेकिन इस बार वजह सिर्फ खर्च कम करना नहीं है. ऐसा भी नहीं है कि कंपनी नुकसान में है, फिर भी जॉब कट क्यों?

रिपोर्ट्स के मुताबिक मेटा अपने टोटल कर्मचारियों का करीब 10% यानी लगभग 8,000 लोगों को नौकरी से निकालने जा रही है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारी निवेश कर रही है और अपने पूरे बिजनेस मॉडल को बदल रही है. इतना ही नहीं 6,000 जॉब रोल्स भी फ्रीज हो रहे हैं. कुल मिला कर 14 हजार जॉब्स पर डायरेक्ट असर पड़ेगा. 

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AI या कुछ और वजह?

Meta के अंदर जो बदलाव हो रहे हैं उससे पतला लगता है कि AI सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि काम करने के तरीके को ही बदल रहा है. कंपनी अब ऐसे सिस्टम बना रही है जो इंसानों के कई काम खुद कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, कोड लिखना, कंटेंट बनाना और डेटा एनालिसिस जैसे काम अब AI टूल्स तेजी से कर रहे हैं.

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गूगल सीईओ सुंदर पिचाई खुद बोल चुके हैं कि कंपनी में 70% तक कोडिंग AI ही कर रहा है. ऐसे में जाहिर है काफी कोडर्स की जॉब पर तलवार है या तो उनकी फायरिंग हो चुकी है. 

रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि मेटा करीब 6,000 नई नौकरियों को भरने का प्लान भी रोक रही है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों की छंटनी नहीं हो रही, बल्कि फ्यूचर में आने वाली नौकरियां भी कम हो रही हैं.

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कंपनी अब ज्यादा लोगों की बजाय ज्यादा मशीनों और AI सिस्टम्स पर भरोसा कर रही है.

मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग पहले ही कह चुके हैं कि AI आने वाले समय में कई काम खुद कर सकेगा. कंपनी अपने अंदर AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रही है. यहां तक कि कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि AI अब कंपनी के अंदर कोडिंग जैसे काम का बड़ा हिस्सा खुद करने लगा है. इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो पहले यही काम करते थे.

लेकिन कहानी सिर्फ Meta तक सीमित नहीं है. Microsoft, Amazon और दूसरी बड़ी कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल रही हैं. 2026 में हजारों टेक नौकरियां खत्म हुई हैं और कई जगह AI को इसकी वजह माना जा रहा है. 

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में ही टेक इंडस्ट्री में हजारों नौकरियां खत्म हुईं और इनमें से करीब 25% मामलों में AI एक बड़ा कारण था. एक अनुमान है कि इस साल दुनिया भर में टेक कंपनियों ने AI की वजह से 70 हजार से ज्यादा लोगों को निकाला है. 

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Meta का मामला इसलिए ज्यादा बड़ा है क्योंकि यह सिर्फ लागत कम करने की बात नहीं है. कंपनी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि Meta 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत बड़ी रकम निवेश करने जा रही है, ताकि भविष्य में ज्यादा काम मशीनें कर सकें. यानी कंपनी साफ तौर पर इंसानों से ज्यादा AI पर दांव लगा रही है.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI सिर्फ नौकरियां खत्म कर रहा है. सच्चाई थोड़ी अलग है. AI कुछ नौकरियां खत्म कर रहा है, लेकिन साथ ही नई नौकरियां भी बना रहा है.

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Meta खुद AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और मशीन लर्निंग एक्सपर्ट जैसे रोल्स में तेजी से भर्ती कर रही है. यानी जहां एक तरफ सामान्य ऑफिस जॉब्स कम हो रही हैं, वहीं हाई-स्किल टेक जॉब्स बढ़ रही हैं.

गौरतलब है कि Meta के अंदर यह बदलाव अचानक नहीं आया है. 2022 से ही कंपनी लगातार छंटनी कर रही है और धीरे-धीरे अपने काम करने के तरीके को बदल रही है. पहले खर्च कम करने के लिए छंटनी हुई, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि असली लक्ष्य AI-फोकस्ड कंपनी बनना है. आज Meta का फोकस सोशल मीडिया कंपनी से ज्यादा AI कंपनी बनने पर है.

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इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा असर यह है कि नौकरी की दुनिया बदल रही है. पहले जहां एक काम करने के लिए कई लोग चाहिए होते थे, अब वही काम एक AI टूल और एक इंसान मिलकर कर सकते हैं.

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