आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर टेक कंपनियों और कई एक्सपर्ट ने बड़े-बड़े दावे किए. AI को सबसे ताकतवर प्रोक्टिविटी मशीन के रूप में पेश किया गया है और कहा कि कंपनियां इससे कम कीमत में ज्यादा प्रोडक्शन हासिल कर सकेंगी और मोटा मुनाफा हासिल कर सकेगी. जबकि अब तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही हैं.
क्या अब AI का बबल फूट गया है, क्योंकि कई कंपनियां AI पर होने वाले मोटे खर्च और कम प्रोफिट को लेकर सवाल खड़ी करने लगी हैं.
माइक्रोसॉफ्ट ने अपने नए फाइनेंशियल इयर के जुलाई में शुरू होने वाले ऑपरेशनल खर्च को कम करने के लिए Claude Code लाइसेंस हटाने जा रहा है. इसी कड़ी में कैब एग्रीगेटर उबर ने AI को लेकर होने वाले मोटे खर्च पर चिंता जताई है.
उबर ऑफिसर का बड़ा खुलासा
उबर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) ने एक इंटरव्यू में हैरान कर देने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि उनकी कंपनी को AI पर होने वाले भारी भरकम खर्च और उससे मिलने वाली रियल बिजनेस के रिजल्ट में सीधा संबंध नहीं दिखाई दे रहा है.
प्रवीण नेप्पल्ली नागा के इंटरव्यू को मेंशन किया
रैपिड रिस्पोंस इंटरव्यू में ऊबर सीओओ एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उबर सीटीओ प्रवीण नेप्पल्ली नागा के अप्रैल में दिए गए इंटरव्यू का जिक्र किया है. उन्होंने उस इंटरव्यू के दौरान कहा था कि कंपनी साल 2026 के लिए तय गए Claude Code बजट पहले ही खर्च किया जा चुका है.
कंपनी के लिए यह हिला देना वाला पल
मैकडोनाल्ड ने बताया है कि इस बयान के बाद कंपनी के लिए यह एक हिला देने वाला पल सामने आया है. इसके बाद कंपनी ने कई मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें कर्मचारियों की संख्या जैसे मुद्दे भी शामिल रहे हैं.
सबसे बड़ी चिंता ये है
सबसे बड़ी चिंता सिर्फ खर्च नहीं थी. असल में सवाल था कि अभी AI का इतना ज्यादा इस्तेमाल क्या वाकई बेहतर प्रोडक्ट्स और यूजर्स के लिए उपयोगी साबित हो रहा है या नहीं.
मैकडोनाल्ड ने आगे बताया है कि AI के इस्तेमाल में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि कस्टमर्स के लिए उपयोगी फीचर्स भी उसी अनुपात में बढ़ रहे हैं.
AI पर खर्च को सही ठहराना मुश्किल
आसान शब्दों में समझें तो उबर अभी AI का काफी इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन कंपनी अभी यह साफ तौर पर नहीं दिखा पा रही है कि इस खर्च से कस्टमर को बेहतर ऐप और फीचर्स सेवाएं कैसे मिल रही हैं. ऐसे में AI पर होने वाले मोटे खर्च को सही ठहराना मुश्किल हो जाता है.
कस्टमर के लिए मुफ्त लेकिन कंपनियों पर भारी बोझ
मैकडोनाल्ड ने आगे ये भी बताया है कि आम यूजर्स को AI सस्ता या लगभग मुफ्त जैसा लग सकता है. जबकि पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है. इन AI टूल्स के लिए कंपनियों को भारी-भरकम बिल चुकाने पड़ रहे हैं.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क