रिकॉर्ड तोड़ा... फिर E-रिक्शे से ढोनी पड़ी अपनी पोल, भारतीय खेलों की सबसे कड़वी तस्वीर

रांची में फेडरेशन कप 2026 के दौरान देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने 5.45 मीटर की छलांग लगाकर संयुक्त रूप से नया राष्ट्रीय पोल वॉल्ट रिकॉर्ड बनाया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई किया. लेकिन ऐतिहासिक उपलब्धि के कुछ घंटे बाद दोनों खिलाड़ियों का एक ई-रिक्शा में अपनी पोल्स ढोते हुए वीडियो वायरल हो गया. इस तस्वीर ने भारतीय खेल व्यवस्था और खिलाड़ियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. मैदान पर इतिहास रचने वाले ये चैम्पियन मैदान के बाहर संघर्ष करते नजर आए, जिसने खेल प्रशासकों की प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है.

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नेशनल रिकॉर्ड के बाद ऐसा सफर... (Photo, X) नेशनल रिकॉर्ड के बाद ऐसा सफर... (Photo, X)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

रांची में रविवार को भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय लिखा गया. मध्य प्रदेश के दो पोल वॉल्टर्स, देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार, ने एक-दूसरे को चुनौती देते हुए 5.45 मीटर की ऊंचाई पार की और संयुक्त रूप से नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना डाला. इसी प्रदर्शन के दम पर दोनों ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट भी हासिल कर लिया.

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लेकिन कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर सामने आया एक वीडियो इस उपलब्धि की चमक को फीका कर गया. भारत के ये नए राष्ट्रीय नायक अपनी पांच मीटर लंबी पोल्स को लेकर किसी विशेष वाहन में नहीं, बल्कि एक छोटे से ई-रिक्शा में ठुंसकर सफर करते दिखाई दिए.

यह दृश्य सिर्फ एक वीडियो नहीं था, बल्कि भारतीय खेल व्यवस्था पर लगा एक ऐसा सवाल था, जिसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है.

मेडल जीतिए, रिकॉर्ड बनाइए... बाकी इंतजाम खुद करिए!

पोल वॉल्ट दुनिया के सबसे तकनीकी और महंगे एथलेटिक्स इवेंट्स में गिना जाता है. खिलाड़ियों की पोल न केवल लंबी और भारी होती है, बल्कि बेहद संवेदनशील भी होती है. इसके बावजूद देश के सर्वश्रेष्ठ पोल वॉल्टर्स को अपने उपकरण ढोने के लिए खुद संघर्ष करना पड़ा.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सवाल उठने लगे कि आखिर करोड़ों रुपये के खेल बजट और बड़े-बड़े दावों के बीच राष्ट्रीय रिकॉर्डधारकों को इतनी बुनियादी सुविधा भी क्यों नहीं मिल पाती?

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यह पहली बार नहीं है...

दरअसल, देव और कुलदीप के लिए यह कोई नई कहानी नहीं है.

इसी साल दोनों खिलाड़ी ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप से लौट रहे थे, जब पनवेल रेलवे स्टेशन पर एक टीटीई ने उनकी पोल्स को ट्रेन में ले जाने पर आपत्ति जताते हुए उन्हें बीच रास्ते उतार दिया था. दोनों खिलाड़ी करीब पांच घंटे तक स्टेशन पर फंसे रहे.

उस समय देव मीणा ने भावुक वीडियो जारी कर पूछा था- अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो जूनियर खिलाड़ियों की हालत कैसी होगी?

कुछ महीने बाद रांची का ई-रिक्शा वाला वीडियो बता रहा है कि हालात अब भी नहीं बदले हैं.

मैदान पर इतिहास, मैदान के बाहर बेबसी

विडंबना देखिए...

रांची में पुरुष पोल वॉल्ट फाइनल भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास की सबसे रोमांचक प्रतियोगिताओं में से एक बन गया. कुलदीप कुमार 5.41 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ मैदान में उतरे थे, लेकिन देव मीणा ने 5.42 मीटर पार कर रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.

इसके बाद कुलदीप ने 5.45 मीटर की छलांग लगाकर जवाब दिया. स्टेडियम में मौजूद दर्शक अभी इस प्रदर्शन से उबरे भी नहीं थे कि देव ने भी 5.45 मीटर पार कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया.

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अंततः कम असफल प्रयासों के कारण देव को स्वर्ण पदक मिला, लेकिन दोनों खिलाड़ी संयुक्त राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक बन गए. दोनों ने 5.50 मीटर की कोशिश भी की, जो भारतीय पोल वॉल्ट के बढ़ते स्तर का संकेत है.

सवाल सिर्फ रिकॉर्ड का नहीं, सम्मान का है

देव मीणा और कुलदीप कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तय 5.25 मीटर के क्वालिफिकेशन मार्क को काफी पीछे छोड़ दिया है. प्रतिभा, मेहनत और जज्बे में कोई कमी नहीं है.

लेकिन आधुनिक खेल सिर्फ प्रतिभा के भरोसे नहीं चलते. अगर भारत को एशियाई और विश्व स्तर की ताकत बनना है, तो खिलाड़ियों से सिर्फ मेडल की उम्मीद करना काफी नहीं होगा. उन्हें वह सम्मान, सुविधाएं और समर्थन भी देना होगा जिसके वे हकदार हैं.

क्योंकि किसी देश की खेल संस्कृति का असली चेहरा पोडियम पर नहीं, बल्कि इस बात में दिखता है कि वह अपने चैंपियनों के साथ मैदान के बाहर कैसा व्यवहार करता है. और फिलहाल, ई-रिक्शा में सफर करते ये राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक भारतीय खेल व्यवस्था का सबसे असहज आईना बन गए हैं.

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