रिटायरमेंट के 4 महीने बाद युवराज सिंह ने तोड़ी चुप्पी- सोचा नहीं था टीम से ड्रॉप हो जाऊंगा

युवराज भारत की दो वर्ल्ड चैम्पियन (2007 में वर्ल्ड टी20 और 2011 में वर्ल्ड कप) टीमों का हिस्सा रहे और दोनों ही टूर्नमेंट्स में उन्होंने अपने प्रदर्शन से खास छाप छोड़ी थी.

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Yuvraj Singh (File) Yuvraj Singh (File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 9:46 AM IST

  • युवराज सिंह ने किन परिस्थितियों में क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की?
  • चैम्पियन ऑलराउंडर ने 10 जून को रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी

युवराज सिंह ने इस साल जून में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने के करीब चार महीने बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है- आखिर उन्हें क्यों रिटारमेंट लेना पड़ा. उन्होंने 'आजतक' से कहा कि भारतीय टीम प्रबंधन ने उनके सामने लगातार नई चुनौतियां रखीं. युवराज ने अफसोस जताया कि कोई भी उनके साथ नहीं बैठा और न ही टीम की योजनाओं से उन्हें अवगत कराया.

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पहले यो-यो टेस्ट फिर घरेलू क्रिकेट का बहाना...

ने कहा, 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि 8-9 मैचों में से 2 में 'मैन ऑफ द मैच' रहने के बाद मुझे ड्रॉप कर दिया जाएगा. मैं चोटिल हो गया और मुझे बताया गया श्रीलंका सीरीज के लिए तैयार रहें. फिर अचानक यो-यो टेस्ट की तस्वीर सामने आ गई. मेरे चयन में यह यू-टर्न था. 36 साल की उम्र में अचानक मुझे वापस जाना पड़ा और यो-यो टेस्ट की तैयारी करनी पड़ी. इसके बाद भी जब मैंने यो-यो टेस्ट को क्लियर किया, तो बताया गया कि मुझे घरेलू क्रिकेट खेलना है.'

युवराज ने कहा कि उन्हें (टीम प्रबंधन) ऐसा लगा था कि मैं अपनी उम्र के कारण यो-यो टेस्ट क्लियर नहीं कर पाऊंगा. और इसके बाद मुझे निकालने में उन्हें आसानी होगी... हां, आप कह सकते हैं कि यह एक बहाना था.

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10 जून को कर दी थी रिटायरमेंट की घोषणा

चैम्पियन ऑलराउंडर युवराज सिंह ने इस साल 10 जून को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी. युवराज भारत की दो वर्ल्ड चैम्पियन (2007 में वर्ल्ड टी20 और 2011 में वर्ल्ड कप) टीमों का हिस्सा रहे और दोनों ही टूर्नामेंट्स में उन्होंने अपने प्रदर्शन से खास छाप छोड़ी थी.

युवी ने बताया- क्या नहीं होता भारतीय क्रिकेट में ..?

युवराज सिंह ने यह भी कहा कि खेल के अंतिम दिनों में वरिष्ठ खिलाड़ियों- (वीरेंद्र सहवाग और जहीर खान का नाम लिया) को टीम प्रबंधन द्वारा विश्वास में नहीं लिया गया. हर खिलाड़ी को उसके भविष्य के बारे में बताना चाहिए. मुझे भी नहीं बताया गया. यही चीज भारतीय क्रिकेट में नहीं होती है.

युवराज ने कहा, 'जो भी इन्चार्ज है उसे खिलाड़ियों के साथ बैठकर बताना चाहिए कि अब हम युवा खिलाड़ियों की ओर देख रहे हैं और हमने यह निर्णय ले लिया है. इस तरह शुरुआत में शायद आपको यह बुरा लग सकता है, लेकिन कम से कम आप इतना तो उन्हें श्रेय दे सकते हैं उन्होंने आपके मुंह पर सच बोला था- जो भारतीय क्रिकेट में बिल्कुल नहीं हो रहा.'

संन्यास लेने के समय को लेकर कोई पछतावा नहीं

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इसके बावजूद युवराज ने कहा कि उन्हें खेल से संन्यास लेने के समय को लेकर कोई पछतावा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मेरे दिमाग में कई चीजें चल रही थीं. विश्व कप शुरू हो गया था और टीम आगे बढ़ रही थी. मैं भारत से बाहर कुछ क्रिकेट खेलना चाहता था. जिदंगी आगे नहीं बढ़ रही थी, यह तनावपूर्ण था.’

युवराज ने कहा, ‘मैं संन्यास को लेकर पसोपेश में था. मेरी कुछ साल पहले शादी हुई थी, इसलिए मैं घर पर भी ध्यान देना चाहता था. मेरे लिए करियर का समापन थोड़ा बोझ बनता जा रहा था.’

उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे भारत से बाहर लीग में खेलना था, तो मुझे संन्यास लेना पड़ता. तो मैंने सोचा कि यह सही समय होगा. चीजें सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही थीं, इसलिए मैंने सोचा कि युवाओं के लिए टीम को आगे बढ़ाने का यह सही समय है और मेरे लिए संन्यास लेना सही होगा.’

टेस्ट में ओपनिंग- रोहित शर्मा पर क्या बोले?

युवराज सिंह ने रोहित शर्मा को टेस्ट में ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर चुने जाने पर कहा, 'मुझे लगता है कि रोहित शर्मा को टेस्ट में बहुत पहले ही ओपनिंग में मौका दे देना चाहिए था.' युवराज ने कहा, 'रोहित शर्मा को टेस्ट में बहुत देरी से ओपनिंग में मौका मिला. टेस्ट मैचों में बहुत पहले ही रोहित से ओपनिंग करवानी चाहिए थी.'

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