तिलक वर्मा ने खुद बताया, कैसे दिया पाकिस्तानी खिलाड़ियों की छींटाकशी का करारा जवाब

दुबई फाइनल में जब पाकिस्तान के खिलाड़ी जोरदार दबाव और छींटाकशी कर रहे थे, तब तिलक वर्मा ने अपने बल्ले से बोल दिया. उनके 69 नाबाद रन भारत को 5 विकेट से जीत दिलाने के लिए पर्याप्त थे... और एशिया कप खिताब को भारत की झोली में आ गया.

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तिलक वर्मा का बल्ला बोला, पाकिस्तान की छींटाकशी खामोश हो गई... (Photo, Getty) तिलक वर्मा का बल्ला बोला, पाकिस्तान की छींटाकशी खामोश हो गई... (Photo, Getty)

aajtak.in

  • हैदराबाद,
  • 30 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 9:00 PM IST

एशिया कप के फाइनल में भारत की जीत के नायक मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा ने कहा कि पाकिस्तान खिलाड़ियों की छींटाकशी और आक्रामक रवैये का सबसे सही जवाब खिताब जीतना ही था. उन्होंने मैच के प्रारंभिक दबाव को सहजता से पार करते हुए टीम को जीत दिलाई.

तिलक के 69 नाबाद रनों की मदद से भारत ने दुबई में रविवार को खेले गए फाइनल में पाकिस्तान को 5 विकेट से हराया. दुबई से लौटने के बाद तिलक ने कहा, 'शुरुआत में थोड़ा दबाव और तनाव था, लेकिन मैंने अपने देश को सबसे ऊपर रखा. मैं सिर्फ जीतना चाहता था. मुझे पता था कि अगर दबाव के आगे झुक गया तो न सिर्फ मैं अपने आप को, बल्कि पूरे 140 करोड़ देशवासियों को निराश कर दूंगा.'

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उन्होंने आगे कहा, 'मैंने अपने बेसिक्स पर भरोसा रखा, वही जो मैंने अपने कोचों से सीखे थे. यही सबसे सही रास्ता था और हमने वही किया- एशिया कप जीतकर उन्हें जवाब दिया.'

तिलक ने स्वीकार किया कि मैच के दौरान पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने जमकर छींटाकशी की, लेकिन उन्होंने खामोशी ही अपना हथियार बनाया.उन्होंने कहा, 'हमने शुरुआती तीन विकेट जल्दी गंवा दिए थे और माहौल काफी गर्म हो गया था. मैंने जल्दी बल्लेबाजी शुरू की, लेकिन किसी को जवाब नहीं दिया और न ही कोई जोखिमभरा शॉट खेलकर टीम या देश को निराश किया.'

उन्होंने बताया कि भारत की जीत के बाद ही पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जवाब मिला. मेरा फोकस हमेशा बेसिक्स पर था. जो कहना था, मैंने मैच के बाद कह दिया. भारत और पाकिस्तान के मैचों में हमेशा कुछ चलता रहता है, लेकिन हमारा लक्ष्य सिर्फ मैच जीतना था.'

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अंत में तिलक ने कहा कि आखिरी ओवर में जब भारत को 10 रन चाहिए थे, तब उन्होंने दबाव को पूरी तरह से मात दी. 'मुझ पर आखिरी ओवर में कोई दबाव नहीं था. मैं सिर्फ अपने देश के लिए सोच रहा था और गेंद दर गेंद रणनीति बना रहा था. मुझे गर्व है कि मैं यह कर सका.'

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