आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया जब रविवार (22 फरवरी) को साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबला खेलने उतरी, तो करोड़ों भारतीय फैन्स को ये उम्मीद थी कि मुकाबला उनकी टीम ही जीतेगी. लेकिन हुआ इसके उल्टा. मुकाबला पूरी तरह एकतरफा रहा, जिसमें साउथ अफ्रीकी टीम ने भारत को 76 रनों से धूल चटा दी. भारत के सामने इस मुकाबले में 188 रनों का लक्ष्य था, मगर पूरी इनिंग्स में एक भी बल्लेबाज हालात के मुताबिक खेल नहीं सका.
काली मिट्टी की पिच, ओस का अभाव और गेंद की मजबूत ग्रिप- इन सबने इस मैच को धैर्य और समझदारी का टेस्ट बना दिया. यहीं पर टीम इंडिया को अपने पूर्व कप्तान विराट कोहली की कमी सबसे ज्यादा खली. व्हाइट-बॉल क्रिकेट में कोहली का नाम एक अलग ही ऊंचाई पर दर्ज है. सचिन तेंदुलकर से तुलना वाली बहस कभी खत्म नहीं होती, लेकिन जब रनचेज की बात आए तो कोहली का कद निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर दिखता है.
टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में भारतीय ने 160 से ज्यादा का लक्ष्य अब तक सिर्फ तीन बार सफलतापूर्वक हासिल किया है. हैरानी की बात यह है कि तीनों ही मैचों में विराट कोहली ने टीम इंडिया को जीत की मंजिल तक पहुंचाया था, साथ ही 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी रहे. इस बार यदि भारत 188 रन बना लेता, तो ये टी20 वर्ल्ड कप में उसका सबसे बड़ा सफल रनचेज होता. मगर 'चेज मास्टर' कोहली के बिना ये मुमकिन नहीं हो पाया.
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♦ भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार 160 या उससे ज्यादा का चेज सफलतापूर्वक 2014 के टूर्नामेंट में किया था. तब मीरपुर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने 173 रनों का टारगेट पांच गेंद बाकी रहते 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया था. उस मुकाबले में विराट कोहली ने 44 गेदों पर नाबाद 72 रन बनाए थे, जिसमें 5 चौके और दो छक्के शामिल रहे.
♦ इसके बाद टी20 वर्ल्ड कप 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुश्किल ग्रुप मुकाबले में भी विराट कोहली ने पांच गेंद बाकी रहते भारतीय टीम को फिनिशिंग लाइन तक पहुंचाया था. तब मोहाली में खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम ने चार विकेट खोकर जीत के लिए जरूरी 161 रन बना दिए थे. कोहली ने 9 चौके और 2 छक्के की मदद से 51 गेंदों पर 82* रन ठोके थे. उनकी यह पारी सिर्फ शॉट्स के लिए नहीं, बल्कि दबाव में बेहतरीन स्ट्राइक रोटेशन के लिए याद की जाती है.
♦ भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में तीसरी एवं आखिरी बार 160 या उससे ज्यादा के टारगेट का सफलतापूर्वक पीछा 2022 के संस्करण में पाकिस्तान के खिलाफ किया. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले गए उस मैच में भी कोहली ने ऐतिहासिक पारी खेली और 160 रनों के टारगेट को भारत ने आखिरी बॉल पर हासिल कर लिया. उस मुकाबले में कोहली ने विकेट्स गिरने के चलते शुरुआती ओवर्स में संयम रखा, फिर धीरे-धीरे गियर चेंज किया. आखिरी ओवरों में तो वो 'बीस्ट मोड' में आ गए और भारत को 4 विकेट से रोमांचक जीत दिलाई. कोहली ने 53 गेंदों पर नाबाद 82 रन कूटे थे, जिसमें 6 चौके और चार छक्के शामिल रहे.
सूर्यकुमार यादव के अंडर भारत की मौजूदा टी20 टीम आक्रामक है और आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर है. भारतीय टीम फ्लैट पिचों पर बेहद खतरनाक मानी जाती है. लेकिन जब पिच थोड़ी स्लो हो, गेंद रुककर आए और रनचेज में धैर्य की जरूरत हो, तब खिलाड़ियों की परीक्षा होती है. भारतीय टीम में सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पंड्या जैसे धुरंधर बल्लेबाज जरूर हैं, लेकिन कोहली जैसा 'चेज मास्टर' अब उसके पास बिल्कुल नहीं है.
साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार ने यही दिखाया कि हर गेंद पर अटैक करने की रणनीति हर वक्त काम नहीं करती. बड़े मैचों में दबाव वाली परिस्थितियों में चेज करने के लिए सिर्फ पावर नहीं, बल्कि कोहली जैसी समझ, टेम्परामेंट और हालात के मुताबिक ढलने की कला चाहिए. भारत को अगर आगे की राह आसान बनानी है, तो किसी बल्लेबाज को आगे आकर वही जिम्मेदारी निभानी होगी, जो सालों तक रनचेज में विराट कोहली निभाते रहे हैं.
अनुराग कुमार झा