धोनी का जादू... जब 28 साल बाद भारत ने वर्ल्ड कप पर फिर जमाया कब्जा

2 अप्रैल 2011 को क्रिकेट की दुनिया में भारत ने एक ऐतिहासिक पल देखा, जब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने 28 साल बाद अपना दूसरा वनडे वर्ल्ड कप खिताब जीता.

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टीम इंडिया के वीरों ने 2 अप्रैल 2011 को वनडे वर्ल्ड कप जीता था. (Photo, AP) टीम इंडिया के वीरों ने 2 अप्रैल 2011 को वनडे वर्ल्ड कप जीता था. (Photo, AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

क्रिकेट की दुनिया में कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो जाते हैं. 2 अप्रैल 2011 ऐसा ही दिन था. उस दिन भारत ने अपने देशवासियों को गर्व, खुशी और रोमांच की अद्भुत घड़ी दी. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया

साल 1983 में कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार विश्व चैम्पियन बनने का गौरव पाया था.  यानी 28 साल के लंबे इंतजार के बाद बाद टीम इंडिया ने फिर से इतिहास रच डाला. भारतीय टीम वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बाद तीसरी ऐसी टीम बन गई थी, जिसने दो या इससे अधिक बार ओडीआई वर्ल्ड कप जीता.

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वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल का माहौल ताबड़तोड़ था. श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट पर 274 रन बनाए. महेला जयवर्धने ने शानदार शतक (103 रन) जड़ा, कप्तान कुमार संगकारा ने 48 और नुवान कुलसेकरा ने 32 रन जोड़े. भारत की ओर से जहीर खान और युवराज सिंह ने दो-दो विकेट निकाले थे.

धोनी का जादुई आगमन

275 रनों का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत संतोषजनक नहीं थी. 31 रन पर दो विकेट गिर चुके थे और 114 के स्कोर पर विराट कोहली भी आउट हो गए. क्रीज पर थे गौतम गंभीर...और उनकी मदद के लिए युवराज सिंह आना तय था, लेकिन धोनी ने सबको चौंकाते हुए खुद क्रीज पर कदम रखा.

धोनी ने गौतम गंभीर के साथ चौथे विकेट के लिए 109 रनों की पार्टनरशिप की. फिर युवराज सिंह के साथ मिलकर पांचवें विकेट के लिए उन्होंने नाबाद 54 रन जोड़े. गंभीर ने 97 रनों (122 गेंद, 9 चौके) की ठोस पारी खेली. जबकि धोनी ने 79 गेंदों में 91 रन (8 चौके, दो छक्के) तो बनाए ही, साथ ही 'बेस्ट फिनिशर' की परिभाषा पर खरे उतरते हुए विजयी सिक्स जड़कर फैन्स का दिल जीत लिया. धोनी ने यह छक्का तेज गेंदबाज नुवान कुलसेकरा की बॉल पर जड़ा था. युवराज 24 गेंदों पर 21 रन बनाकर नाबाद रहे.

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सचिन तेंदुलकर का स्वर्णिम क्षण

यह मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का भी आखिरी वर्ल्ड कप भी था, ऐसे में उनके लिए यह खिताब एक स्पेशल गिफ्ट भी रहा. चूंकि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का विश्व विजेता बनने का सपना पूरा हो चुका था, ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों ने इस दिग्गज को कंधे पर बिठाया और पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाया.

पूरे वर्ल्ड कप में युवराज सिंह, सचिन तेंदुलकर और जहीर खान का जलवा रहा. युवराज को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया था. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में गेंद और बल्ले से धमाल मचाया था. युवराज ने वर्ल्ड कप में 362 रन बनाए और 15 विकेट भी चटकाए थे. टीम इंडिया के लिए सचिन तेंदुलकर ने सबसे ज्यादा 482 रन बनाए थे. जबकि जहीर खान ने सबसे ज्यादा 21 विकेट झटके थे. सचिन-जहीर ओवरऑल लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहे थे.

भारतीय टीम ने तोड़ दिए ये मिथक

भारत ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर कई मिथक तोड़े. वह पहली ऐसी मेजबान टीम बनी, जिसने वर्ल्ड कप जीता. इससे पहले किसी टीम ने अपनी धरती पर वर्ल्ड कप हासिल नहीं किया था. भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम भी अपनी-अपनी धरती पर ओडीआई वर्ल्ड कप जीतने में सफल रही.

टीम इंडिया लक्ष्य का पीछा करते हुए चैम्पियन बनने वाली तीसरी टीम बनी थी. इससे पहले वर्ल्ड कप के इतिहास में दो बार ही ऐसा हुआ था. इससे पहले तक फाइनल में शतक बनाने वाले की टीम जीतती रही थी. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ था, जब शतक काम नहीं आया. महेला जयवर्धने के नाबाद 103 रनों के बाद भी श्रीलंका को जीत नसीब नहीं हुई.

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