IPL: एक रन का घमंड, 2 पॉइंट्स की कीमत- मिलर की ‘ना’ ने डुबो दी दिल्ली

इस IPL 2026 के मुकाबले में Gujarat Titans ने अपनी पहली जीत दर्ज की, लेकिन असली नाटक आखिरी दो गेंदों में हुआ. David Miller ने पेनल्टिमेट बॉल पर सिंगल लेने से इनकार कर दिया, जिससे Kuldeep Yadav रन नहीं ले पाए.

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डेविड मिलर निराशा के भंवर में.... (Photo, PTI) डेविड मिलर निराशा के भंवर में.... (Photo, PTI)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

क्रिकेट में हार-जीत का फासला अक्सर बहुत बड़ा नहीं होता. कभी एक गेंद, कभी एक शॉट  और कभी सिर्फ एक रन... दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) और  गुजरात टाइटन्स (Gujarat Titans) के बीच खेले गए इस मुकाबले ने फिर साबित कर दिया कि खेल का सबसे 'छोटा फैसला' भी सबसे बड़ा असर डाल सकता है.

बुधवार रात दिल्ली में आईपीएल 2026 के इस मैच का निर्णायक पल आखिरी गेंद नहीं था. वो उससे पहले की गेंद थी, जहां डेविड मिलर ने सिंगल लेने से इनकार कर दिया. और यहीं से कहानी बदल गई.

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मिलर उस वक्त बेहतरीन लय में थे. 106 मीटर का छक्का जड़ चुके थे, आत्मविश्वास चरम पर था. ऐसे में उनका यह सोचना स्वाभाविक था कि आखिरी गेंद पर भी वे मैच खत्म कर देंगे.

लेकिन क्रिकेट का यही तो धोखा है. यह आपको ‘अजेय’ होने का भ्रम देता है और अगले ही पल आपकी सबसे बड़ी भूल को बेनकाब कर देता है.

मिलर ने उस एक रन को ठुकराया, जो आसानी से लिया जा सकता था. नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े कुलदीप यादव शायद उसी भरोसे का इंतजार कर रहे थे, जो एक टीममेट को मिलना चाहिए.

पर यहां भरोसे की जगह ‘सेल्फ-बिलीफ’ ने ले ली और यही फर्क बना.

'... जो मिलता है, उसे लो'

इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व अफ्रीकी तेज गेंदबाज डेल स्टेन की प्रतिक्रिया बेहद सटीक थी. उन्होंने कहा, 'आप जो मिलता है, उसे लेते हैं… मिलर जैसे खिलाड़ी के लिए सिंगल लेना कोई सवाल ही नहीं होना चाहिए था.'

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स्टेन ने यह भी इशारा किया कि उस वक्त मैच को टाई कर लेना ही समझदारी थी. सुपर ओवर में जाने का विकल्प खुला रहता और फिर आप अपने टेलएंडर पर भरोसा दिखाते.

लेकिन मिलर ने उल्टा रास्ता चुना... उन्होंने मैच को अपने बल्ले पर खत्म करने की जिम्मेदारी खुद पर ले ली और यही जिम्मेदारी अंततः बोझ बन गई.

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भरोसे की कमी या ओवरकॉन्फिडेंस?

यहां सवाल सिर्फ एक सिंगल का नहीं है.यह सवाल है टीम के भीतर भरोसे का. क्या मिलर को कुलदीप यादव पर भरोसा नहीं था... या फिर उन्हें खुद पर जरूरत से ज्यादा भरोसा था? दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं.

क्रिकेट एक टीम गेम है. यहां मैच अकेले नहीं जीते जाते. अगर आप अपने साथी पर भरोसा नहीं करते, तो आप आधी लड़ाई वहीं हार जाते हैं.और अगर आप खुद को ‘सुपरहीरो’ मान लेते हैं, तो खेल आपको जल्दी ही आईना दिखा देता है.

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आखिरी गेंद: स्क्रिप्ट का क्रूर अंत

अगली गेंद पर जो हुआ, वो क्रिकेट की सबसे क्रूर सच्चाई है. आखिरी गेंद पर 2 रन चाहिए थे...  प्रसिद्ध कृष्णा ने फिर चालाकी दिखाई, गति में बदलाव किया. मिलर चूक गए. इस बार जोस बटलर ने बिना गलती किए स्टंप उड़ा दिए.
कुलदीप यादव क्रीज से बाहर थे... और मैच भी दिल्ली से दूर जा चुका था.

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