ICC से पंगा, ‘बुलबुल’ पर दाग और ख‍िलाड़‍ियों की चुप्पी... उस मीटिंग की कहानी जिसने बांग्लादेश को T20 WC से दूर क‍िया

बांग्लादेश ने भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया है, BCB ने गुरुवार (22 जनवरी) को कहा क‍ि वह भारत में वर्ल्ड कप खेलने का बायकॉट कर रहा है. वह अंत तक श्रीलंका में खेलने की ज‍िद करता रहा. ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल) ने जब उसकी मांग नहीं मानी तो उसने इस टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया, इसके लिए बाकायदा एक मीट‍िंग हुई, आइए आपको बताते हैं उस मीट‍िंग की पूरी कहानी....

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22 जनवरी को हुई मीट‍िंग के बाद बांग्लादेश ने किया भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार (Photo: Getty) 22 जनवरी को हुई मीट‍िंग के बाद बांग्लादेश ने किया भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार (Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई द‍िल्ली ,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:46 AM IST

सबसे बड़ा सवाल यह है क‍ि गुरुवार (22 जनवरी) को उस मीट‍िंग में क्या हुआ? जो बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल) के उस स्टैंड (21 जनवरी को ICC ने कहा मैच भारत में खेलने होंगे और वेन्यू चेंज नहीं होंगी) के ख‍िलाफ बुलाई थी, ज‍िसमें उसने भारत में टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने से इनकार कर दिया था. 

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आख‍िर इस मीट‍िंग में क्या हुआ, कौन क्या बोला? ख‍िलाड़‍ियों का क्या स्टैंड था ? बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के पहले ऐसे अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल क्या बोले, बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार आस‍िफ नजरुल ने क्या कहा? आइए आपको बताते हैं....

PTI को सूत्रों ने बताया- सरकार और खिलाड़ियों की बैठक में ज्यादातर बातचीत आसिफ नजरुल ने की, जबकि बुलबुल सीमित भूमिका में नजर आए. वरिष्ठ खिलाड़ियों ने खुलकर बोलने से परहेज किया. उनका मानना था कि अगर तमीम इकबाल जैसे सीनियर खिलाड़ी का सम्मान नहीं बचा, तो बाकी खिलाड़ियों के लिए हालात और मुश्किल हो सकते हैं. तमीम इकबाल को इंड‍ियन एजेंट कहा गया था. 

जब नजरुल से मीट‍िंग के बाद पूछा गया कि क्या खिलाड़ियों को इस बहिष्कार के फैसले में शामिल किया गया है, तो उन्होंने कहा- हमने खिलाड़ियों से मुलाकात कर सरकार के नजरिए और फैसले की वजहें समझाईं. यह एक निजी बातचीत थी, इसलिए खिलाड़ियों ने क्या कहा, इसका खुलासा नहीं किया जाएगा. लेकिन वे हालात को समझते नजर आए. 

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बैठक के बाद अमीनुल इस्लम 'बुलबुल' मायूस दिखे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने वर्ल्ड कप खेलने की उम्मीद जरूर जताई, लेकिन उनके शब्दों में कॉन्फ‍िडेंस की कमी साफ नजर आई.

बांग्लादेश क्रिकेट के पहले टेस्ट शतकवीर अमीनुल इस्लाम बुलबुल हमेशा उनकी खास पहचान रहे हैं, लेकिन गुरुवार को उनके नाम एक ऐसा ‘पहला’ जुड़ता दिखा, जिसे शायद ही वह कभी भूल सकें.

बुलबुल बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के पहले ऐसे अध्यक्ष बनने जा रहे हैं, जिनके कार्यकाल में नेशनल टीम किसी ICC वैश्विक टूर्नामेंट से हट सकती है. इसके पीछे सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नज़रुल का कड़ा रुख है, जिन्होंने सुरक्षा को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए भारत यात्रा का विरोध किया. ICC में भी बांग्लादेश को समर्थन नहीं मिला. पाकिस्तान के औपचारिक समर्थन को छोड़ दें तो न तो ICC बोर्ड और न ही श्रीलंका क्रिकेट ने उनके पक्ष में आवाज उठाई. जबकि बुलबुल खुद एक दशक तक ICC में अहम भूमिका निभा चुके हैं. यानी कुल म‍िलाकर बुलबुल पर एक दाग तो लग गया. 

बांग्लादेश को वर्ल्ड कप से हटने से क्या नुकसान?
इस फैसले का सीधा असर BCB की आर्थिक सेहत पर पड़ सकता है. ICC से मिलने वाली सालाना लगभग 325 करोड़ टका (करीब 27 मिलियन डॉलर: 250 करोड़ भारतीय रुपए) की राशि खतरे में है. इसके अलावा ब्रॉडकास्ट और स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू में भी भारी गिरावट की आशंका है. कुल मिलाकर बोर्ड की सालाना आमदनी में 60 फीसदी तक की चोट लग सकती है.

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हालात ऐसे बने तो अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित भारत-बांग्लादेश सीरीज भी रद्द हो सकती है, जिसकी टीवी राइट्स की वैल्यू कम से कम 10 अन्य द्विपक्षीय सीरीज के बराबर मानी जाती है.

ख‍िलाड़‍ियों का सबसे ज्यादा नुकसान 
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों का है. लिटन दास जैसे क्रिकेटरों के लिए यह करियर का शायद आखिरी बड़ा मौका हो सकता है. हालांकि सरकार और बोर्ड ने मैच फीस की भरपाई का भरोसा दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के लिए पैसा नहीं, प्रतिस्पर्धा और मंच मायने रखता है.


वैसे सोशल मीडिया पर बांग्लादेश की ज्यादातर जनता की राय बंटी हुई है. कुछ ने कहा नजरुल ने टीम को भारत न जाने देकर सही फैसला लिया है, क्योंकि मुस्ताफ‍िजुर रहमान का बाहर होना देश की इज्जत  का मामला है. 

अजीब बात है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) जिसके आने वाले चुनावों के बाद सत्ता में आने की उम्मीद है, उसने इस मामले पर अपनी राय जाहिर नहीं की है, ऐसा माना जा रहा है कि लोगों की भावना भारत जाने के ख़िलाफ है और पार्टी न्यूट्रल रहना चाहती है 

 

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