'सालों का दर्द, संघर्ष और...', अनाया बांगड़ ने लड़की बनने से पहले शरीर में क्या-क्या झेला? पोस्ट में सब बता द‍िया

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कोच संजय बांगड़ की बेटी अनाया बांगड़ ने जेंडर ट्रांजिशन के बाद अपना नया अनुभव साझा किया है. 11 जुलाई को किए गए पोस्ट में उन्होंने बताया कि खुद की असली पहचान तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. अनाया ने संघर्ष, दर्द, धैर्य और आत्मस्वीकृति की बात करते हुए लिखा कि आखिरकार अब उन्हें अपने शरीर और पहचान में सुकून मिला है.

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'एक दिन आईने में खुद को देखकर समझोगे...' अनाया बांगड़ का पोस्ट सोशल मीडिया पर छाया (Photo: Instagram/@anayabangar) 'एक दिन आईने में खुद को देखकर समझोगे...' अनाया बांगड़ का पोस्ट सोशल मीडिया पर छाया (Photo: Instagram/@anayabangar)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:14 PM IST

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाजी कोच संजय बांगड़ की बेटी अनाया बांगड़ ने जेंडर ट्रांजिशन के बाद अपनी जिंदगी के सबसे भावुक अनुभवों में से एक को सोशल मीडिया पर साझा किया है. 11 जुलाई को किए गए इस पोस्ट में अनाया ने बताया कि खुद की असली पहचान तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, लेकिन आखिरकार उन्हें वह खुशी और सुकून मिला, जिसके लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी.

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अनाया ने अपने पोस्ट में लिखा- जेंडर यूफोर‍िया... यह एहसास हर संघर्ष के लायक था. कई दिन ऐसे भी आए, जब मुझे लगा कि शायद मैं कभी अपने ही शरीर में सहज महसूस नहीं कर पाऊंगी. इस मुकाम तक पहुंचने में वर्षों का धैर्य, मुश्किल बातचीत, कई असफलताएं और बार-बार डर पर खुद को चुनने का फैसला शामिल रहा."

उन्होंने आगे लिखा कि अगर कोई व्यक्ति अभी अपनी पहचान को लेकर असमंजस में है, तो उसे उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए. खुद को समय दें, खुद पर भरोसा रखें और वही बनने की इजाजत दें, जो आप वास्तव में हैं.

एक दिन आईने में खुद को देखकर महसूस होगा कि हर मुश्किल दिन आपको इसी मंजिल तक लाने के लिए था और वह एहसास हर संघर्ष के लायक है.

हाल ही में कराया था जेंडर ट्रांजिशन
अनाया बांगड़ ने हाल ही में जेंडर ट्रांजिशन कराया था. उनका यह सफर सिर्फ मेडिकल प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उनकी पहचान, मानसिक संघर्ष, साहस और आत्मस्वीकृति की कहानी भी है. ट्रांजिशन के बाद से वह लगातार अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं और कई लोगों के लिए प्रेरणा बन रही हैं.

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कई लेवल पर खेल चुकी हैं क्रिकेट
जेडर ट्रांजिशन से पहले अनाया का नाम आर्यन बांगड़ था. उन्होंने क्रिकेट में भी अपनी पहचान बनाई. मुंबई के स्थानीय क्लब क्रिकेट में इस्लाम जिमखाना की ओर से खेलते हुए उन्होंने क्रिकेट करियर की शुरुआत की. इसके बाद महज 18 साल की उम्र में इंग्लैंड की लीसेस्टरशायर लीग में हिंकले क्रिकेट क्लब का प्रतिनिधित्व किया.

साल 2019 में उन्होंने पुडुचेरी की ओर से राष्ट्रीय अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी खेली. इस टूर्नामेंट में पांच मैचों में 150 के सर्वश्रेष्ठ स्कोर और दो अर्धशतकों की मदद से 300 रन बनाए. इसके अलावा गेंदबाजी में भी प्रभाव छोड़ा और 20 विकेट अपने नाम किए.

संजय बांगड़ का शानदार करियर
अनाया के पिता संजय बांगड़ भारतीय क्रिकेट के जाने-माने नाम हैं. वह टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच रह चुके हैं और मौजूदा समय में कमेंट्री तथा कोचिंग से जुड़े हैं. 53 वर्षीय संजय बांगड़ ने भारत के लिए 12 टेस्ट और 15 वनडे मैच खेले. इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्होंने 650 रन बनाए और 14 विकेट भी हासिल किए.


 

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