नॉर्वे के एक अखबार में पीएम मोदी को ‘सपेरे’ के रूप में दिखाने वाले कार्टून पर विवाद छिड़ गया. सोशल मीडिया पर इसे नस्लवादी और औपनिवेशिक सोच से जोड़कर आलोचना की जा रही है. विवाद उस समय और बढ़ गया जब नॉर्वे की पत्रकार हेले लाइंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठाए.