पेट्रोल, डीजल, गैस, पेट्रोकेमिकल्स... 1 बैरल क्रूड ऑयल से क्या-क्या मिलता है?

एक बैरल क्रूड ऑयल (159 लीटर) से 42% पेट्रोल, 27% डीजल, 10% जेट फ्यूल, 4% एलपीजी, 7% पेट्रोकेमिकल्स, 5% हैवी फ्यूल, 2% लुब्रिकेंट्स और 3% एस्फाल्ट मिलता है.

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एक बैरल क्रूड ऑयल से कई सारी चीजें निकलती हैं. इन चीजों को रिफाइनरी में अलग-अलग किया जाता है. (Photo: Pexel) एक बैरल क्रूड ऑयल से कई सारी चीजें निकलती हैं. इन चीजों को रिफाइनरी में अलग-अलग किया जाता है. (Photo: Pexel)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

दुनिया भर में तेल बहुत जरूरी है. एक बैरल क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) से कई उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं. एक बैरल में 42 गैलन या 159 लीटर तेल होता है. जब इसे रिफाइन (शुद्ध) किया जाता है तो अलग-अलग उत्पाद बनते हैं. नीचे दी गई इन्फोग्राफिक के अनुसार एक बैरल से मिलने वाले मुख्य उत्पाद इस प्रकार हैं.

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एक बैरल क्रूड ऑयल से मिलने वाले उत्पाद और उनकी मात्रा

एक बैरल कच्चे तेल से सबसे ज्यादा पेट्रोल (गैसोलीन) मिलता है, इसमें 42% पेट्रोल बनता है. दूसरे नंबर पर 27% डीजल आता है. 10% जेट फ्यूल (हवाई जहाज का ईंधन) मिलता है. 4% एलपीजी (रसोई गैस) बनती है. 

7% पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक्स (प्लास्टिक, दवा आदि बनाने का कच्चा माल) मिलता है. 5% मरीन फ्यूल या हैवी फ्यूल ऑयल, 2% लुब्रिकेंट्स और वैक्स (मशीन ऑयल और मोम) और 3% एस्फाल्ट (सड़क बनाने का कोलतार) मिलता है. ये प्रतिशत थोड़े कम-ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि रिफाइनरी और क्रूड ऑयल का प्रकार अलग होता है.

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ये उत्पाद कहां रिफाइन किए जाते हैं?

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क्रूड ऑयल को रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है. दुनिया भर में हजारों रिफाइनरी हैं. बड़े देश जैसे अमेरिका, चीन, भारत, रूस, सऊदी अरब आदि में बड़ी-बड़ी रिफाइनरी चलती हैं. भारत में रिलायंस, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की रिफाइनरी बहुत प्रसिद्ध हैं. 

रिफाइनरी में क्रूड ऑयल को गर्म करके अलग-अलग तापमान पर उसके हिस्सों को अलग किया जाता है. इसे फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहते हैं. हल्के उत्पाद जैसे पेट्रोल ऊपर आ जाते हैं. भारी उत्पाद नीचे रह जाते हैं.

इन उत्पादों का वितरण कैसे होता है?

रिफाइनरी से उत्पाद तैयार होने के बाद पाइपलाइन, टैंकर जहाज, ट्रेन और ट्रक के जरिए पूरे देश और दुनिया में भेजे जाते हैं. 

  • पेट्रोल और डीजल - पेट्रोल पंपों पर पहुंचाया जाता है.  
  • जेट फ्यूल - हवाई अड्डों पर जाता है.  
  • एलपीजी - घरों में सिलेंडर के रूप में पहुंचती है.  
  • पेट्रोकेमिकल्स - प्लास्टिक, पेंट, टायर, दवाइयों की फैक्टरियों में जाते हैं.  
  • एस्फाल्ट - सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल होता है.

वितरण में तेल कंपनियां, सरकार और बाजार की मांग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, सप्लाई और डिमांड पर निर्भर करती हैं.

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आज भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी तेल पर बहुत निर्भर है. गाड़ियां, हवाई जहाज, बिजली, प्लास्टिक सामान - सब कुछ तेल से जुड़ा है. लेकिन दुनिया अब इलेक्ट्रिक वाहन और रीन्यूबल एनर्जी (सूर्य, हवा) की ओर बढ़ रही है. भविष्य में तेल की मांग कम हो सकती है, लेकिन अभी भी यह ऊर्जा और केमिकल उद्योग का आधार बना हुआ है.

एक बैरल क्रूड ऑयल हमें सिर्फ ईंधन नहीं बल्कि सैकड़ों उपयोगी चीजें देता है. 42% पेट्रोल, 27% डीजल के साथ-साथ जेट फ्यूल, गैस, प्लास्टिक कच्चा माल आदि मिलते हैं. ये रिफाइनरी में बनते हैं और फिर पूरे विश्व में वितरित किए जाते हैं. तेल उद्योग अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारी आधुनिक जीवनशैली को चलाने में बड़ी भूमिका निभाता है.

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