'चीता दहाड़ता नहीं है', गुर्राहट या कुछ और... ऐसी होती है चीते की आवाज़

शेर दहाड़ता है. बाघ गुर्राता है. बिल्ली म्याऊं-म्याऊं करती है. भेड़-बकरी मिमियाते हैं. लेकिन चीते की आवाज़ कैसी होती है. इसे लेकर एक कन्फ्यूज़न है. जरूरी ये है कि आपको देश में आए नए अफ्रीकी चीतों के बारे में ये चीजें पता होनी चाहिए. कम से कम आवाज़ ताकि कूनो नेशनल पार्क जाएं तो उसका साउंड सुनकर उसे पहचान सकें.

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कैसी होती है चीते की आवाज़? चीता कई तरह की आवाज़ें निकाल लेता है. हर आवाज़ का अलग मतलब होता है. (फोटोः हू चेन/अन्स्प्लैश) कैसी होती है चीते की आवाज़? चीता कई तरह की आवाज़ें निकाल लेता है. हर आवाज़ का अलग मतलब होता है. (फोटोः हू चेन/अन्स्प्लैश)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

नामीबिया (Namibia) से मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में चीते आ चुके हैं. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने जन्मदिन यानी 17 सितंबर 2022 को इन अफ्रीकी चीतों को पार्क में छोड़ा. चीतों की तस्वीरें तो आप आराम से देख लेंगे. लेकिन क्या हमें पता है कि चीतों की आवाज़ कैसी है?

कूनो नेशनल पार्क में चीता रिलीज़ करने के बाद उसकी फोटो लेते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. 

चीते हैं तो बाघ और शेर के परिवार का. लेकिन न तो वो शेर की तरह दहाड़ता है. न ही बाघ की तरह गुर्राता है. न ही भेड़-बकरियों की तरह मिमियाता है. उसकी आवाज़ बहुत हद तक बिल्ली की तरह होती है. लेकिन बिल्लियों की म्याऊं-म्याऊं बेहद पतली होती है. जबकि चीते का म्याऊं-म्याऊं में थोड़ा ज्यादा भारीपन और बेस होता है. 

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आप अगर इंटरनेट पर मौजूद वीडियो-ऑडियो देखेंगे या सुनेंगे तो आपको पता चलेगा कि चीते की आवाज़ कैसी होती है. चीता अलग-अलग स्थितियों में अलग-अलग तरह की आवाज़ें निकालता है. वह बादल की तरह गरजता (Growls), बिल्लियों की तरह घुरघुर या म्याऊं-म्याऊं (Purr), सांप की तरह हिस्स (Hissing) और कराहने की आवाज़ (Moaning) जैसी आवाज़ें निकालता है. हम प्रयास करते हैं आपको यह बताने की कि चीते इन आवाज़ों को किन-किन परिस्थितियों में निकालते हैं. 

मां-शावक के बीच होती चिड़ियों जैसी आवाज़ में बातः चीता कई तरह की आवाज़ें निकालता है. मां चीता और शावक चीता आपसे में चर्पिंग (Chirping) यानी चिड़ियों की तरह चुंहचुआहट की आवाजें निकालते हैं. बिल्लियों की तरह सामान्य म्याऊ-म्याऊ जब वह सामान्य स्थिति में सुरक्षित महसूस करते हुए निकालते हैं. 

खतरा बढ़ने पर जोर से भौंकते हैंः खतरा बढ़ता है. वो इतनी ज़ोर से विस्फोटक रूप से भौंकने (Explosive Yelp) की आवाज़ निकालते हैं. जो आपको दो किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है. 

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बादल जैसी गरजने की आवाज़ः चीता जब अपने किसी साथी या दूसरे दुश्मन जीव के साथ मल्लयुद्ध यानी शारीरिक संघर्ष करता है. तब वह तेजी से बादल जैसा गरजता (Growls) है. कई बार इसे Agonistic Sound भी कहते हैं. 

- 17 Sep 2022

दर्द या आफत में...: चीता जब दर्द में होता है. या उसे कोई आफत महसूस होती है तब वह झुककर सांप की तरह फुंफकारता (Hissing) या कराहना (Moaning) की आवाज़ निकालता है. कई बार ये आवाज़ें मिश्रित होती है. यानी अगर किसी और जानवर से लड़ते समय उसे दर्द हो रहा है. या उसे मरने का डर सताता है तब तीनों आवाज़ें एक साथ निकलती है. 

थूकने जैसी आवाजः चीता जब किसी से संघर्ष के समय चुनौती देता है. या फिर दूसरे चीते को अपनी टेरीटरी में भागने के लिए कहता है. तब वह अपने अगले दोनों पैरों या एक पैर को जोर से पटक कर थूकने (Spitting) जैसी आवाज़ निकालता है. 

चीतों की गुर्राहट कभी-कभी ऐसे होता है जैसे इंसान गर्म पानी का गरारा (Gargle) करते हैं. म्याऊ-म्याऊ और गरजने जैसी आवाज़ों को पल्स्ड साउंड (Pulsed Sound) कहते हैं. जो आवाजें वो टोन में यानी किसी तान में निकालता है. जैसे- मां से बात करते समय, भौंकना आदि इन्हें टोनल साउंड (Tonal Sound) कहते हैं. शोर मचाने वाली आवज़ जैसे सांप की तरह फुंफकारना (Hissing) को नॉयज़ी साउंड (Noisy Sound) कहते हैं. अब जब चीते इतनी तरह की आवाज़ें निकालते हैं. तब आप किसी एक आवाज़ को उसकी पहचान बनाना मुश्किल है. 

- 17 Sep 2022

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बाघ, शेर और जगुआर दहाड़ने वाली बिल्लियों में आते हैं जबकि चीता म्याऊं-म्याऊं करने वाली बिल्लियों में. (फोटोः गेटी)

म्याऊं-म्याऊं और गुर्राने वाली बिल्लियों में अंतर 

जंगली बिल्लियों का वैज्ञानिक परिवार है द फेलिडे फैमिली (The Felidae Family). इनमें दो तरह की बिल्लियां होती हैं. दहाड़ने और गुर्राने वाली बिल्लियां (Roaring Cats) और म्याऊं-म्याऊं करने वाली बिल्लियां (Purring Cats). यह विभाजन 1835 से 35 के बीच किया गया था. दहाड़ने वाली बिल्लियों में शेर, बाघ, जगुआर और तेंदुए आते हैं. चीता म्याऊं-म्याऊं करने वाली कैटेगरी का जानवर है. लेकिन यह कई तरह की आवाज़ें निकालता है. 

साल 2002 में एक बड़े पैमाने की स्टडी हुई. जिसमें बताया गया कि चीता प्लोमनिक एग्रेसिव (pulmonic egressive) और इनग्रेसिव एयरस्ट्रीम ( ingressive airstream) दोनों तरह की आवाज़ निकाल लेता है. चीतों की आवाज़ की फ्रिक्वेंसी 25 से 150 Hz तक जाती है. वह जरुरत के मुताबिक निकलती हैं. अलग-अलग तरह की फ्रिक्वेंसी पर निकलने वाली अलग-अलग तरह की आवाज़ का अलग-अलग मतलब होता है. प्यार, खतरा, गुस्सा, डर और दर्द में अलग-अलग तरह की आवाज़. 

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