इजरायल के समुद्री तट पर हाल ही में दो दुर्लभ और संकटग्रस्त समुद्री जीवों के शव मिले हैं. एक विशाल स्पर्म व्हेल और एक बड़ा लेदरबैक समुद्री कछुआ मृत अवस्था में किनारे पर पहुंचे. ये दोनों प्रजातियां संकट में हैं. इजरायल के तट पर बहुत कम देखी जाती हैं. यह घटना 24 फरवरी 2026 को हुई.
स्पर्म व्हेल का शव दक्षिणी इजरायल में मिला
मंगलवार सुबह इजरायल के सबसे दक्षिणी भूमध्यसागरीय बीच ज़िकिम बीच (Zikim Beach) पर एक मृत स्पर्म व्हेल का शव किनारे पर आ गया. यह जगह यम शिकमा मरीन नेचर रिजर्व के पास है, जो गाजा सीमा के पास है.
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इजरायल की नेचर एंड पार्क्स अथॉरिटी को सबसे पहले इसकी सूचना मिली. विशेषज्ञों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव की जांच (ऑटोप्सी या नेक्रोप्सी) शुरू की ताकि मौत का कारण पता चल सके. अभी तक मौत का सटीक कारण नहीं बताया गया है.
डेल्फिस एसोसिएशन (Delphis Association) की मिया एल्सर ने बताया कि समुद्री शोध शुरू होने के बाद से इजरायल के तट पर 8 स्पर्म व्हेल के शव ही मिले हैं, जिसमें यह नया मामला शामिल है. यह प्रजाति बहुत दुर्लभ है.
स्पर्म व्हेल के बारे में जानें
स्पर्म व्हेल दुनिया का सबसे बड़ा दांत वाला व्हेल है और सबसे बड़ा दांत वाला शिकारी जीव भी. यह बहुत गहराई में गोता लगाता है और बड़े-बड़े स्क्विड शिकार करता है.
भूमध्य सागर में स्पर्म व्हेल की आबादी अलग-अलग है. यह अटलांटिक महासागर के व्हेल से जेनेटिक रूप से अलग है. इनकी अपनी खास क्लिक ध्वनियां (क्लिकिंग साउंड्स) होती हैं.
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2021 में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने भूमध्य सागर की स्पर्म व्हेल को एंडेंजर्ड (संकटग्रस्त) घोषित किया. यहां इनकी संख्या सिर्फ 250 से 2500 के बीच है और यह घट रही है.
डेल्फिस एसोसिएशन के एवियाद शेइनिन ने कहा कि ये व्हेल अलग-थलग हैं. कई खतरों का सामना कर रहे हैं, जैसे शोर, प्लास्टिक प्रदूषण और मछली पकड़ने के जाल में फंसना.
लेदरबैक समुद्री कछुआ का शव हर्ज़लिया में मिला
उसी दिन, तेल अवीव के उत्तर में हॉफ हट्ज़ुक बीच में एक विशाल लेदरबैक समुद्री कछुए का शव मिला. यह दुनिया की सबसे बड़ी कछुआ प्रजाति है.
शव काफी सड़ चुका था और उस पर कई प्लास्टिक चीजें चिपकी हुई थीं. नेचर एंड पार्क्स अथॉरिटी के सी टर्टल रेस्क्यू सेंटर के डायरेक्टर यानिव लेवी ने बताया कि यह क्रिटिकली एंडेंजर्ड (गंभीर संकट में) प्रजाति है.
ये कछुए भूमध्य सागर में प्रजनन नहीं करते. ये अटलांटिक महासागर से यहां आते हैं. मौत का मुख्य कारण लगता है मछली पकड़ने के रस्सों और हुक-एंड-लाइन फिशिंग गियर में फंसना.
यानिव लेवी ने कहा कि इस प्रजाति में मौत के सबसे आम कारण हैं...
क्यों है चिंता की बात?
दोनों घटनाएं एक ही दिन हुईं, जो समुद्री जीवन के लिए खतरों को दिखाती हैं. प्लास्टिक प्रदूषण, मछली पकड़ने के उपकरण और अन्य मानवीय गतिविधियां इन दुर्लभ जीवों के लिए बड़ा खतरा हैं. इजरायल की सरकार और एनजीओ जैसे डेल्फिस एसोसिएशन इन प्रजातियों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से हमें समुद्र की सफाई और संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.
आजतक साइंस डेस्क