NASA का आर्टेमिस-2 मिशन फरवरी में हो सकता है लॉन्च... चंद्रमा का चक्कर लगाकर आएंगे एस्ट्रोनॉट

नासा का आर्टेमिस-2 मिशन फरवरी 2026 में लॉन्च हो सकता है. फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से SLS रॉकेट पर ओरियन स्पेसक्राफ्ट उड़ेगा. चार एस्ट्रोनॉट्स- रिड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरमी हैंसन होंगे. 10 दिन का मिशन है. चंद्रमा की परिक्रमा करके वापसी होगी. यह चंद्रमा पर लैंडिंग की तैयारी है.

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कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा SLS रॉकेट और एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा पर ले जाएगा. (Photo: NASA) कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा SLS रॉकेट और एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा पर ले जाएगा. (Photo: NASA)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:23 PM IST

50 साल बाद इंसान फिर चंद्रमा के आसपास जाएंगे.

नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम चंद्रमा पर इंसानों की वापसी का बड़ा प्लान है. इसका दूसरा मिशन आर्टेमिस-2 फरवरी 2026 में लॉन्च हो सकता है. यह 1972 के अपोलो-17 के बाद पहला मानव मिशन होगा जो चंद्रमा के आसपास जाएगा. यह मिशन करीब 10 दिन का होगा. 

लॉन्च कब और कहां से?

लॉन्च डेट: सबसे जल्दी 5 या 6 फरवरी 2026. अगर देरी हुई तो अप्रैल 2026 तक.

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लॉन्च साइट: अमेरिका के फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से. यहीं से अपोलो मिशन भी लॉन्च हुए थे.

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रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट क्या है?

रॉकेट: स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) – दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट. यह ब्लॉक-1 वर्जन में होगा. SLS चंद्रमा तक ओरियन स्पेसक्राफ्ट, एस्ट्रोनॉट्स और कार्गो एक साथ भेज सकता है.

स्पेसक्राफ्ट: ओरियन – चार लोगों के लिए बना कैप्सूल. इसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और कम्युनिकेशन की आधुनिक तकनीक है. ओरियन चंद्रमा के आसपास घूमकर वापस आएगा.

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कौन-कौन से एस्ट्रोनॉट जा रहे हैं?

रिड वाइजमैन (कमांडर, नासा) – अनुभवी एस्ट्रोनॉट.

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विक्टर ग्लोवर (पायलट, नासा) – पहली बार कोई अश्वेत व्यक्ति चंद्रमा के इतना करीब जाएगा.

क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट, नासा) – सबसे लंबे समय तक स्पेस में रहने वाली महिला का रिकॉर्ड.

जेरमी हैंसन (मिशन स्पेशलिस्ट, कैनेडियन स्पेस एजेंसी) – पहली बार कोई गैर-अमेरिकी चंद्रमा के इतना करीब जाएगा.

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मिशन कितने दिन का और क्या होगा?

ड्यूरेशन: लगभग 10 दिन.

ट्रैजेक्टरी: चंद्रमा की फ्री-रिटर्न परिक्रमा. पहले पृथ्वी की कुछ परिक्रमाएं, फिर चंद्रमा के पीछे से गुजरकर वापस. चंद्रमा से सबसे करीब दूरी करीब 7400 किमी होगी. लैंडिंग नहीं होगी, सिर्फ घूमकर वापस.

उद्देश्य: ओरियन और SLS की टेस्टिंग मानव के साथ. लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन आदि चेक करना. यह आर्टेमिस-3 (2027 में चंद्रमा पर लैंडिंग) की तैयारी है.

यह मिशन चंद्रमा पर स्थाई बेस बनाने और मंगल जाने की राह तैयार करेगा. 2022 के आर्टेमिस-1 (बिना मानव) की सफलता के बाद अब मानव के साथ टेस्ट. अगर सब ठीक रहा, तो 2027 में चंद्रमा पर उतरेंगे. यह अंतरिक्ष इतिहास का नया अध्याय होगा.
 

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