जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन कंपनी को मिला नासा का प्रोजेक्ट, बनाएगी अर्टेमिस लूनर लैंडर

नासा ने जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन को 28.15 लाख करोड़ से ज्यादा का एक कॉन्ट्रैक्ट दिया है. डील इस बात की है ब्लू ओरिजिन अर्टेमिस मिशन के तहत चांद पर एस्ट्रोनॉट्स को पहुंचाने के लिए लैंडर बनाएगा. इस लैंडर का नाम ब्लू मून रखा गया है.

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ये है जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन के मून लैंडर ब्लू मून का मॉडल. (फोटोः ब्लू ओरिजिन) ये है जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन के मून लैंडर ब्लू मून का मॉडल. (फोटोः ब्लू ओरिजिन)

aajtak.in

  • ह्यूस्टन,
  • 22 मई 2023,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस (Jeff Bezos) की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) को 28.15 लाख करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया है. ब्लू ओरिजिन अब दूसरी कंपनी है, जिसे नासा ने चांद पर एस्ट्रोनॉट्स को पहुंचाने के लिए नया लैंडर बनाने को कहा है. इससे पहले एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) को कॉन्ट्रैक्ट मिला था. जिसके तहत उन्होंने स्टारशिप (Starship) बनाया है. 

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इस मौके पर जेफ बेजोस ने कहा कि हम चांद पर जा रहे हैं. नासा के साथ काम करके हमें सम्मानित महसूस हो रहे हैं. हम नासा के एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर जरूर लैंड कराएंगे. वहीं, ब्लू ओरिजिन में लूनर ट्रांसपोर्टेशन के वाइस प्रेसिडेंट जॉन कॉलूरिस कहते हैं कि हमारे मिशन में 7 बिलियन डॉलर्स लगेंगे. अभी हमें आधी रकम ही मिली है. 

जॉन के मुताबिक हम ब्लू मून लैंडर (Blue Moon Lander) जरूर बना लेंगे. अर्टेमिस-5 मिशन तक यह लैंडर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. माना जा रहा है कि साल 2029 तक अर्टेमिस-5 मिशन जाएगा. जॉन ने नासा को धन्यवाद कहते हुए कहा कि हम बेहद खुश है अब हमारी तकनीक और नासा का ब्रेन मिल जाएगा. 

कई कंपनियां मिलकर करेंगी इस पर काम

ब्लू ओरिजिन की एक नेशनल टीम है. जिसमें लॉकहीड मार्टिन भी शामिल हैं. लॉकहीड स्पेसक्राफ्ट की सर्विसिंग और रीफ्यूलिंग का काम देखेगा. बोईंग स्पेसक्राफ्ट में डॉकिंग टेक्नोलॉजी लगवाएगा. ड्रैपर गाइडेंस, नेविगेशन और सिमुलेटर टेक्नोलॉजी लगाएगा. एस्ट्रोबोटिक टेक्नोलॉजी पेलोड एकोमोडेशन देखेगा. हनीबी रोबोटिक्स कार्गो डिलिवरी सिस्टम संभालेगा. 

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कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक ब्लू ओरिजिन को अपना स्पेसक्राफ्ट बिना किसी एस्ट्रोनॉट चांद की सतह पर उतारना होगा. बताना होगा कि उनका सिस्टम सहीं काम करता है या नहीं. ये काम स्पेसएक्स को भी करना होगा. स्पेसएक्स के लैंडर का इस्तेमाल अर्टेमिस-3 मिशन में होगा. ये मिशन 2025-26 में जाएगा. जबकि ब्लू मून लैंडर को अर्टेमिस-5 में जगह मिलेगी. 

नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन कहते हैं कि हम और प्रतियोगिता चाहते हैं. हमें फिलहाल दो लैंडर की जरुरत पड़ेगी. ताकि भरोसा बना रहे. साथ ही बैकअप भी. इससे नासा को फायदा होगा. इससे अमेरिका और पूरी दुनिया को फायदा होगा. इससे पहले नासा ने एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को 2.9 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था. जिसकी मदद से उसने स्टारशिप रॉकेट बनाया है. 

कैसा होगा ब्लू मून लैंडर? 

यह लैंडर सीधे टावर की तरह 52 फीट ऊंचा होगा. इसके नाक पर 23 फुट चौड़ा ब्लू ओरिजिन न्यूग्लेन रॉकेट होगा. स्पेसक्राफ्ट के अंदर एस्ट्रोनॉट्स के बैठने के लिए कंपार्टमेंट होगा. इसके अंदर चार एस्ट्रोनॉट्स 30 दिनों तक रह सकेंगे. यह कंपार्टमेंट चार लैंडिंग लेग्स और रॉकेट मोटर्स के ऊपर होगा. इसमें से उतरने के लिए छोटी सी फोल्डेबल सीढ़ी होगी. 

रॉकेट के बीच वाले हिस्से में लिक्विड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन सिलेंडर होगा. साथ में रेडिएटर पैनल और सोलर एरे होंगे. यह सिर्फ लैंडर नहीं होगा बल्कि यह ऑर्बिटर भी बन जाएगा. जरुरत पड़ने पर रॉकेट भी. इसे बाद में लूनर स्पेस स्टेशन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ताकि आने-जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को कोई दिक्कत न हो. 

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