Advertisement

साइंस न्यूज़

जापान में आसमान से गिरी ठंडी आफत... बर्फबारी का 81 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:25 PM IST
  • 1/10

जनवरी 2026 के अंत में जापान के उत्तरी इलाकों में इतनी भारी बर्फबारी हुई कि कई जगहों पर रिकॉर्ड टूट गए. होक्काइडो प्रीफेक्चर में भयंकर तूफान आया, जिससे सड़कें बर्फ से ढक गईं. ट्रेन-बस रुक गईं और न्यू चितोसे एयरपोर्ट पर दर्जनों फ्लाइट्स कैंसल हो गईं.लगभग 7000 यात्री रातभर एयरपोर्ट पर फंस गए. Photo: AFP

  • 2/10

वहीं, अमोरी शहर में जनवरी में बर्फ की मोटाई 167 सेंटीमीटर पहुंच गई, जो 1945 के बाद सबसे ज्यादा है – यानी 81 साल का रिकॉर्ड टूटा. 25-26 जनवरी 2026 को होक्काइडो में भारी बर्फबारी हुई. साप्पोरो शहर में 24 घंटे में 54 सेमी से ज्यादा बर्फ गिरी, जो जनवरी का रिकॉर्ड है. Photo: AFP

  • 3/10

न्यू चितोसे एयरपोर्ट (होक्काइडो का प्रमुख एयरपोर्ट) पर 50-90 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल हुईं. जापान एयरलाइंस और ऑल निप्पॉन एयरवेज ने कई उड़ानें रद्द कीं. Photo: AFP

Advertisement
  • 4/10

करीब 7000 यात्री एयरपोर्ट पर रात गुजारने को मजबूर हुए. एयरपोर्ट ने मैट और स्लीपिंग बैग दिए, लेकिन स्थिति डिजास्टर लेवल की बताई गई. एक्सप्रेसवे, ट्रेन और बस सर्विस भी बंद हो गईं. लोग सोशल मीडिया पर मदद मांगते दिखे. Photo: AFP

  • 5/10

अमोरी शहर जापान के सबसे ज्यादा बर्फ वाले इलाकों में से एक है. यहां जनवरी में औसतन बहुत बर्फ गिरती है, लेकिन इस बार 29-31 जनवरी को 167 सेमी बर्फ जमा हो गई – 1945 के बाद सबसे ज्यादा. जापान मौसम एजेंसी ने इसे पोस्ट-वॉर रिकॉर्ड बताया. लोग बर्फ हटाने के लिए फावड़े और स्लेज इस्तेमाल कर रहे हैं. Photo: AFP

  • 6/10

जापान के पश्चिमी तट पर सी ऑफ जापान इफेक्ट नाम का मौसमी इंजन काम करता है. सर्दियों में रूस के साइबेरियन हाई प्रेशर से ठंडी, सूखी हवा पूर्व की ओर बहती है. यह हवा जापान सागर से गुजरती है, जहां पानी हवा से ज्यादा गर्म होता है. Photo: Reuters

Advertisement
  • 7/10

हवा पानी से बहुत नमी सोख लेती है. जापान सागर बड़ा है, इसलिए नमी बहुत ज्यादा होती है. जब यह नम हवा जापान के पश्चिमी पहाड़ों से टकराती है, तो ऊपर उठती है. ऊपर ठंडक से नमी बर्फ बनकर तेजी से गिरती है. अमोरी में पहाड़ इस बर्फ को फनल की तरह इकट्ठा करते हैं. Photo: AFP

  • 8/10

जापान सी पोलर एयर मास कन्वर्जेंस जोन (JPCZ) नाम की घटना होती है. साइबेरियन हवा कोरियाई प्रायद्वीप के पहाड़ों से टकराकर दो हिस्सों में बंट जाती है. ये दो ठंडी हवाएं जापान सागर के ऊपर फिर टकराती हैं. टक्कर से हवा तेजी से ऊपर जाती है, जिससे संकरी एटमॉस्फेरिक रिवर बनती है – जैसे फायर होज से बर्फ की बौछार. इससे एक शहर में कुछ घंटों में 100 सेमी तक बर्फ गिर सकती है. Photo: AFP

  • 9/10

ग्लोबल वार्मिंग का असर है. समुद्र गर्म हो रहा है. जापान सागर ग्लोबल औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है. त्सुशिमा करंट (ट्रॉपिकल से गर्म पानी लाने वाली धारा) ज्यादा गर्मी और नमी दे रही है. ज्यादा गर्म समुद्र से ज्यादा वाष्प बनती है, जो ठंडी हवा से मिलकर भारी बर्फ बनाती है.  Photo: AFP

Advertisement
  • 10/10

कुल बर्फ वाले दिन कम हो सकते हैं, लेकिन एक-एक घटना में बर्फ ज्यादा गिरेगी – क्योंकि नमी ज्यादा है. यह बर्फबारी जापान के लिए सामान्य नहीं है – रिकॉर्ड टूटने से जीवन ठप हो गया, ट्रैफिक, राजनीति प्रभावित हुई. जापान मौसम एजेंसी ने और बर्फबारी की चेतावनी दी है. यह घटना दिखाती है कि क्लाइमेट चेंज से एक्सट्रीम वेदर बढ़ रहा है – गर्म समुद्र और ठंडी हवा का कॉम्बिनेशन भयंकर बर्फबारी ला रहा है. Photo: AP
 

Advertisement
Advertisement