ईरान से सीधे आपके किचन तक... कैसे आता है LPG सिलेंडर, जानिए पूरी कहानी

कच्चा तेल धरती की गहराइयों से तेल कुओं और ऑफशोर प्लेटफॉर्म से निकाला जाता है. रिफाइनरी में फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन से पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य ईंधन बनते हैं. पाइपलाइन, ट्रक, ट्रेन और सुपरटैंकरों से स्टोरेज व डिस्ट्रीब्यूशन होता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरकर ईरान जैसे देशों से दुनिया भर में पहुंचता है, जिससे वैश्विक तनाव सीधे पेट्रोल पंप और रसोई तक असर डालता है.

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खाली सिलेंडर अपने सिर पर रखकर बदलने जाती हुई महिला. (Photo: PTI) खाली सिलेंडर अपने सिर पर रखकर बदलने जाती हुई महिला. (Photo: PTI)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

तेल के कुएं से लेकर आपकी गाड़ी और किचन तक गैस कैसे पहुंचती है.

दुनिया की अर्थव्यवस्था जिस ऊर्जा पर चलती है पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एलएनजी उसकी कहानी धरती की गहराइयों से शुरू होकर समुद्री रास्तों, पाइपलाइनों और विशाल टैंकरों से गुजरते हुए आम लोगों तक पहुंचती है.  हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने इस पूरी सप्लाई चेन को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है. 

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धरती की गहराइयों से शुरुआत

पेट्रोल, डीजल और कई अन्य ईंधन की मूल सामग्री कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल है. यह लाखों साल पहले समुद्री जीवों और पौधों के अवशेषों से बना है जो पृथ्वी की सतह के नीचे दबकर हाइड्रोकार्बन में बदल गए. ईरान जैसे देशों में विशाल तेल और गैस भंडार पाए जाते हैं. ईरान ओपेक का प्रमुख उत्पादक देश है.

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प्रतिदिन लगभग 33 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है. कच्चा तेल जमीन से निकालने के लिए तेल कुएं (ऑयल वेल) और ऑफशोर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल होता है. कई बार समुद्र में मौजूद प्लेटफॉर्म से तेल निकालकर पाइपलाइन के जरिए तट तक लाया जाता है या फ्लोटिंग स्टोरेज जहाजों में रखा जाता है. 

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रिफाइनरी में होता है असली रूपांतरण

कच्चा तेल सीधे इस्तेमाल के लायक नहीं होता. इसे रिफाइनरी में भेजा जाता है जहां इसे अलग-अलग तापमान पर गर्म कर विभिन्न ईंधनों में बदला जाता है. इस प्रक्रिया को फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहा जाता है.

रिफाइनरी में कच्चे तेल से कई उत्पाद निकलते हैं, जैसे... पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एलपीजी, नाफ्था, बिटुमेन और लुब्रिकेंट.

ईरान में कई बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन है. इसी प्रक्रिया से पेट्रोल और डीजल ईंधन तैयार होते हैं, जबकि एलपीजी और अन्य गैसें भी अलग की जाती हैं.

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एलपीजी कैसे बनती है

एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस मुख्यतः प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है. यह दो तरीकों से मिलती है...

  • प्राकृतिक गैस के रिफाइनिंग से
  • कच्चे तेल की रिफाइनिंग से

इन गैसों को दबाव में रखकर तरल बनाया जाता है ताकि उन्हें सिलेंडर या टैंकर में आसानी से स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट किया जा सके.यही गैस घरों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडरों में भरकर लोगों की रसोई तक पहुंचती है.

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एलएनजी कैसे बनती है

एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्राकृतिक गैस का तरल रूप है. जब गैस को समुद्र के रास्ते लंबी दूरी तक भेजना होता है तो उसे लगभग – 163 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर तरल बना दिया जाता है. इससे उसका आयतन लगभग 600 गुना कम हो जाता है. उसे विशेष क्रायोजेनिक टैंकरों में भेजा जा सकता है. ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में गैस का उत्पादन होता है.

कहां स्टोर होता है ईंधन

तेल और गैस को सुरक्षित रखने के लिए विशाल स्टोरेज सिस्टम बनाए जाते हैं. इनमें शामिल हैं...

  • 1. भूमिगत भंडारण टैंक – रिफाइनरी और टर्मिनलों में.
  • 2. समुद्री टैंक फार्म – बंदरगाहों पर.
  • 3. फ्लोटिंग स्टोरेज जहाज – समुद्र में तेल रखने के लिए.
  • 4. स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व – आपातकालीन भंडार.

ईरान के खार्ग द्वीप जैसे निर्यात टर्मिनलों पर सैकड़ों विशाल तेल टैंक बने हुए हैं जहां से दुनिया भर में तेल भेजा जाता है. ईरान ने समुद्र में भी लगभग 20 करोड़ बैरल तेल का भंडार जहाजों में रखा हुआ है ताकि संकट के समय निर्यात जारी रखा जा सके. 

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पाइपलाइन से लेकर सुपरटैंकर तक

तेल और गैस का परिवहन कई चरणों में होता है.

1. पाइपलाइन नेटवर्क

तेल या गैस को उत्पादन स्थल से रिफाइनरी तक पाइपलाइन से भेजा जाता है. ईरान में प्राकृतिक गैस के लिए ईरान गैस ट्रंकलाइन (IGAT) जैसी विशाल पाइपलाइन प्रणाली है जो देश के विभिन्न हिस्सों तक गैस पहुंचाती है.

2. रेल और ट्रक

रिफाइनरी से पेट्रोल और डीजल को तेल टैंकर ट्रकों या रेल टैंकरों के जरिए शहरों तक पहुंचाया जाता है.

3. समुद्री टैंकर

सबसे बड़ी मात्रा में तेल समुद्र के रास्ते जाता है. विशाल सुपरटैंकर एक बार में दो लाख टन तक तेल ले जा सकते हैं. एलएनजी के लिए विशेष क्रायोजेनिक जहाज होते हैं जिनमें गैस को बेहद कम तापमान पर रखा जाता है.

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दुनिया की ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता

ईरान की भौगोलिक स्थिति ऊर्जा व्यापार में बेहद महत्वपूर्ण है. पारस की खाड़ी से बाहर निकलने का मुख्य मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. इस संकरे समुद्री रास्ते से रोज लगभग 2 करोड़ बैरल तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी दुनिया भर में भेजी जाती है. यह वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत है. इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव तुरंत दुनिया के ईंधन बाजार को प्रभावित कर देता है. ईरान का संकट दुनिया को हिला देता है.

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हाल के संघर्षों और सैन्य तनाव के कारण कई बार इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. रिफाइनरी, पाइपलाइन और गैस टर्मिनल पर हमलों से वैश्विक सप्लाई चेन भी बाधित हो सकती है. इसका असर सीधे उन देशों पर पड़ता है जो पश्चिम एशिया से तेल आयात करते हैं. 

उदाहरण के लिए भारत अपनी बड़ी जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी करता है, इसलिए होर्मुज में किसी भी बाधा का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता तक दिखाई देता है.

तेल की यात्रा: समंदर में कुएं से आपकी रसोई तक

यदि इस पूरी प्रक्रिया को एक श्रृंखला के रूप में देखें तो ऊर्जा की यात्रा कुछ इस तरह होती है...

  • 1. धरती के नीचे से तेल और गैस का उत्पादन.
  • 2. पाइपलाइन से रिफाइनरी या गैस प्रोसेसिंग प्लांट तक ट्रांसपोर्ट.
  • 3. रिफाइनरी में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी जैसे उत्पादों में बदला जाना.
  • 4. बड़े टैंक फार्म में भंडारण.
  • 5. सुपरटैंकर, पाइपलाइन, रेल या ट्रक से परिवहन.
  • 6. डिपो और वितरण केंद्रों तक पहुंचाया जाता है.
  • 7. अंत में पेट्रोल पंप और रसोई गैस सिलेंडर के रूप में आम लोगों तक.

वैश्विक राजनीति और ऊर्जा की डोर

ईरान, खाड़ी देश, समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध ये सभी कारक तय करते हैं कि दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमत क्या होगी. रसोई गैस कितनी आसानी से उपलब्ध होगी. इस तरह जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, उसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता वह दुनिया भर के घरों की रसोई, कारों के ईंधन टैंक और उद्योगों की मशीनों तक महसूस किया जाता है.       रिपोर्टः अनन्या सिंह

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