एस्ट्रोनॉट ने स्पेस स्टेशन में अचानक बोलना बंद किया, NASA परेशान

जनवरी 2026 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट माइक फिंके को अचानक बोलने की ताकत चली गई. 20 मिनट तक वे बोल नहीं पाए. NASA ने तुरंत स्पेसवॉक रद्द किया और उन्हें स्पेसएक्स कैप्सूल से इमरजेंसी में पृथ्वी वापस लाया गया. डॉक्टर्स अभी तक कारण नहीं जान पाए. कुल 549 दिनों के स्पेस में रहने को इस समस्या का कारण माना जा रहा है.

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नासा एस्ट्रोनॉट माइक फिंके जब स्पेसएक्स कैप्सूल से बाहर आए तो उन्हें सहारा देकर निकाला गया. (Photo : Reuters) नासा एस्ट्रोनॉट माइक फिंके जब स्पेसएक्स कैप्सूल से बाहर आए तो उन्हें सहारा देकर निकाला गया. (Photo : Reuters)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:41 PM IST

जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक अनुभवी एस्ट्रोनॉट को बहुत अजीब और डरावनी समस्या हुई. चार बार स्पेस जा चुके माइक फिंके को रूटीन डिनर के दौरान अचानक बोलने की क्षमता चली गई. यह घटना 7 जनवरी 2026 को हुई जब वे लगभग छह महीने से स्पेस में थे. 

फिंके ने इसे बहुत तेज बिजली का झटका बताया. उन्हें कोई दर्द नहीं हुआ लेकिन 20 मिनट तक वे एक शब्द भी नहीं बोल पाए. यह घटना इतनी गंभीर थी कि NASA ने तुरंत अगले दिन का स्पेसवॉक रद्द कर दिया. उन्हें स्पेसएक्स कैप्सूल से इमरजेंसी में पृथ्वी पर वापस लाया. यह ISS के 25 साल के इतिहास में पहली मेडिकल इमरजेंसी इवैक्यूएशन था. 

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घटना कैसे हुई और क्या महसूस किया?

माइक फिंके उस समय क्रू-11 मिशन पर थे. वे अगले दिन स्पेसवॉक की तैयारी कर रहे थे. डिनर करते समय उनकी बोलने की ताकत चली गई. उन्होंने बाद में बताया कि यह अचानक हुआ और बहुत तेजी से आया. उन्हें कोई दर्द नहीं था, न ही वे कुछ गला फंसने जैसा महसूस कर रहे थे.  

उनके साथी एस्ट्रोनॉट्स ने तुरंत समझ लिया कि कुछ गड़बड़ है. ग्राउंड कंट्रोल को सूचित किया. फ्लाइट सर्जन्स ने तुरंत फैसला लिया कि मिशन जारी रखना खतरनाक हो सकता है. इसलिए स्पेसवॉक रद्द कर दिया गया. पूरे क्रू को जल्दी पृथ्वी पर वापस भेजने की योजना बनाई गई. 20 मिनट बाद फिंके की बोलने की क्षमता वापस आ गई लेकिन NASA ने कोई रिस्क नहीं लिया.

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पृथ्वी पर लौटने के बाद क्या हुआ?

जब माइक फिंके पृथ्वी पर लौटे तो डॉक्टर्स ने उनकी पूरी जांच की. हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गला फंसना या कोई सामान्य समस्या नहीं पाई गई. MRI और अन्य टेस्ट भी नॉर्मल आए. डॉक्टर्स अब भी सही कारण नहीं जान पाए हैं. अब फोकस इस बात पर है कि फिंके के कुल 549 दिनों के स्पेस में रहने की वजह से उनके दिमाग या शरीर में कोई खास समस्या पैदा की हो. NASA अब पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स भी खंगाल रहा है कि कहीं पहले भी ऐसी कोई अनरिपोर्टेड घटना तो नहीं हुई. फिंके खुद इसे फॉल्स अलार्म कह रहे हैं लेकिन डॉक्टर्स इसे बहुत गंभीर मान रहे हैं.

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यह पहली बार हुआ जब ISS से किसी एस्ट्रोनॉट को मेडिकल कारण से इमरजेंसी में वापस लाया गया. इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था. माइक फिंके बहुत अनुभवी एस्ट्रोनॉट हैं. वे रिटायर्ड एयर फोर्स कर्नल हैं. चार बार स्पेस जा चुके हैं. लेकिन लंबे समय तक माइक्रोग्रेविटी में रहने से शरीर और दिमाग पर क्या असर पड़ता है, यह अभी पूरी तरह समझ में नहीं आया है.

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NASA अब चिंतित है क्योंकि भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर लंबे मिशन प्लान किए जा रहे हैं. वहां यात्रा और रहना और भी लंबा होगा. अगर स्पेस में रहने से ऐसे अजीब न्यूरोलॉजिकल या फिजियोलॉजिकल बदलाव हो सकते हैं तो भविष्य के मिशनों के लिए नई तैयारियां करनी होंगी.

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माइक्रोग्रेविटी के लंबे समय के जोखिम क्या हैं?

स्पेस में लंबे समय रहने से हड्डियां कमजोर होती हैं. मांसपेशियां सिकुड़ती हैं. आंखों पर दबाव पड़ता है. अब बोलने जैसी अजीब समस्या भी सामने आई है. डॉक्टर्स सोच रहे हैं कि क्या वेटलेसनेस से दिमाग के ब्लड फ्लो या नर्व सिस्टम में कोई टेंपरेरी गड़बड़ी हो सकती है. 

यह घटना NASA को याद दिलाती है कि स्पेस अभी भी बहुत अनजाना और खतरनाक है. भले ही फिंके जल्दी ठीक हो गए लेकिन यह घटना दिखाती है कि लंबे स्पेस मिशनों में स्वास्थ्य जोखिम अभी भी बड़े हैं. NASA अब और ज्यादा सावधानी बरत रहा है. भविष्य के एस्ट्रोनॉट्स की स्वास्थ्य निगरानी को और मजबूत बनाने की योजना बना रहा है.

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