ओरियन स्पेसक्राफ्ट की खिड़की से कैद किया गया अर्थसेट यानी धरती अस्त हो रही है. आर्टेमिस II मिशन के क्रू ने यह तस्वीर ली. इसमें म्यूट ब्लू रंग की पृथ्वी चमकीले सफेद बादलों के साथ चंद्रमा की क्रेटर वाली सतह के पीछे सूर्यास्त की तरह डूबती दिख रही है. पृथ्वी का अंधेरे वाले हिस्से में रात है. पृथ्वी के रोशनी वाले हिस्से में जहां दिन हैं, वहां ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया दिख रहे हैं. चांद की सतह पर ओहम क्रेटर दिख रहा है. बीच में सेंट्रल पीक्स बने हुए हैं. ये सेंट्रल पीक्स क्रेटर में तब बनते हैं जब चंद्रमा की सतह पर इम्पैक्टसे पिघली हुई सामग्री ऊपर की ओर उछलकर ठंडी हो जाती है. Photo: NASA
आर्टेमिस II के क्रू ने चंद्रमा दिन और रात का डिफरेंस दिखाने के लिए ये तस्वीर ली है. इस डिफरेंस को टर्मिनेटर कहते हैं. इसमें तिरछी रोशनी पड़ती है. जो चंद्रमा की ऊबड़-खाबड़ जमीन को सुंदर तरीके से उजागर करती है, जिससे क्रेटर, रिज और बेसिन संरचनाएं स्पष्ट और आकर्षक ढंग से दिखाई देती हैं. टर्मिनेटर के किनारे मौजूद है- जूल क्रेटर, बर्कहॉफ क्रेटर, स्टेबिन्स क्रेटर और आसपास के हाइलैंड्स. यह तस्वीर मिशन के छठे दिन ली गई थी, जब क्रू चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के चारों ओर उड़ान भर रहे थे. Photo: NASA
आर्टेमिस II क्रू द्वारा चंद्रमा के दूर वाले हिस्से की यात्रा के दौरान ली गई है. ओरिएंटेल बेसिन चंद्रमा की दिखाई देने वाली सतह के किनारे पर स्थित है. हर्ट्ज़स्प्रंग बेसिन दो हल्के घुमावदार रिंग्स के रूप में दिख रहा है, जो वाविलोव क्रेटर द्वारा बीच में कटे हुए हैं. वाविलोव एक नया क्रेटर है जो इस पुरानी संरचना के ऊपर बन गया है. पृथ्वी का अंधेरा हिस्सा रात का समय बिता रहा है. Photo: NASA
आर्टेमिस II क्रू द्वारा चंद्रमा के फ्लाईबाई के दौरान कैद की गई इस तस्वीर में चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढकता हुआ दिख रहा है. क्रू के नजरिए से चंद्रमा इतना बड़ा दिख रहा है कि वह सूर्य को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, जिससे लगभग 54 मिनट तक पूर्ण ग्रहण बना रहा. तस्वीर में चंद्रमा के नीयर साइड की हल्की चमक भी दिख रही है, जो पृथ्वी से रिफलेक्शन से बनी है. Photo: NASA
ओरियन स्पेसक्राफ्ट से क्रू के चंद्रमा फ्लाईबाई के दौरान लिया गया यह क्लोज-अप व्यू चंद्रमा का सिर्फ एक हिस्सा फ्रेम में दिख रहा है क्योंकि वह सूर्य को पूरी तरह ढक रहा है. इमेज के बाईं ओर चमकदार चांदी जैसी चमक शुक्र ग्रह (Venus) की है. Photo: NASA
सूर्य ग्रहण के दौरान फोरग्राउंड में बाईं ओर ओरियन स्पेसक्राफ्ट दिख रहा है. चंद्रमा के निचले दाईं किनारे के ठीक नीचे दिख रहा चमकदार बिंदु शनि ग्रह(पीला तीर) है. उसके आगे, इमेज के दाईं किनारे पर दिख रहा चमकदार बिंदु मंगल (लाल तीर) है. Photo: NASA
NASA के ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने आर्टेमिस II क्रू की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एक ही फ्रेम में चंद्रमा और पृथ्वी को कैद किया. ओरियन स्पेसक्राफ्ट का दायां हिस्सा सूर्य की रोशनी से जगमगाता हुआ दिख रहा है. उसके पीछे चंद्रमा का अर्धचंद्राकार रूप दिखाई दे रहा है. उसके दाईं ओर, सूर्यास्त की ओर जा रही पृथ्वी का बहुत छोटा सा अर्धचंद्राकार आकार दिख रहा है, जो चंद्रमा की तुलना में बेहद छोटा लग रहा है. Photo: NASA
आर्टेमिस II के पायलट विक्टर ग्लोवर और मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच मिशन के छठे दिन चंद्रमा के फ्लाईबाई के दौरान चंद्रमा की सतह की तस्वीरें ले रहे हैं, ताकि इन्हें पूरी दुनिया के साथ साझा किया जा सके. क्रू ने ओरियन स्पेसक्राफ्ट की खिड़कियों पर बारी-बारी से लगभग सात घंटे बिताए, जबकि वे चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के चारों ओर उड़ान भर रहे थे. सबसे निकटतम दूरी पर वे चंद्रमा की सतह से मात्र 6,543 किलोमीटर की दूरी पर पहुंचे थे. Photo: NASA
बाईं ओर से दाईं ओर: एंजेला गार्सिया, डॉ. केल्सी यंग और डॉ. ट्रेवर ग्राफ. ये आर्टेमिस कार्यक्रम के पहले साइंस ऑफिसर हैं. इन्हें NASA के जॉनसन स्पेस सेंटर में क्रिस्टोफर सी. क्राफ्ट जूनियर मिशन कंट्रोल सेंटर के व्हाइट फ्लाइट कंट्रोल रूम में देखा जा रहा है. आर्टेमिस II मिशन के दौरान अर्थसेट से लगभग दस मिनट पहले ये साइंस ऑफिसर साइंस कंसोल पर बैठकर मिशन के डेटा को रीयल-टाइम में मॉनिटर कर रहे हैं. वे फ्लाइट कंट्रोलर्स की मदद करते हैं. इनका काम यह सुनिश्चित करता है कि मिशन के उद्देश्य सुरक्षित और कुशल तरीके से पूरे हों. Photo: NASA
आर्टेमिस II क्रू द्वारा चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के फ्लाईबाई के दौरान अर्थराइज यानी धरती उगने की यह तस्वीर ली है. पृथ्वी एक नाजुक अर्धचंद्राकार रूप में दिख रही है, जिसमें सिर्फ उसका ऊपरी किनारा रोशनी से जगमगा रहा है. 400 mm लेंस से ली गई इस तस्वीर में पृथ्वी और चंद्रमा का आकर्षक एलाइनमेंट दिख रहा है, जिसमें चंद्रमा ऊपर फोरग्राउंड में है और पृथ्वी नीचे है. Photo: NASA