Karwa Chauth 2018: ये हैं व्रत कथाएं, जानें पूजा के दौरान पढ़ने का महत्व

(Karwa Chauth 2018) सुहागिनें हर साल अपने पति की लंबी उम्र की कामना में करवा चौथ का व्रत रखती हैं. करवा चौथ की पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ने का भी बहुत महत्व होता है.

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करवा चौथ 2018 (Karwa Chauth 2018) करवा चौथ 2018 (Karwa Chauth 2018)

प्रज्ञा बाजपेयी

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST

(Karwa Chauth 2018) ज्योतिष के जानकारों की मानें तो करवा चौथ 2018 का व्रत हर सुहागिन की जिंदगी संवार सकता है, लेकिन इसके लिए इस दिव्य व्रत से जुड़े नियम और सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. करवा चौथ के व्रत और पूजन की सही विधि से इस व्रत का 100 गुना फल मिलेगा.

इस व्रत की पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ने का भी बहुत महत्व है.

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करवा चौथ की प्रचलित व्रत कथा

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था. उसके चार लड़के और एक गुणवती लड़की थी. एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा. ब्राह्मण की पुत्री ने व्रत को विधिपूर्वक करते हुए पूरे दिन निर्जला व्रत किया.

इस बात से उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी. भाइयों से रहा नहीं गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया.  एक भाई पीपल के पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी. तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो.

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बहन ने चांद का अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण कर लिया. भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु की खबर आ गई और इस बात को सुनकर वह दुखी हो विलाप करने लगी, तभी वहां से रानी इंद्राणी निकल रही थीं. उनसे उसका दुख न देखा गया.

ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला. अब तुम वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा. उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई. इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए.

करवाचौथ की दूसरी कथा के अनुसार

कहते हैं जब पांडव वन-वन भटक रहे थे तो भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को इस दिव्य व्रत के बारे बताया था. इसी व्रत के प्रताप से द्रौपदी ने अपने सुहाग की लंबी उम्र का वरदान पाया था. द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए. तभी से अपने अखंड सुहाग के लिए हिन्दू महिलाएं करवा चौथ व्रत करती हैं.

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तीसरी कथा:

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करवाचौथ के व्रत को सत्यवान और सावित्री की कथा से भी जोड़ा जाता है. इस कथा के अनुसार जब यमराज सत्यवान की आत्मा को लेने आए, तो सावित्री ने खाना-पीना सब त्याग दिया. उसकी जिद के आगे यमराज को झुकना ही पड़ा और उन्होंने सत्यवान के प्राण लौटा दिए.

चौथी कथाः

एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गांव में रहती थी. एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया. स्नान करते समय वहां एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया. वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा.

उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बांध दिया. मगर को बांधकर वो यमराज के यहां पहुंची और यमराज से कहने लगी, ‘हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है. उस मगर को नरक में ले जाओ.’ यमराज बोले, ‘अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता.’ इस पर करवा बोली, ‘अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूंगी.’

सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी. हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना.

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