क्‍या आप जानते हैं पूजा में केले के पत्तों को क्यों इतना महत्व दिया जाता है

केले के फल, तना और पत्तों को हमारे पूजा विधान में अनेक तरह से उपयोग किया जाता है. इसे शुभ और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. यह भी मान्यता है कि केले के वृक्ष में देवगुरु बृहस्पति का वास होता है.

Advertisement
भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है केला भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है केला

वन्‍दना यादव

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2016,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

केले के पत्ते को प्राचीन समय से ही पूज्य और पवित्र माना गया है. केले के फल, तने और पत्तों को हमारे पूजा विधान में अनेक तरह उपयोग किया जाता है. इसे शुभ और पवित्रता का प्रतीक माना गया है. यह भी मान्यता है कि केले के वृक्ष में देवगुरु बृहस्पति का वास होता है.

शास्त्रों के अनुसार सात गुरुवार नियमित रूप से केले की पूजा करने से सब मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और प्राप्त होता है.

Advertisement

केले के पौधे और पत्तों का महत्व
कदली व्रत में इस पौधे की पूजा होती है तो सजाए जाते हैं. श्री सत्यनारायण की कथा में भी केले के पत्तों का मंडप बनाया जाता है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसा जाता है.

पूजन में केले का भोग
बृहस्पतिवार के व्रत में भगवान विष्णु को केले के फल का भोग लगाया जाता है और इस दिन केले के पेड़ कि पूजा की जाती है. व्रत में केले की पूजा की जाती है इसलिए इस दिन केला नहीं खाया जाता है. पुरी में भगवान जगन्नाथ एवं भगवान श्रीकृष्ण को केले के फूल से बनी शाक का भोग लगाया जाता है.
चैतन्य महाप्रभु को भी यह भोग अत्यंत प्रिय था. इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पुराने समय में इसके तने से निकाले गए पानी से ही उपवास के लिए पापड़ आदि पदार्थ बनाए जाते थे.

Advertisement

ऐसे करें केले का पूजन
– सुबह मौन व्रत का पालन कर स्नान करें और केले के वृक्ष को प्रणाम कर जल चढ़ाएं.
– हल्दी की गांठ, चने की दाल और गुड़ केल को समर्पित करें.
– अक्षत, पुष्प आदि मंगल चीजें चढ़ाएं और केले के पेड़ की परिक्रमा करें.
– घर के आंगन के की ही पूजा करना चाहिए.

Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »