पितृदोष शांत करने के लिए करें पिशाच मुक्तेश्वर महादेव का पूजन...

श्राद्ध पर्व शुरू हो चुका है और इस दौरान अपने पूर्वजों को तर्पण करके के उनका आशीर्वाद लिया जाता है. इस समय कुंडली में चल रहे पितृदोष को शांत करने के लिए पूजा-पाठ करने का भी सही समय है...

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पिशाचमुक्तेश्वर महादेव मंदिर पिशाचमुक्तेश्वर महादेव मंदिर

वन्‍दना यादव

  • नई दिल्‍ली,
  • 25 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:24 AM IST

कुंडली के द्वितीय भाव, पंचम भाव, नवम भाव, दशम भाव में जब सूर्य और राहु की युति हो तो पितृदोष बनता है. पितृदोष होने पर व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से भरा रहता है और कोई भी काम टाइम पर नहीं होता है.
पितृदोष दूर करने के लिए उज्जैन स्थित पिशाचमुक्तेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन करना बहुत लाभदायक होता है.

पिशाचमुक्तेश्वर महादेव का करें अभिषेक...
किसी भी व्यक्ति को यदि पितृदोष है तो उज्जैन स्थित 84 महादेव के 68वें नंबर पर आने वाले श्री पिशाचमुक्तेश्वर महादेव का पूजन व अभिषेक करें. इससे शीघ्र ही इस दोष से मुक्ति मिलती है. साथ ही माता के कुल के पूर्वज, पिता के कुल के पिशाच योनि में हैं तो उनका भी मोक्ष होता है. इन महादेव के स्पर्श से सात कुल पवित्र होते हैं. इनके दर्शन करने से व्यक्ति ऐश्वर्यशाली, कीर्तिमान, पराक्रमी और अपार धन संपदा का स्वामी बनता है. श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों में इनका पूजन व अभिषेक कर पितृ मोक्ष की कामना करनी चाहिए.

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क्या है इनकी कथा...
कलियुग में सोमा नाम का शूद्र हुआ करता था जो धनवान होने के साथ ही नास्तिक भी था. वह हमेशा वेदों की निंदा करता था. सोमा बहुत ही हिंसक था और इसी स्वभाव के कारण सोमा को बहुत ही कष्टकारक मृत्यु को प्राप्त हुआ. इसके बाद सोमा पिशाच योनि को प्राप्त हुआ. नग्न शरीर और भयावह आकृति वाला पिशाच मार्गों पर खड़े होकर लोगों को मारने लगा.
एक समय वेद विद्या जानने वाले और सदा सत्य बोलने ब्राह्मण कहीं जा रहे थे तभी वह पिशाच उनको खाने के लिए दौड़ा. ब्राह्मण को देखकर पिशाच रूक गया और संज्ञाहीन हो गया. पिशाच को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ हो क्या रहा है. ब्राह्मण ने पिशाच से पूछा तुम मुझसे घबरा क्यों रहे हो. पिशाच ने कहा तुम ब्रह्म राक्षस हो इसलिए मुझे तुमसे भय लग रहा है. यह सब सुनकर और पिशाच को उसकी इस योनि से मुक्त होने का मार्ग बताया.
ब्राह्मण ने बताया कि सब तीर्थों में उत्तम तीर्थ है अवंतिका तीर्थ जो प्रलय में अक्षय रहती है और वहां पिशाच का नाश करने वाले महादेव हैं. ब्राह्मण के वचनों को सुनकर वह जल्दी से वहां से महाकाल वन की ओर चल दिया. वहां क्षिप्रा के जल से स्नान कर उसने पिशाच मुक्तेश्वर के दर्शन किए. दर्शन मात्र से पिशाच दिव्य देव को प्राप्त हो गया.

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मान्यता है कि जो भी मनुष्य का दर्शन-पूजन करता है उसे धन और पुत्र का वियोग नहीं होता तथा संसार में सभी सुखों को भोगकर अंतकाल में परमगति को प्राप्त करता है.

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