Advertisement

धर्म

भगवान राम की बड़ी बहन और बहनोई का ये किस्सा सुना है आपने?

aajtak.in
  • 09 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:33 AM IST
  • 1/8

पूरी दुनिया में रामायण के करीब 300 से ज्यादा संस्करण उपलब्ध हैं. भारत में रामचरित मानस के आधार पर ही हम भगवान राम से जुड़े किस्से-कहानियों पर विश्वास करते हैं. रामचरित मानस में भगवान राम की जिंदगी से जुड़े कई अहम पहलुओं पर प्रकाश नहीं डाला गया है. वहीं, वाल्मीकि रामायण में ऐसे कई विभिन्न उल्लेख किए गए हैं.

  • 2/8

रामचरित मानस में दशरथ के चार पुत्रों का उल्लेख मिलता है- भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न. लेकिन क्या आप जानते हैं दशरत की चार संतानों के अलावा भी उनकी एक पुत्री भी थी जिसका नाम शांता था. वाल्मीकि रामायण के अनुसार शांता चारों भाइयों से बड़ी थीं.

  • 3/8

दक्षिण भारत की रामायण और लोक-कथाओं में भी राम की बड़ी बहन शांता का जिक्र हुआ है. ऐसा बताया जाता है कि वह राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं. शांता को वेदों का बहुत अच्छा जानकार बताया जाता है.

photo credit: somesh nimje

Advertisement
  • 4/8

एक बार जब अयोध्या में अकाल पड़ा तो राजा दशरथ से पुरोहितों ने कहा कि पुत्री का दान किए बिना इस अकाल से मुक्ति मिलना संभव नहीं है. हालांकि राजा किसी को भी अपनी पुत्री यूं ही सौंपने को तैयार नहीं हुए. उस युग में राजा दशरथ के सबसे करीबी मित्र राजा रोमपद हुआ करते थे.

  • 5/8

रोमपद की कोई संतान नहीं थी. दशरथ ने पुरोहितों की बात मानकर शांता को अपने एक निःसंतान मित्र और अंग के राजा रोमपद को दान कर दिया. बाद में रोमपाद ने एक सफल यज्ञ से खुश होकर शांता का विवाह ऋंगी ऋषि के साथ करवा दिया.

  • 6/8

दशरथ और उनकी तीनों रानियां राज्य के उत्तराधिकारी को लेकर बहुत चिंतित थीं. कुलगुरू वशिष्ठ ने ने राजा दशरथ और उनकी पत्नियों को सलाह दी कि दामाद ऋंगी ऋषि की देखरेख में पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाएं. दशरथ ने यज्ञ में देश के कई महान ऋषियों के साथ ऋंगी ऋषि को मुख्य ऋत्विक बनने के लिए आमंत्रित किया.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Advertisement
  • 7/8

इस यज्ञ के लिए पत्नी को आमंत्रित न किए जाने पर ऋंगी बेहद दुखी हुए. आखिरकार दशरथ ने मुश्किल की घड़ियों में शांत को भी न्योता भेजा. ऋंगी ऋषि के साथ शांता के अयोध्या पहुंचते ही राज्य में कई सालों बाद भरपूर वर्षा होने लगी. हालांकि इतने वर्षों बाद बेटी को सामने देख दशरथ उन्हें पहचान नहीं पाए.

  • 8/8

दशरथ ने हैरान होकर पूछा- 'देवी, आप कौन हैं? आपके पांव रखते ही अयोध्या में चारों ओर वसंत छा गया है.' शांता ने अपना परिचय दिया तो पुत्री और माता-पिता की बरसों से सोई स्मृतियां भी जागीं और भावनाओं के कई बांध भी टूटे. यज्ञ के सफल आयोजन के बाद शांता ऋषि श्रृंग के साथ लौट गई.

Advertisement
Advertisement