चार धाम यात्रा शुरू हो चुकी है. 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन यमुनोत्री और गंगोत्री के पवित्र कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे. अब 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी भक्तों के लिए खोले जा रहे हैं. इसके बाद 23 अप्रैल को बद्रीनाथ के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. इसी क्रम में 21 अप्रैल को भगवान बद्रीविशाल के धाम जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.
इसके मद्देनजर जोशीमठ के ऐतिहासिक नृसिंह मंदिर में विशेष पंच पूजा हुई और मां लक्ष्मी के आह्वान के साथ डोली यात्रा को बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना किया गया. अब 23 अप्रैल को सुबह ठीक 06:15 बजे भगवान बद्री विशाल के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खुल जाएंगे.
परंपरा के अनुसार, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले नृसिंह मंदिर में मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. मान्यता है कि शीतकाल में मां लक्ष्मी भगवान बद्री विशाल के साथ गर्भगृह में विराजमान रहती हैं. कपाट खुलने पर उन्हें भगवान से अलग होकर बाहर लक्ष्मी मंदिर में आना होता है. इसलिए पुजारी मां लक्ष्मी को मनाने और उनकी अनुमति लेने के लिए यह विशेष अनुष्ठान करते हैं.
बता दें कि इस बार आर्मी और स्कूल के बच्चों ने बैंड-बाजे की मधुर धुनों के साथ भगवान बद्री विशाल की डोली यात्रा को रवाना किया. इस अवसर पर यहां सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे हुए थे.
इस दौरान महिलाओं द्वारा भजन कीर्तन कर भगवान नारायण का ध्यान किया गया. वहीं बूढ़े-बुजुर्ग, स्कूली बच्चे हर कोई इस बार बद्रीनाथ धाम की यात्रा को लेकर उत्साहित दिखाई दे रहा है.