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कौन है ये रशियन महिला? श्मशान में भीषण गर्मी के बीच कर रही तपस्या

हिमांशु शर्मा
  • पुष्कर,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:21 PM IST
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साधु संतों को भीषण गर्मी में अग्नि तप करते तो आपने कई बार देखा होगा. लेकिन 43 डिग्री तापमान में किसी रशियन महिला को 9 धूनी अग्नि तप करते आपने शायद कभी न देखा हो. राजस्थान के पुष्कर में एक रशियन महिला अपनी इसी अनोखी तपस्या को लेकर इन दिनों काफी चर्चा में है.

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3 मई से शुरू हुई महिला की यह अग्नि तपस्या 25 मई तक चलेगी. महिला की यह तपस्या देश ही नहीं पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. दूर-दूर से लोग इस महिला की तपस्या देखने पुष्कर पहुंच रहे हैं. इस महिला की तपस्या के वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं.

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कौन हैं ये रशियन महिला?
मूल रूप से रूस की रहने वाली राधिका योगिनी अन्नपूर्णा नाथ देश ही नहीं पूरे दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. बताया जा रहा है कि महिला ने 10 साल पहले नाथ संप्रदाय अपनाया था. उसके बाद से वो लगातार नाथ संप्रदाय के रीति रिवाज से अपना जीवन यापन कर रही है. 17 साल पहले भारत आई थी. अब उनका जीवन पूरी तरह से शिव भक्ति योग और सेवा को समर्पित है. फिलहाल उनके पास रूसी नागरिकता है और वो टूरिस्ट वीजा पर भारत में रहती हैं.

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पुष्कर में छोटी बस्ती स्थित श्मशान भूमि में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम पर राधिका योगिनी नौ धूनियों के बीच बैठकर 21 दिन अग्नि तपस्या का संकल्प लिया है. उनकी यह तपस्या 25 मई तक चलेगी. इस साधना के दौरान योगिनी रोजाना लगभग सवा तीन घंटे तक दहकती अग्नि के बीच बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप कर रही है. तपस्या के साथ प्रतिदिन हवन पूजन और आरती का आयोजन भी किया जाता है.

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25 मई को साधना की पूर्ण आहुति के साथ संत भंडारे का आयोजन होगा. यह तपस्या वह अपने गुरु बाल योगी दीपक नाथ रमते राम के सानिध्य में कर रही हैं. अन्नपूर्णा नाथ की यह पहली अग्नि तपस्या है. जबकि उनके गुरु पहले भी चार बार ऐसी अग्नि तपस्या कर चुके हैं.

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कितनी कठिन है तपस्या?
यह तपस्या प्रतिदिन विधि विधान से शुरू होती है. साधना अन्य साधनाओं की तुलना में कठिन होती है. दोनों गुरु और शिष्य साधना शुरू करने से पहले भस्म लेप करते हैं और उसके बाद सुबह 11 से दोपहर करीब सवा 2 बजे तक अग्नि की धूनियों के बीच योग मुद्रा में बैठते हैं. धूनियों को गोबर के कंडों से प्रज्वलित किया जाता है. इसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है. अंतिम दिन 108 कंडों का प्रयोग किया जाएगा. इस महिला को देखने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए लोग दूर-दूर से पुष्कर आने लगे हैं.

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