Mahabharat Facts: धृतराष्ट्र के वो 7 गंभीर पाप, जिन्होंने कुरुक्षेत्र में लिख डाली थी अपने ही 100 पुत्रों के विनाश की कहानी!

Mahabharat Facts: कहा जाता है कि महाभारत में धृतराष्ट्र केवल आंखों से ही नहीं, बल्कि पुत्र मोह में बुद्धि से भी अंधे हो चुके थे. तो आइए धृतराष्ट्र के उन 7 महापापों के बारे में जानते हैं, जिनसे उन्होंने कौरवों का भविष्य लिखा था.

Advertisement
महाभारत का अन्य तथ्य (Photo: ITG) महाभारत का अन्य तथ्य (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

Mahabharat Facts: महाभारत एक ऐसा महान ग्रंथ है जिसमें अनेक पात्र और उनके जटिल जीवन प्रसंगों का वर्णन मिलता है. इन सभी पात्रों में एक नाम है धृतराष्ट्र. जी हां, वही धृतराष्ट्र, जिनका जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों ही रहस्यों से भरे हुए हैं. कहा जाता है कि धृतराष्ट्र ने अपने जीवन में कई ऐसे कर्म किए, जिन्हें पाप माना जाता है. इन्हीं पापों के कारण अंततः उनकी मृत्यु अग्नि में जलकर हुई थी. आज हम उन 7 प्रमुख पापों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने धृतराष्ट्र के पतन की नींव रखी.

Advertisement

महाभारत में धृतराष्ट्र को भी कुरुक्षेत्र युद्ध का जिम्मेदार माना जाता है. क्योंकि वे चाहते तो इस युद्ध को रोक सकते थे, लेकिन पुत्र मोह में उन्होंने अपने ही वंश का नाश कर दिया था. यह कहना गलत नहीं होगा कि वे केवल आंखों से ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से भी अंधे हो चुके थे. आइए जानते हैं उनके उन 7 पापों के बारे में.

गांधारी के साथ धोखा

धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से हुआ. विवाह से पहले ज्योतिषियों ने चेतावनी दी थी कि गांधारी का पहला विवाह अशुभ होगा. इसलिए उनका पहले एक बकरे से विवाह कराया गया और बाद में उसे बलि देकर धृतराष्ट्र से विवाह कर दिया गया. यह एक प्रकार का छल ही था.

गांधारी के परिवार को कारागार में डालना

जब धृतराष्ट्र को यह बात पता चली, तो उन्होंने क्रोधित होकर गांधारी के पिता राजा सुबल और उनके पूरे परिवार को जेल में डाल दिया. उन्हें भोजन भी बहुत कम दिया जाता था, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएं. इसी में शकुनि बच गए थे.

Advertisement

पुत्र मोह में युद्ध को बढ़ावा देना

धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन के अन्याय को कभी नहीं रोका था. वे चाहते तो महाभारत का युद्ध टल सकता था, लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का साथ दिया और पूरे वंश का विनाश होने दिया.

द्रौपदी चीरहरण पर मौन रहना

जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब धृतराष्ट्र चुप रहे. यह महाभारत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक थी, जिसने महाभारत के युद्ध की आग को भड़काया था.

अधर्म का साथ देना

धृतराष्ट्र जानते थे कि दुर्योधन और शकुनि अधर्म कर रहे हैं, फिर भी उन्होंने उनका साथ दिया. उन्होंने विदुर और संजय जैसे ज्ञानी लोगों की सलाह को भी अनसुना कर दिया.

भीम को मारने का प्रयास

महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव उनसे मिलने आए, तो धृतराष्ट्र ने भीम को मारने की योजना बनाई. लेकिन श्रीकृष्ण ने उनकी चाल समझ ली और भीम की जगह लोहे की मूर्ति आगे कर दी, जिसे धृतराष्ट्र ने तोड़ दिया.

पूर्व जन्म का पाप

कहा जाता है कि पिछले जन्म में धृतराष्ट्र एक क्रूर राजा थे, जिन्होंने एक हंस की आंखें निकलवा दी थीं. मरते समय हंस ने उन्हें श्राप दिया था, जिसके कारण अगले जन्म में वे अंधे पैदा हुए और उनके पुत्रों का भी विनाश हुआ.

Advertisement

मृत्यु का रहस्य

माना जाता है कि महाभारत युद्ध के 15 साल बाद धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती और संजय वन में चले गए थे. एक दिन जंगल में आग लग गई थी. धृतराष्ट्र ने वहां से जाने से मना कर दिया था और गांधारी व कुंती भी उनके साथ रुक गईं. अंततः तीनों अग्नि में जलकर मृत्यु को प्राप्त हुए थे, जबकि संजय हिमालय की ओर चले गए थे. बाद में नारद मुनि ने युधिष्ठिर को यह समाचार दिया, और उन्होंने सभी की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक कार्य किए थे. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »