Chandra Grahan: सिंह राशि में लगेगा साल का पहला और सबसे लंबा ग्रहण, 1 गलती पड़ सकती है भारी

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है. जानें भारत में ग्रहण का सही समय, 9 घंटे के सूतक काल के नियम और गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी सावधानियां. साथ ही जानें चंद्र दोष से मुक्ति के लिए किए जाने वाले अचूक दान और ज्योतिषीय उपाय.

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चंद्र ग्रहण 2025 (Photo: Pexels) चंद्र ग्रहण 2025 (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास होने वाला है.  यह ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि, यानी 3 मार्च 2026 को लगेगा. ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण के समय को बहुत संवेदनशील माना गया है क्योंकि इसका सीधा असर मनुष्य के मन, स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति पर पड़ता है. चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा और भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसके नियम और सूतक काल का पालन करना अनिवार्य होगा. 

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चंद्र ग्रहण 2026 का समय और अवधि
समय की गणना के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण की शुरुआत 3 मार्च की दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर होगी. यह ग्रहण शाम 06 बजकर 47 मिनट तक चलेगा. लगभग 03 घंटे 27 मिनट की यह लंबी अवधि इसे साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण बनाती है.  भारत में दृश्यमान होने के कारण, इसके आध्यात्मिक और भौतिक प्रभाव पूरी तरह मान्य होंगे, जिससे आम जनजीवन और राशियों पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है. 

सूतक काल और इसके जरूरी नियम
शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है.  इस आधार पर भारत में सूतक सुबह 06 बजकर 20 मिनट से प्रभावी हो जाएगा .शाम को ग्रहण खत्म होने के साथ ही समाप्त होगा. सूतक काल के दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं . इस दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य या मूर्तियों को स्पर्श करने की मनाही होती है.  इस समय को ईश्वर की भक्ति और मानसिक जप के लिए श्रेष्ठ माना गया है. 

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ग्रहण के दौरान सावधानियां: क्या करें और क्या न करें
सूतक और ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं.  मान्यताओं के अनुसार, सूतक लगने से पहले ही दूध, दही और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए ताकि उन पर नकारात्मक किरणों का असर न हो. इस अवधि में भोजन बनाने, खाने या सोने से बचना चाहिए.  विशेषकर गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने और चाकू या कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है. 

चंद्र दोष से मुक्ति के लिए महादान का महत्व
चंद्र ग्रहण के दिन दान-पुण्य करने से कुंडली के चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है.  चूंकि चंद्रमा का प्रिय रंग सफेद है, इसलिए इस दिन चावल, चीनी, दूध या सफेद वस्त्रों का दान करना सुख-समृद्धि लाता है.  जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा राहु-केतु या शनि के साथ पीड़ित है, उन्हें चांदी या मोती का दान करना चाहिए.  इसके अलावा, जरूरतमंदों को अन्न दान करना और शाम को पवित्र नदियों या घर में दीप दान करना मानसिक शांति और लक्ष्मी की कृपा दिलाने वाला माना गया है. 
 

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