Chaitra Navratri 2026: कितने दिनों की है चैत्र नवरात्रि? जानें तिथि और कलश स्थापना मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाली इस नवरात्रि को साल की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक शुरुआत माना जाता है. इसी दिन से कई जगहों पर हिंदू नववर्ष का भी आगाज होता है.

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चैत्र नवरात्र की होने वाली है शुरुआत चैत्र नवरात्र की होने वाली है शुरुआत

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:42 AM IST

Chaitra Navratri 2026: : हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है. माता के भक्त पूरे साल इस पावन पर्व का इंतजार करते हैं. चैत्र नवरात्रि को हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है. इन नौ पवित्र दिनों में भक्त दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक चलेगी.  इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी .इसका समापन राम नवमी के साथ होगा. 

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2026 में कब है चैत्र नवरात्रि?

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. 

नवरात्रि प्रारंभ: 19 मार्च 2026

नवरात्रि समापन: 27 मार्च 2026

समापन पर्व: राम नवमी

इन नौ दिनों को आध्यात्मिक साधना, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का समय माना जाता है. 

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है.  इसे घर में देवी शक्ति को आमंत्रित करने का प्रतीक माना जाता है. 

19 मार्च 2026 को कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त

  • सुबह का शुभ मुहूर्त: 06:10 से 08:35 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक): 12:05 से 12:53 बजे तक

मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. इस दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाती है. 

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नवरात्रि के नौ दिन और देवी के स्वरूप

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है. 

19 मार्च – मां शैलपुत्री

20 मार्च – मां ब्रह्मचारिणी

21 मार्च – मां चंद्रघंटा

22 मार्च – मां कूष्मांडा

23 मार्च – मां स्कंदमाता

24 मार्च – मां कात्यायनी

25 मार्च – मां कालरात्रि

26 मार्च – मां महागौरी (दुर्गा अष्टमी)

27 मार्च – मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)

चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि

सुबह स्नान करके पूजा स्थान को साफ करें. लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. मिट्टी के पात्र में जौ बोएं,  उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें. कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखें. देवी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप से पूजा करें. दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत भी रखते हैं. 

चैत्र नवरात्रि का महत्व

चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु का उत्सव भी माना जाता है. यह प्रकृति में नए जीवन और ऊर्जा के आगमन का प्रतीक है. धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों में देवी दुर्गा की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जीवन में सुख-समृद्धि आती है.इसी कारण कई लोग नवरात्रि के शुभ अवसर पर नए कार्य, व्यापार या घर की शुरुआत भी करते हैं, क्योंकि इसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है.

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