अक्षय तृतीया पर क्यों किए जाते हैं शुभ काम?

वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया या आखा तीज कहते हैं. इस तिथि पर किए गए किसी भी शुभ काम का फल कई गुना ज्यादा मिलता है और कभी न खत्म होने वाला होता है.

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अक्षय तृतीया पर करें ये शुभ काम अक्षय तृतीया पर करें ये शुभ काम

दीपल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2016,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

धर्मशास्त्रों में अक्षय तृतीया के महत्व की बहुत-सी बातें बताई गई हैं. यह ऐसा मुहूर्त बताया गया है, जिसमें किसी भी शुभ काम की शुरुआत की जा सकती है. इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा-उपासना करने और दान-पुण्य करने का विधान है.

क्या है अक्षय तृतीय का महत्व :
- हिंदू धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीय का दिन सबसे शुभ माना जाता है.
- वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीय बेहद लाभकारी है.
- माना जाता है कि सतयुग और त्रेता युग की शुरुआत इसी तिथि से हुई थी.
- 9 मई को अक्षय तृतीय का पावन मुहूर्त पड़ रहा है.
- अक्षय का अर्थ है जो कभी नष्ट न हो.
- इस दिन सोना खरीदना, सोने का उपयोग करना बहुत होता है.
- पौराणिक मन्यताओं के अनुसार इस दिन जो शुभ कार्य किया जाता है उसका अनेक गुना फल हमें मिलता है.

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अक्षय तृतीय पर ग्रहों का शुभ संयोग :
- इस दिन ग्रहों का विशेष संयोग बनता है.
- सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में होते है.
- साल में सिर्फ एक दिन ये संयोग बनता है.
- सूर्य, मेष में होता है और चंद्रमा वृषभ में होता है.
- शास्त्रों में सूर्य को हमारा प्राण और चंद्रमा को हमारा मन माना गया है.
- सूर्य और चंद्रमा का संबंध बनने की वजह से ये तिथि बहुत हो जाती है.
- इसलिए इस दिन जो भी काम किया जाए उसका फल दोगुना और कभी न खत्म होने वाला होगा.

इस दिन करें ये शुभ कार्य :
- अक्षय तृतीया को शादी, गृह-प्रवेश, कपड़े और जेवर की खरीददारी या घर, जमीन, गाड़ी की खरीददारी से जुड़े काम किए जा सकते हैं.
- इस दिन नया कपड़ा, जेवर पहनना और नई संस्था और काम का उद्घाटन शुभ माना जाता है.
- पौराणिक मान्यता है कि इस दिन पितृ पक्ष को किया गया तर्पण और पिंडदान या किसी भी तरह का दान अक्षय फल देता है.
- इस दिन किया गया गंगा स्नान और पूजन सभी पापों को नष्ट करता है.
- सम्पन्नता की कामना हर इंसान को होती है. इसी वजह से इस दिन सोना खरीदने से वह अक्षय मतलब कभी न खत्म होने वाला होगा.
- अक्षय तृतीया को किया गया जप, तप, हवन, पूजा, दान का फल कई गुना बढ़ जाता है.
- इस दिन हमें सद्गुणों के लिए प्रार्थना करनी चाहिए और जाने अनजाने में किए गए पापों की क्षमा याचना करनी चाहिए.

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